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Sunday, February 28, 2016

सिद्धार्थनगर : लचर व्यवस्था से हिल रही शिक्षा की नींव एक दर्जन विद्यालय जर्जर ,104 में शौचालय निष्प्रयोज्य16189 में 53 हैंडपंप खराब, 23 देशी नलों से चल रहा काम

जागरण संवाददाता, खेसरहा, बांसी, सिद्धार्थनगर : लचर व्यवस्था पर टिकी प्राथमिक शिक्षा की नींव हिल रही है। शिक्षा के स्वरूप को व्यापक बनाने के लिए चल रहे सरकारी प्रयास भले हो रहे हैं, पर यहां तो परिषदीय शिक्षा व्यवस्था ही पूरी तरह हासिए पर है। एक दर्जन जर्जर विद्यालयों में पठन पाठन कर रहे छात्रों की जिंदगी भी अब दांव पर लगी है। समस्याओं के प्रति उदासीन विभाग को कोसते अभिभावक इस व्यवस्था से अब भयभीत हैं। विकास खंड के कुल 84 ग्राम पंचायतों में 148 प्राथमिक व 64 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना की गई है। इनमें से तीन विद्यालय अभी निर्माणाधीन ही हैं। विद्यालयों की स्थिति पर गौर करें तो कासडीह, करही बगही, एगडेगवा, निखोरिया, झुड़िया बुजुर्ग, सिसहनिया, मरवटिया स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय आदि एक दर्जन ऐसे हैं जो कब धराशायी हो जायें कुछ कहा नहीं जा सकता। विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र व छात्रओं के लिए बने कुल 206 शौचालयों में से 104 पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। शुद्ध पेय जल की व्यवस्था भी यहां काफी लचर ही है। विद्यालयों में जल निगम द्वारा लगाए गये कुल 189 इंडिया मार्का हैंडपंप में से 53 बेपानी हो चुके हैं। 23 विद्यालय इसमें ऐसे भी है जहां देशी नल के पानी से छात्र अपना गला तर कर रहे हैं। इससे गर्मी में उनमें संक्रामक बीमारी के फैलने का अंदेशा भी बढ़ गया है। विद्यालय में विद्युतीकरण का हाल तो और भी बुरा है। केवल 35 विद्यालयों में विद्युत उपकरण लगे हैं और सिर्फ 15 विद्यालयों को विद्युत कनेक्शन मिल सका है। विद्यालय व छात्रों की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वाल बनने का फरमान भी यहां हवा हवाई है। 115 विद्यालय आज भी बाउंड्री वाल विहीन है। बोले अभिभावक : पिढ़िया निवासी राम जियावन का कहना है कि सरकार नये विद्यालयों के निर्माण पर ही सिर्फ ध्यान दे रही है। पुराने व जर्जर विद्यालयों के जीर्णोद्धार पर उसका ध्यान न देना पूरे प्राथमिक शिक्षा को ध्वस्त करना है। हमारे गांव में अभी दो वर्ष भी विद्यालय बने नहीं हुआ कि उसकी पूरी छत बारिश में टपकने लगती है। कुनौना निवासी अजरुन गोंड का कहना है कि हमारे गांव के विद्यालय की स्थिति काफी गड़बड़ है। फर्श कब की टूट चुकी व शौचालय ध्वस्त हो गये। बाउंड्री जो बनी वह भी तीन वर्ष में धराशायी हो गई। महुआ के सुनील का कहना है कि सरकारी स्कूल की यह स्थिति देख अब बच्चों को वहां भेजने से भी डर लग रहा है। शिक्षा तो भगवान भरोसे थी ही अब विद्यालय भी अंतिम सांसे गिन रहे हैं। 1केसारे का ध्वस्त शौचालय।कासडीह में बेपानी इंडिया मार्का हैंडपंप।सुनील।राम जियावन।राम प्रसाद ।अजरुन गोड।ब्लाक में स्थित सभी विद्यालयों की स्थिति से ऊपर तक के लोगों को सूची के माध्यम से अवगत करा चुका हूं। किसी विद्यालय में क्या कमी है यह सभी के संज्ञान में भी है। कोई आदेश व निर्देश मिलने पर ही हमारे द्वारा कुछ किया जा सकता है। ज्ञान चन्द्र मिश्र,खंड शिक्षा अधिकारी, खेसरहा।

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