DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, May 31, 2016

आगरा : अटकी 82 बीटीसी कॉलेजों की संबद्धता, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 30 मई तक पूरी होनी थी प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नए बीटीसी कॉलेजों को संबद्धता देने की प्रक्रिया अटक कर रह गई है। फाइल भेजने की अंतिम तिथि 30 मई होने के कारण कॉलेज संचालक डायट कार्यालय में चक्कर काटते रहे। परीक्षा नियामक प्राधिकरण द्वारा वर्तमान शैक्षिक सत्र में 82 नए बीटीसी कॉलेजों को संबद्धता देने की तैयारी है। इसके लिए डायट प्राचार्य सहित दो अन्य अधिकारियों की संयुक्त टीम को कॉलेजों में जाकर मानकों की जांच कर रिपोर्ट सौंपनी थी। सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में जांच टीम के एक ही सदस्य ने सभी कॉलेजों का निरीक्षण कर लिया। इसमें कई कॉलेज ऐसे भी थे, जो मानक पूरे नहीं कर रहे थे। इसके बावजूद उन्हें क्लीन चिट देने की तैयारी थी। शिकायत डीएम से हुई तो उन्होंने दोबारा तीनों अधिकारियों को एक साथ निरीक्षण करने के निर्देश दिए। इसके बाद ही मुश्किल शुरू हुई। पहले निरीक्षण करने वाले अधिकारी चाहते थे कि उनके हिसाब से दोनों अधिकारी अपनी आख्या दें। जबकि शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने इस पर आपत्ति जता दी। उन्होंने मानक पूरे न करने वाले कॉलेजों को क्लीन चिट देने से इन्कार कर दिया और मामला लटक गया। निरीक्षण टीम के अधिकारियों में सहमति न बनने से कॉलेज संचालक भी परेशान थे। तीनों को एकजुट करने के लिए पूरे प्रयास किए। इस मामले पर डायट प्राचार्य से बात नहीं हो सकी। लेनदेन का भी मामलाअधिकारियों में सहमति न बनने के पीछे लेनदेन का मामला भी बताया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर कॉलेज वाले पहले निरीक्षण में ही ‘चढ़ावा‘ चढ़ा चुके थे, ऐसे में दूसरी बार उन्होंने सेवा करने इन्कार कर दिया। नतीजा है कि मामला लटक गया

No comments:
Write comments