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Friday, December 30, 2016

हाथरस : नन्ही अंगुलियों से कुछ नया खोजने की आरजू, विद्यालय में तैयार की गयी प्रयोगशाला

हाथरस 1पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सरीखे वैज्ञानिक बनने की ख्वाहिश हर बच्चे की होती है। मगर, ख्वाहिश से मंजिल तक पहुंच जाएं, यह जरूरी नहीं। अलबत्ता एक योग्य गुरु मिल जाए और प्रयोगशाला हो तो यकीनन मंजिल तक पहुंच सकते हैं। कुछ ऐसा ही सासनी ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय तिलौठी में देखने को मिला है। उम्मीद का दीया जला है, उसकी रोशनी में बच्चों में वैज्ञानिक के बीज रोपे जा रहे हैं। आप भी दुआ कीजिये, इनकी कामयाबी के लिए..1द्रोणाचार्य की मदद में एकलव्य : वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत विद्यालय को 71 सौ रुपये प्रयोगशाला के निर्माण के लिए मिले थे। इतने कम पैसे में प्रयोगशाला नहीं बन सकती। यह सोचकर सहायक अध्यापक अनिल कुमार का मन बैठ गया। हालांकि, उनके जेहन में बच्चों के भविष्य की तस्वीरें घूम रही थीं। घूमे भी क्यों न। इन्हीं बच्चों से उनका भी तो यशगान होगा। बहरहाल, उन्होंने खुद को इस कशमकश से निकालते हुए प्रयोगशाला तैयार करने में जुट गए। प्रयोगशाला में अलीगढ़ से उपकरण मंगाए गए। बजट जब खत्म हो गया तो अनिल कुमार ने अपनी जेब से भी पैसे लगाए। जिले की पहली प्रयोगशाला तैयार कराने में प्रधानाध्यापक महीपाल सिंह आर्य के अलावा कक्षा आठ के सरवर खान, सत्यवीर सिंह, गौरव कुमार व कुमारी कृष्णा ने भी अपने द्रोणाचार्य की मदद की। 1रोजाना नया प्रयोग करना : कक्षा सात और आठ के बच्चों को अब बैटरी तैयार करना, चुंबक का परीक्षण, जीव विज्ञान में स्लाइड का अवलोकन करना, रसायन विज्ञान में अम्लीय और क्षारीय लवणों जरिये आक्साइड आदि की जानकारी को दी गई। कक्षा छह व पांच के बच्चों को विज्ञान विषय आसानी से पढ़ाए जा रहे हैं।1अफसरों ने दी शाबासी : विभाग के पैसे का बदरबांट करते हुए तो शिक्षकों के बारे में आए दिन अधिकारियों तक खबर पहुंचती है। मगर, सहायक अध्यापक अनिल कुमार के प्रयासों को अब अधिकारियों ने भी सराहा। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत पैसा तो अन्य पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में भी पहुंचा था। पर, असल इस्तेमाल तिलौठी विद्यालय में देखने को मिला।

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