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Sunday, February 26, 2017

बरेली : सोमवार को सभी स्कूलों में होगी जांच, मिडडे-मील का खेल, दाल बन गई सांभर बीएसए बोलीं, सांभर तो मीनू में ही नहीं, एनजीओ का अनुबन्ध समाप्त करने की चेतावनी

बच्चों को खाने की वजह से पढ़ाई न छोड़नी पड़े इसलिए यह व्यवस्था है। एजेंसी को इसके लिए पूरा भुगतान दिया जाता है। छह दिन के मीनू में सांभर तो है ही नहीं। हरी ताजी सब्जी, दाल देने के आदेश हैं। मैं सोमवार को सभी स्कूलों में इसकी जांच कराऊंगी, जो एजेंसी लापरवाही कर रही है, उसका 6 कर दिया जाएगा।चंदना इकबाल सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
यह है मीनूसोमवार : रोटी व सोयाबीन अथवा दाल की बड़ी युक्त सब्जी और मौसमी फल1मंगलवार : दाल-चावल बुधवार : तहरी और दूध (प्राइमरी में 100 एमएल, जूनियर में 200 एमएल)गुरुवार : रोटी-दाल1शुक्रवार : सब्जीयुक्त तहरीशनिवार : चावल-सोयाबीन युक्त सब्जी।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय रहपुरा चौधरीबड़ा बाईपास की तरफ स्थित इस गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छह से आठ तक के कुल 100 बच्चे दर्ज हैं। स्कूल में सांभर और चावल बांटा गया। स्कूल में 64 बच्चे आए थे, लेकिन मिडडे-मील केवल 35 बच्चों ने ही खाया। लगभग आधे बच्चों ने पानी जैसा सांभर और चावल खाने से इन्कार कर दिया।प्राथमिक विद्यालय रहपुरा चौधरीइसी गांव में आगे चौराहे के तरफ पार्क के किनारे स्थित है यह प्राथमिक विद्यालय। इस विद्यालय में 150 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन उपस्थित 62 ही थे। एकल विद्यालय है। एक ही शिक्षिका ऊषा शर्मा पर सभी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा। बच्चों ने बताया रोजाना पानी जैसी सब्जी ही आती है। केवल तहरी ही कुछ ठीक रहती है।
मासूमों की भोजन योजना से जिम्मेदार कर रहे खिलवाड़, दाल-चावल का था मीनू, परोसा गई पानी जैसी सब्जी और चावल
स्कूल में सामने आई यह हकीकत

मध्याह्न् भोजन योजना का मकसद शिक्षा से महरूम बच्चों को स्कूलों की तरफ आकर्षित करने और शिक्षित नागरिक बनाने की नींव तैयार करने का है। लेकिन, परिषदीय विद्यालय में हमारे-आपके बच्चों की थाली में पानी जैसी सब्जी, सांभर और दाल परोसी जाती है। इसकी हकीकत सामने आई शनिवार को। सरकार की तरफ से तय मीनू में सोयाबीन या दाल की बरी युक्त सब्जी और चावल परोसी जानी थी। बच्चों की थाली में आया पानी जैसा बेस्वाद सांभर और मोटा चावल। खास बात, यह कि सांभर तो मिडडे-मील के मीनू में ही नहीं है। बच्चों की सेहत से खिलवाड़ पर न बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसरों की निगाह जाती है और न इन्हें देश का भविष्य बताने वाले जनप्रतिनिधियों की।

रहपुरा चौधरी महाविद्यालय की कक्षा में बैठे छात्र ’ जागरणशिक्षा मंदिर या मदिरालय : यह तस्वीर पूर्व माध्यमिक विद्यालय रहपुरा चौधरी की है। शाम ढलते ही स्कूल मदिरालयबन जाता है। सुबह कक्षाओं के बाहर व बरामदे में ही शराब की बोतलें बिखरीं मिलती हैं। उमेश शर्मायह वो सांभर है जो बेसिक शिक्षा के प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में शनिवार को बच्चों को दिया गया था। जिसमें बमुश्किल लौकी की एक छोटी सी कतरन नजर आ रही ’ जागरणस्कूल में खाना तो रोजाना ही आता है। लेकिन, खाना बहुत बेकार रहता है। कभी नमक तेज तो कभी मिर्च। मसाले और तेल का तो स्वाद ही नहीं मिलता। कई बार अपने घर जाकर खाना खाते हैं।

-यास्मीन, छात्र उच्च प्राथमिक विद्यालय रहपुरा चौधरी1खाना देने गाड़ी आती है। एक साथ ही सारा खाना आता है। स्कूल में खाते हैं, लेकिन मजा नहीं आता। कभी-कभी केले भी मिलते हैं। बहुत छोटे-छोटे होते हैं। अक्सर स्कूल में खाने के बजाय घर जाकर खाते हैं।

-महरीन, छात्र, उच्च प्राथमिक विद्यालय रहपुरा चौधरी ये खाना आया है। रोजाना इसी तरह का रहता है। न स्वाद मिलता है और न ही कोई मजा आता है। बस पेट भरने के लिए खा लेते हैं।-शोएब, छात्र उच्च प्राथमिक विद्यालय रहपुरा

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