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Friday, April 21, 2017

बुलंदशहर :विज्ञान किट में अधिकारियों का डाका,प्रत्येक विद्यालय को दिया गया था आठ हजार रुपये का बजट

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी गरीब बच्चों के हक का पैसा डकारने में माहिर हैं। पहले यूनिफार्म में खेल किया और अब उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्रओं के लिए आया विज्ञान किट का पैसा ही डकार गए। आठ हजार रुपये में से मात्र दो से तीन हजार रुपये की विज्ञान किट खरीद कर बच्चों को उपलब्ध करा दी गई। अधिकारियों ने शिक्षकों पर मनचाही फर्म से खरीदने का दबाव बनाया, तो कुछ स्कूलों से आठ हजार रुपये का चेक लेकर उन्हें कम पैसों की किट उपलब्ध करा दी गईं।

बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए शासन ने विज्ञान किट के लिए आठ-आठ हजार रुपये प्रत्येक स्कूल के लिए भेजा गया था। जनपद के 765 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए लगभग 62 लाख रुपये आया था। यह रुपये सभी विद्यालयों के खातों में भेज दिया गया और सभी को विज्ञान किट खरीदने के आदेश जारी कर दिए गए। बेसिक शिक्षा विभाग के आदेश के बाद कुछ विद्यालयों ने विज्ञान किट खरीदनी शुरू कर दीं। विभागीय सूत्रों के अनुसार उसी दौरान बेसिक शिक्षा कार्यालय से निर्देश मिले कि कोई भी विद्यालय किट नहीं खरीदेगा। कुछ खंड शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षकों से आठ हजार रुपये का हस्ताक्षर कराकर चेक ले लिया। उन विद्यालय को दो से तीन हजार रुपये की विज्ञान किट उपलब्ध करा दी गई।

इस तरह से हुआ गोलमाल : विभागीय सूत्रों के अनुसार 765 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आठ हजार रुपये कि हिसाब से पैसा भेजा गया। इसमें से प्रत्येक विद्यालय में भेजी गई किट पर पांच से छह हजार रुपये की बचत की है। इस रुपये को कुछ एबीआरसी, एनपीआरसी और खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से लगभग 38 लाख रुपये वसूला गया है। जबकि कुछ अधिकारियों के चहेते लोग भी शामिल रहे हैं।

इन उपकरणों की होनी थी खरीदारी : विज्ञान किट में माइक्रोस्कोप, मीटर, फिल्टर पेपर, लेंस सीसी, लेंस सीएक्स, आइना, दिशा सूचक यंत्र, चुंबक की पट्टी, निद्र्रव बैरोमीटर समेत 36 उपकरण खरीदने हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ स्थानों पर पूरे उपकरण भी नहीं खरीदे गए हैं।

अधिकारियों ने नहीं की मानिटरिंग : प्रशासनिक अधिकारियों ने विभिन्न विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता देखी, शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्रों की उपस्थिति और अनुपस्थिति देखी, लेकिन विज्ञान किट आदि के निरीक्षण पर ध्यान नहीं दिया। यदि उस समय ध्यान दिया जाता तो यह गोलमाल नहीं होता।सभी को विज्ञान किट खरीदने के निर्देश दिए गए थे। किसी खंड शिक्षा अधिकारी ने चेक वापस लिए हैं या पैसे लिए हैं। इसकी जानकारी नहीं है। जिन ब्लाकों में किट नहीं खरीदी गई हैं, उनको चेतावनी दी जाएगी। विज्ञान किट में रुपये वसूलने के आरोप एक दम निराधार हैं। धर्मेन्द्र सक्सेना, बीएसए।’शासन ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भेजा था विज्ञान किट का पैसा ’प्रत्येक विद्यालय को दिया गया था आठ हजार रुपये का बजट

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