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Sunday, April 9, 2017

यूपी बोर्ड की परीक्षा के कारण माध्यमिक विद्यालयों का शैक्षिक सत्र बदला, सीबीएसई की नकल पर अप्रैल से शुरू किया गया था सत्र

माध्यमिक विद्यालयों में हर साल नए सत्र में ही परीक्षा

इलाहाबाद : यूपी बोर्ड की परीक्षा के कारण माध्यमिक विद्यालयों का इस बार शैक्षिक सत्र बदला है। यदि सत्र बदलने का आधार परीक्षा है तो माध्यमिक स्कूलों में हर साल नए सत्र में ही परीक्षा होती है, तब सत्र बदलाव इस बार ही क्यों? शैक्षिक सत्र फिर से जुलाई में शुरू कराने में अफसर बाधा बने हैं। इसी वजह से शिक्षक संगठनों की मांग को दरकिनार करके सत्र को विद्यालयों पर जबरन थोपा जा रहा है। 1सीबीएसई की नकल करते हुए यूपी बोर्ड ने कुछ बरस पहले सत्र जुलाई के बजाए अप्रैल से शुरू किया है। कुछ वर्षो में कहने के लिए अप्रैल में शैक्षिक सत्र शुरू हो रहा है लेकिन, मई तक प्रवेश कार्य तक पूरे नहीं होते। इस बार हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं ही अप्रैल के दूसरे पखवारे में खत्म हो रही हैं। ऐसे में जुलाई से सत्र शुरू करने की मांग मान ली गई है। कई शिक्षक संगठन इस संबंध में पहले ही अनुरोध कर चुके थे। माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाने और वहां पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने की बजाए शासन ने सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड से संचालित कालेजों का सत्र बदला है। 2015 सत्र से हुए इस बदलाव का यह असर रहा है कि दो वर्षो में बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं अप्रैल तक चलने के बजाए मार्च में ही समाप्त होने लगी। साथ ही प्रवेश प्रक्रिया अप्रैल में शुरू हो जाती है। इसके सिवा धरातल पर कोई सार्थक परिणाम नहीं मिले। कक्षा 11 में प्रवेश आमतौर पर जुलाई में ही हुआ, क्योंकि मई में परिणाम आने के बाद जून में ग्रीष्मावकाश हो जाता है। इतना ही नहीं भले ही बोर्ड परीक्षाएं मार्च में खत्म हो जाती हैं लेकिन, शिक्षकों के मूल्यांकन में लगने से विद्यालय में प्रवेश व पढ़ाई का कार्य आमतौर पर ठप ही रहता है। साथ ही विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं भी अप्रैल में होती रही हैं।

इस बार विधानसभा चुनाव के कारण बोर्ड परीक्षाएं मार्च के दूसरे पखवारे में शुरू होकर अप्रैल के तीसरे सप्ताह में खत्म हो रही है। इसलिए जून तक पढ़ाई व प्रवेश संभव नहीं है, क्योंकि परीक्षा खत्म होते ही कक्षा 9 व 11 के वार्षिक इम्तिहान और कॉपियों का मूल्यांकन में सारा वक्त निकल जाएगा। शिक्षक संगठनों की मांग पर सत्र बदल दिया गया है लेकिन, अगले वर्ष से फिर अप्रैल से सत्र शुरू करने का निर्णय भी जायज नहीं है। शिक्षकों का तर्क है कि ठंड के कारण 15 फरवरी से पहले यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो पाना संभव नहीं है। इसलिए मार्च तक परीक्षा परिणाम किसी हालत में जारी नहीं हो सकता है, ऐसे सत्र को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है। जुलाई से सत्र बेहतर रहेगा।

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