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Monday, April 10, 2017

कैसे आकाश में सूराख़ हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों, आरटीई से मिला दाखिला, बन गए 'स्टूडेंट ऑफ द इयर'


'जो हम न कर पाए, बेटी करे'

स्पोर्ट्स में सिल्वर मेडल

व्यवहार में भी अलग अब्दुल्लाह

Pics : NBT
93% अंक पाकर चमकी शगुन 8पेज 7
इलमा अंजुम का पिछले साल स्टडी हॉल के प्ले गुप में दाखिला हुआ था, फाइनल रिजल्ट में सभी विषयों में ए ग्रेड मिला। मां कहकशां ने बताया कि मेरे पति नसीम इलेक्ट्रीशियन हैं। इतनी आमदनी नहीं है कि बच्चे को महंगे स्कूल में पढ़ा सकते। पढ़ाने का जज्बा जरूर था क्योंकि मेरे पति पढ़े लिखे नहीं हैं। मैंने भी इंटर तक ही पढ़ाई की है। स्कूल के बाद मैं ही इसे घर में पढ़ाती थी। स्कूल की टीचर से भी अपडेट लेती रहती थी। रिजल्ट में ए ग्रेड के साथ एक कोटेशन भी लिखा है। ‘दूसरे स्टूडेंट्स के लिए एक उदाहरण’। कोशिश है जो हम न कर पाए वह बेटी करे।

दुष्यंत के इस शेर को लखनऊ के कुछ बच्चों ने सच कर दिखाया है। शहर के इन गरीब बच्चों को पिछले साल राइट टु एजुकेशन के तहत प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त दाखिला मिला था। एक साल बाद रिजल्ट आया तो इन बच्चों ने वह कमाल कर दिखाया जो साधन संपन्न घर के बच्चे नहीं कर पाए। राजेंद्र नगर के अब्दुल्लाह ने जहां बेस्ट स्टूडेंट का खिताब हासिल किया तो इलमा ने क्लास टॉपर का तमगा अपने नाम किया। शगुन भी क्लास की टॉप रैंकर बनी तो प्रविष्ट शर्मा ने स्पोर्ट्स में मेडल जीता है। जीशान हुसैन राईनी की रिपोर्ट-

प्रविष्ट शर्मा को साल 2015 में आरटीई के तहत एलपीएस सेक्टर-डी में कक्षा एक में दाखिला मिला था। मां शांति शर्मा ने बताया कि एडमिशन के समय कुछ दिक्कते जरूर आईं, लेकिन एडमिशन के बाद स्कूल ने बहुत सपोर्ट किया। प्रविष्ट सेकंड क्लास में 78.6 प्रतिशत अंक के साथ फर्स्ट डिवीजन पास हुआ है। वहीं, स्पोर्ट्स में उसे सिल्वर मेडल मिला है। इसके अलावा प्रविष्ट ने मैथ्स ओलम्पियाड में भी स्कूल का प्रतिनिधित्व किया था। बकौल शांति, मैं ही बेटे को रात-रात तक पढ़ाती थी। कोई सवाल नहीं आता था तो अपने कजिन से समझती फिर इसे समझाती। मेरे पति अजय कुमार टूल्स की शॉप में काम करते हैं। प्रविष्ट कहता है कि आर्मी में जाऊंगा और देश की सेवा करूंगा।

अहमद अब्दुल्लाह का एडमिशन आरटीई के जरिए पिछले साल पायनियर मॉन्टेसरी की राजेंद्र नगर शाखा में नर्सरी में हुआ था। पिता जावेद अहमद एक दुकान में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि हमारी तनख्वाह इतनी नहीं है कि बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सकते। आरटीई से दाखिला मिल गया। बेटे ने नाम रोशन कर दिया है। प्रिंसिपल ऊषा सूरी ने बताया कि अब्दुल्लाह पढ़ाई में अव्वल होने के साथ ही आदतों में भी अलग है। स्कूल की छुट्टी के बाद जब सारे बच्चे चले जाते हैं तब क्लास से निकलता है। बाकी बच्चे क्लास की जो कुर्सियां गिरा देते हैं उन्हें यह ठीक कर के घर जाता है, इसीलिए अहमद को हमने बेस्ट स्टूडेंट के पुरस्कार से नवाजा है

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