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Wednesday, May 31, 2017

ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद में रखा गया नई शिक्षा नीति का प्रारूप, स्कूली शिक्षा हिंदी में एवं प्राथमिक/माध्यमिक पाठ्क्रम में कृषि को अनिवार्य विषय बनाने की मांग

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सरकारी और निजी स्कूलों में हिंदी माध्यम में ही पढ़ाई अनिवार्य करने की मांग की है। देश के जो इलाके खेती किसानी के लिहाज से समृद्ध हैं, वहां प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक कृषि को अनिवार्य विषय के तौर पर रखने का सुझाव है। एबीवीपी द्वारा तैयार नई शिक्षा नीति में इन बिंदुओं को प्राथमिकता के तौर पर रखा गया है। इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में गुरु तेगबहादुर, शिवाजी और महाराणा प्रताप जैसे नायकों को भी सम्मान दिलाने की कोशिश होगी।
एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में नई शिक्षा नीति के मसौदे पर एकमत बनाने की कोशिश होगी। इसके बाद इस नीति को शासन के पास भेजा जाएगा।
'हिंदी में हो स्कूली शिक्षा, अनिवार्य विषय हो कृषि'
मंगलवार को एलयू के डीपीए सभागार में राष्ट्रीय मंत्री सीमांत दास (असम), राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शहजादी (तेलंगाना) और केरल के प्रांत मंत्री पी श्याम राज ने नई शिक्षा नीति के प्रस्तावों पर चर्चा की।
राष्ट्रीय मंत्री सीमांत दास ने बताया कि देश के कई इलाके कृषि और उससे जुड़े उद्योग धंधों के लिहाज से काफी संपन्न हैं। इन इलाकों के युवाओं को इन रोजगारों से जोड़ने और उन्हें प्रशिक्षित किया जाए तो उनके घर के पास ही उन्हें रोजगार का अवसर मिल जाएगा। वहीं राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य शहजादी ने निजी स्कूल कॉलेजों में मनमाना फीस बढ़ोत्तरी और अभिभावकों से होने वाली वसूली पर चिंता जताई। केरल के प्रांत मंत्री पी श्याम राज ने इतिहास की पुस्तकों में भारतीय नायकों को पर्याप्त सम्मान न दिए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा अंग्रेजी के बजाय मातृभाषा में दिए जाने और राष्ट्रीय महापुरुषों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की मांग की।
ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में रखा गया नई शिक्षा नीति का प्रारूप

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में कृषि को अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर जोर दिया है। परिषद ने इसके लिए प्रस्ताव पारित किया है। इसके अलावा केरल में वामपंथी ¨हसा पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की की गई है।1विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री सीमांतदास, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शोधार्थी शहजादी व केरल के प्रांत मंत्री पी श्यामराज ने मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के डीपीए सभागार में पत्रकारों से वार्ता में कहा कि कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने से भावी पीढ़ी में कृषि के प्रति लगाव व जानकारी बढ़ेगी। आधुनिक विधि, तकनीक, शोध आदि की जानकारी विद्यालयों को मिलनी चाहिए। मातृभाषा में कृषि शिक्षा दी जाए और राष्ट्रीय कृषि शिक्षा नीति बनाई जाए। आइआइटी, आइआइएम की तर्ज पर कृषि संस्थान खोले जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय मंत्री सीमांत दास ने बताया कि इसी प्रस्ताव में चिकित्सा शिक्षा की कमियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया।


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