DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कैसरगंज कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महाराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फर नगर मुजफ्फरनगर मुज़फ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी मैनपूरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Sunday, May 14, 2017

महराजगंज : सरकारी आदेशों पर निजी स्कूलों की मनमानी भारी, अभिभावकों का आर्थिक शोषण जारी

महराजगंज : निजी स्कूलों में री-एडमिशन का नाम सुनते ही अधिकतर अभिभावकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। नए शैक्षणिक सत्र का प्रारंभ होने के साथ ही निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन व स्टेशनरी सहित विभिन्न मदों में ली जाने वाली फीस को लेकर अभिभावकों में नाराजगी है। शासन- प्रशासन का निजी विद्यालय पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं है । विभिन्न मदों में अभिभावकों से राशि का काम माह अगस्त से ही जारी है। निजी विद्यालय नियमों को ताक पर रख कर संचालकिए जा रहे हैं। नया सत्र प्रारंभ होने के साथ ही निजी विद्यालय प्रबंधन के द्वारा पाठ्य पुस्तक खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। संचालित अधिकांश विद्यालय प्रबंधन ने अपने यहां ही पाठ्य पुस्तक, कापी, ड्रेस सहित स्टेशनरी सामग्री रखा है। मनमानी कीमत पर विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों को उनके बच्चे के लिए स्टेशनरी व अन्य पठन-पाठन से जुड़ी सामग्री खरीदने को विवश कर रहा है। सरकारी विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं होने की वजह से मजबूरी में बच्चे को निजी विद्यालय में पढ़ाना पढ़ रहा है। ब्याज पर कर्ज लेकर निजी विद्यालयों को री-एडमिशन, वार्षिक शुल्क सहित अन्य फीस व पठन-पाठन सामग्री, ड्रेस आदि की राशि का भुगतान कर रहे हैं। वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क, विविध शुल्क आदि विभिन्न तरह के शुल्क के नाम पर अधिकतर विद्यालय प्रबंधन मोटी रकम वसूल करता है। री-एडमिशन व अन्य शुल्क लेने की वजह से अभिभावक परेशान हैं। विद्यालय प्रबंधन द्वारा अभिभावकों का आर्थिक दोहन हो रहा है। नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्रओं को निजी विद्यालयों द्वारा पठन-पाठन व ड्रेस कोड से जुड़ी सामग्री मनमानी कीमत पर उपलब्ध कराई जाती है। शहर के कई रेडिमेड कपड़ों की दुकान व किताबों की दुकानें भी कई निजी विद्यालयों द्वारा चयनित की गई हैं। ऐसे निजी विद्यालय द्वारा अपने यहां के छात्र-छात्रओं व अभिभावकों को चिह्नित दुकानों से ही किताब व ड्रेस आदि लेने के लिए बाध्य किया जाता है। अभिभावक बच्चे का भविष्य को ध्यान में रखकर मनमानी कीमत पर सामग्री खरीदने को विवश हैं। जिले में कांवेंट स्कूलों में नई क्लास शुरू होने के साथ ही अभिभावकों की पूरी जेब काटी जा रही है। जिन अभिभावकों के दो या उससे अधिक बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उनको कापी-किताबों से लेकर ड्रेस, जूता-मोजा आदि खरीदना बेहद भारी पड़ रहा है।


No comments:
Write comments