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Sunday, June 25, 2017

लोक सेवा आयोग : यहाँ हकीकत में नहीं बदलते कागजी आदेश, भटकाव के कारण आयोग की कार्यशैली पर लगातार सवाल

 

⚫ सिविल सेवा की तर्ज पर पीसीएस की मेंस परीक्षा कराने पर अमल नहीं


इलाहाबाद : उप्र लोकसेवा आयोग से प्रतियोगी ढेरों उम्मीदें लगाए हैं। आयोग हर बार उन्हें पारदर्शी तरीके से परीक्षा और परिणाम का सब्जबाग भी दिखा रहा है लेकिन, धरातल पर स्थिति ठीक इसके उलट है। एक नहीं तमाम ऐसे नियम हैं, जिन्हें आयोग ने लागू करने का वादा किया, लेकिन ऐन मौके पर वह पूरे नहीं हो सके हैं। इस भटकाव के कारण आयोग की कार्यशैली पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। 




आयोग की सम्मिलित प्रवर अधीनस्थ यानी पीसीएस 2017 की मुख्य परीक्षा सिविल परीक्षा की तर्ज पर कराने की थी। इसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया। शासन ने कई बिंदुओं जानकारी मांगी और दोबारा प्रस्ताव भेजने को कहा। आयोग ने पीसीएस का आवेदन लेने के ऐन मौके पर विशेषज्ञों को बुलाकर राय ली, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आखिरकार 2017 की परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही कराने पर सहमति बनी और जनवरी से आवेदन लिए गए। इसी वर्ष की शुरुआत में देश भर के लोकसेवा आयोग अध्यक्षों की बैठक इलाहाबाद में हुई। हिमाचल प्रदेश के आयोग अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हुआ कि सभी आयोग ऑनलाइन परीक्षाओं की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे, ताकि पेपर लीक आदि से छुटकारा मिलेगा और पारदर्शिता भी बनी रहेगी। कर्मचारी चयन आयोग लगातार ऑनलाइन परीक्षाएं करा रहा है लेकिन, उप्र लोकसेवा आयोग ने इस संबंध में अभी खाका नहीं खींचा है। 




इसके पहले आयोग ने साक्षात्कार बोर्ड चयन के पुराने पैटर्न में बदलाव करने, कौन सदस्य व विशेषज्ञ किस बोर्ड में बैठेगा इसका निर्धारण लाटरी से करने की रणनीति बनी। इसमें यह भी जोड़ा गया कि अभ्यर्थी किस बोर्ड में जाएगा यह लाटरी से तय होगा, उस पर अमल का इंतजार है। इतना ही नहीं, मुख्य परीक्षा में जीएस के 400 अंकों की आंसर शीट जारी करने की भी आयोग में कई बार चर्चा हो चुकी है। प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थियों से तीन परीक्षा केंद्रों का विकल्प मांगकर एक केंद्र का आवंटन करने की योजना फाइलों में ही कैद है। आयोग के विशेषज्ञों का पैनल बदलने के लिए हाईकोर्ट तक से निर्देश हो चुके हैं, लेकिन आयोग में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अब फिर पीसीएस परीक्षा के ऐन मौके पर तमाम बदलाव करने का निर्णय हुआ है और शासन से सहमति मांगी गई है। आयोग अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध यादव का कहना है कि वह लगातार आयोग की व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयासरत हैं। शासन की मुहर के बाद ही निर्णय लागू हो सकेंगे। 


ये मांगे लंबित 

1. आयोग की भर्तियों की सीबीआइ से जांच, पूर्व व वर्तमान अध्यक्ष व सदस्यों की संपत्ति की जांच। 

2. प्रारंभिक परीक्षा के केंद्रों का आवंटन अभ्यर्थियों की सहूलियत के अनुरूप हो। 

3. प्रारंभिक परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक वीडियोग्राफी कराई जाए। 

4. मुख्य परीक्षा के जीएस के आब्जेक्टिव पेपर की आंसर शीट जारी हो। 

5. इंटरव्यू बोर्ड के गठन में विशेषज्ञ की गुणवत्ता में सुधार हो।



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