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Thursday, June 29, 2017

सरकार बदली लेकिन आयोग का ढर्रा पुराना, अनिल यादव के ढाई बरस के कार्यकाल में जो नियम बदले वह आज भी हैं लागू

इलाहाबाद : उप्र लोकसेवा आयोग की वेबसाइट पर दर्ज नामों पर न जाइये, न ही कार्यालय के कक्षों में लगी नाम पट्टिका पर गौर कीजिए। आयोग अध्यक्ष के रूप में नाम भले ही किसी का दर्ज हो, लेकिन यहां ‘सरकार’ तो अनिल यादव की ही चल रही है। ये वही अनिल यादव हैं जिनकी 14 अक्टूबर, 2015 को हाईकोर्ट के आदेश पर नियुक्ति रद हो चुकी है। इसके बावजूद आयोग में वह अपरिहार्य बने हैं, क्योंकि उनके महज ढाई बरस के कार्यकाल में भर्तियों के जो नियम बदले गए वह आज भी लागू हैं।



आयोग हो या फिर कोई अन्य अहम संस्थान वहां के अध्यक्ष, सदस्यों का बदलना सामान्य प्रक्रिया है। बड़े ओहदों पर बैठे शख्स से संस्थान संचालन पर बहुत फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ऐसे संस्थान तय नियमों के अनुरूप ही चलते हैं। इस बात को हटाए गए आयोग अध्यक्ष अनिल यादव बखूबी समझते थे और उन्होंने ताबड़तोड़ एक नहीं कई नियमों को बदला। परिवर्तित नियमों ने प्रतियोगियों को परेशानी में डाला विरोध भी हुआ लेकिन, उन्होंने एक न सुनी। अनिल यादव के हटने के दो बरस अगले महीनों में होंगे, लेकिन उनके समय लागू नियम यथावत हैं।



आयोग में अध्यक्ष व सचिव के अलावा सदस्य और अन्य स्टाफ भी अनिल यादव के कार्यकाल का ही तैनात है। मंगलवार को शासन ने परीक्षा नियंत्रक का दूसरी बार तबादला जरूर किया है। आयोग के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध कुमार यादव की तैनाती का सवा बरस होने को है, लेकिन आयोग विवादों में ही घिरा है।



⚫ ’पीसीएस 2011 के पहले कोई भी प्रतियोगी किसी का भी अंकपत्र केवल रोल नंबर व जन्मतिथि के आधार पर देख सकता था। ’ 2012 से अंकपत्र देखने के लिए वन टाइम पासवर्ड की व्यवस्था लागू हुई, ताकि अभ्यर्थी दूसरे का अंक न देख सके।

⚫ ’उत्तर पुस्तिकाओं को संरक्षित करने का समय घटाकर एक साल किया गया, मांग के बाद भी पहले का नियम लागू।

⚫ परीक्षा केंद्र आवंटन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया, अभ्यर्थियों से तीन विकल्प मांगने की प्रक्रिया लागू नहीं।

⚫ ’इंटरव्यू बोर्ड गठित करने की प्रक्रिया में हुए बदलाव को आयोग ने अब तक बदला नहीं है।

⚫ ’उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन व प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों में बदलाव की मांग भी लंबित है।

⚫  मुख्य परीक्षा में स्केलिंग प्रक्रिया को आयोग बरकरार रखने पर अडिग।आयोग प्रतियोगियों के हित के बजाय अपने बचाव में अब कुछ बदलाव करने जा रहा है।

⚫  ’2018 से आइएएस की तर्ज पर पीसीएस की मुख्य परीक्षा कराना।

⚫  ’पीसीएस की परीक्षा का प्रश्नपत्र कैमरे के सामने खोला जाना।

⚫   मुख्य परीक्षा की कॉपियां न बदले इसके लिए बार कोडिंग।

⚫ ’पीसीएस रिजल्ट के बाद मेंस की उत्तर कुंजी जारी करना।यह बदलाव करने की तैयारी

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