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Thursday, July 27, 2017

औरैया : अंग्रेजों के जमाने में बनीं इमारतें आज भी सीना ताने खड़ी, सहेजी जाएगी 106 साल पुरानी इमारत बिधूना के पूर्व माध्यमिक स्कूल की है यह ऐतिहासिक बिल्डिंग,

1947 में देश अंग्रेजों की गुलामी से तो मुक्त हो गया लेकिन भ्रष्टाचार का घुन लग गया। यही कारण है कि अंग्रेजों के जमाने में बनीं इमारतें आज भी सीना ताने खड़ी हैं जबकि कुछ दिन पहले बनीं बिल्डिंग जमींदोज हो रही हैं। बिधूना ब्लाक में 106 वर्ष पूर्व बनी इमारत में चल रहा पूर्व माध्यमिक विद्यालय टाउन हाल इसका प्रमाण है। प्रशासन ने इसकी मजबूती व खूबसूरती को देखकर इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने की तैयारी कर ली है।बिधूना के फीडर रोड स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय टाउन हाल की इमारत अंग्रेजी हुकूमत के दौरान 1911 में बनी थी। 106 वर्ष पुरानी इस इमारत में आज भी वही मजबूती और सुंदरता है। विद्यालय के अभिलेखों में 1880 से इसकी शुरुआत का उल्लेख है। रिकार्ड में इस सन से ही छात्रों के दाखिले शुरू हुए थे। इस विद्यालय के प्रवेश द्वार से भवन तक सड़क बनी है। दोनों ओर बने लॉन और दीवारों पर उकेरी गईं तितलियों, पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों की प्राकृतिक तस्वीरें इसकी सुंदरता और अधिक बढ़ा देती हैं। यह इमारत इतनी मजबूत है कि आज भी इसमें एक दरार तक नहीं है। प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय सेंगर ने बताया कि यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों के लिए उस जमाने में आवासीय सुविधा थी। छात्रों के लिए जीआइसी में हास्टल बनवाया गया था। बाद में इसका उपयोग कन्या इंटर कालेज के भवन के लिए किया जाने लगा। दो एकड़ भूमि में बने इस विद्यालय भवन में बीईओ का कार्यालय भी है। देश को दिए अधिकारी व नेता1इस विद्यालय में पढ़ने वाले क्षेत्र के डा. महेश शर्मा, देवेंद्र गुप्ता समेत 50 से अधिक लोग अधिकारी व इंजीनियर बनकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। यहां शिक्षा ग्रहण कर चुके श्रीकांत मिश्र, आदर्श कुमार नगर पंचायत के चेयरमैन बने व प्रमोद कुमार गुप्ता विधान सभा तक पहुंचे। इस समय यहां 207-छात्र-छात्रएं पढ़ रहे हैं। नजर पड़ी तो बदलने लगे दिन इस इमारत की लंबे समय से पुताई नहीं हुई थी। लॉन में लगी घास सूख रही थी जबकि कुछ स्थानों पर प्लास्टर उखड़ रहा था। बीते वर्ष तत्कालीन डीएम माला श्रीवास्तव यहां गईं तो इसे देख दंग रह गईं। उन्होंने विद्यालय की पेंटिंग करा इसका सौंदर्यीकरण कराया। अपर जिलाधिकारी राम सेवक द्विवेदी भी इसके सम्मोहन से नहीं बच पाए। रविवार को बिधूना दौरे के दौरान जब उन्होंने इसे देखा तो इसे संरक्षित करने का संकल्प लिया


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