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Saturday, July 15, 2017

वीआइपी जिलों में अतिरिक्त  शिक्षकों की भरमार, खास जिलों के लिए तबादला बड़े अफसर ही करते रहे


⚫ लखनऊ में सबसे अधिक, इलाहाबाद दूसरे, अलीगढ़ तीसरे स्थान पर
⚫ प्रदेश के सिर्फ 49 जिलों में अधिक शिक्षक, बाकी में नहीं
खास जिलों में अतिरिक्त शिक्षक
◆ जिला             ◆ शिक्षक
    लखनऊ           128
    इलाहाबाद        52
    अलीगढ़           49
     कानपुर           41
     झांसी              23

इलाहाबाद : प्रदेश के खास जिलों के लिए तबादला बड़े अफसर ही करते रहे हैं, उन्हीं जिलों में सबसे अधिक अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती सामने आई है। वहीं, कुछ छोटे जिलों को छोड़कर करीब दो दर्जन जिलों में एक भी शिक्षक अतिरिक्त नहीं है। इस सूची ने पिछले वर्षो में वीआइपी जिलों में तबादलों पर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अफसरों ने कालेजों में कम छात्र संख्या होने के बाद भी इतने शिक्षकों को क्यों तैनात करा दिया।

सूबे के राजकीय बालक व बालिका हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कालेजों में अतिरिक्त शिक्षकों के की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने चिन्हित 638 शिक्षकों की सूची वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इसमें से आधे शिक्षक कुछ बड़े शहरों में ही तैनात हैं। बाकी चर्चित जिलों के मुख्यालय वाले स्कूलों में नियुक्त हैं। की जद में आए अधिकांश शिक्षक अफसरों के करीबी और पहुंच वाले ही हैं। अतिरिक्त शिक्षकों में लखनऊ पहले नंबर पर है, वहीं इलाहाबाद दूसरे और अलीगढ़ जिला तीसरे स्थान पर है। कानपुर चौथे, झांसी पांचवें, मुरादाबाद छठे और जौनपुर सातवें नंबर है।

खास बात यह है कि प्रधानमंत्री का क्षेत्र वाराणसी में महज सात और मुख्यमंत्री के क्षेत्र गोरखपुर जिले के स्कूलों में केवल दो शिक्षक अतिरिक्त हैं।  प्रदेश के 26 ऐसे जिले हैं, जहां एक भी शिक्षक अतिरिक्त नहीं मिला है। हालांकि वहां के जिला मुख्यालय के बालक व बालिका कालेजों में शिक्षक संख्या पर्याप्त है, वहीं ग्रामीण अंचल के कालेजों में शिक्षकों की गंभीर समस्या है। कई ऐसे बड़े शहर भी हैं, जहां छात्र संख्या के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती की गई, शायद इसीलिए वहां अतिरिक्त शिक्षकों की फौज नहीं मिली। इसमें मेरठ में छह, आगरा में दो, गौतमबुद्ध नगर में चार, बरेली में 11 शामिल हैं।

छोटे जिलों में शुमार इटावा में नौ, फरुखाबाद में 14, सहारनपुर में पांच, संभल में सात, मैनपुरी में पांच व मथुरा में 10 व बिजनौर में 16 शिक्षक अतिरिक्त मिले हैं।

हर जिले का जोन एक हाउसफुल : माध्यमिक राजकीय कालेजों में भी बेसिक की तर्ज पर शिक्षकों के के लिए जोन का निर्धारण किया गया है। राजकीय कालेजों के जोन एक में तबादले की कोई गुंजाइश नहीं है, तमाम कालेजों में हो रहा है, जहां नहीं है वहां शिक्षक संख्या पर्याप्त है। ऐसे में शहरों में आने को लालायित शिक्षकों को इस बार निराश होना पड़ेगा।

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