DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कैसरगंज कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महाराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फर नगर मुजफ्फरनगर मुज़फ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी मैनपूरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Wednesday, July 5, 2017

माध्यमिक कॉलेजों में नहीं मिल सकेंगी किताबें, लागत मूल्य में बेतहाशा वृद्धि जबकि विक्रय मूल्य में मामूली बढ़त

धर्मेश अवस्थी ’इलाहाबाद 1माध्यमिक कालेजों के करोड़ों छात्र-छात्रओं को इस बार किताबें मुहैया होने के आसार नहीं हैं। किताबों के मूल्य को लेकर शिक्षा विभाग के अफसर व प्रकाशकों में एक राय नहीं बन पाई है। देश भर के 14 में से 12 प्रकाशकों ने तय किये गए विक्रय मूल्य पर किताबें उपलब्ध कराने से इन्कार किया है। उनका कहना है कि सरकार ने विक्रय मूल्य में मामूली वृद्धि की है, जबकि किताबों का लागत मूल्य कई गुना बढ़ गया है। साथ ही कागज की गुणवत्ता भी बदल दी गई है। ऐसे में कालेजों में पढ़ाई प्रभावित होना तय है।1माध्यमिक विद्यालयों के लिए किताबों का प्रबंध माध्यमिक शिक्षा परिषद करता है। बोर्ड के अफसर पिछले वर्ष तक कुछ विषयों की किताबें प्रकाशित करने के लिए प्रकाशकों का चयन करते रहे हैं। इस बार अलग रुख अपनाते हुए बोर्ड ने किताबें मुहैया कराने का जिम्मा खुले बाजार को सौंपा। पहली जुलाई से शुरू हुए शैक्षिक सत्र 2017-18 में कक्षा नौ से लेकर 12 तक की किताबों को परिषद के नियंत्रण से मुक्त करने का आदेश जारी किया गया। इसके लिए प्रकाशकों से तय गुणवत्ता पर अंडरटेकिंग 21 जून तक मांगी गई, ताकि उन्हें पुस्तक प्रकाशन की अनुमति दी जाए। देश भर के 14 प्रकाशकों ने 100 रुपये के स्टैंप पर यह लिखकर दिया कि वे पुस्तकों के भीतरी पृष्ठों में निर्धारित स्पेसिफिकेशन के कागज 60 जीएसएम वर्जिन पल्प नान रिसाइकिल्ड वाटर मार्क ‘ए’ श्रेणी के मिलों तथा कवर पृष्ठ में 175 जीएसएम के कागज का प्रयोग करेंगे। शासन ने ऐसा न करने वाले प्रकाशक को ब्लैक लिस्टेड करते हुए कठोर कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। यहां तक सब कुछ दुरुस्त रहा। प्रकाशकों को यह उम्मीद थी कि सरकार तय शर्तो के अनुरूप विक्रय मूल्य में भी इजाफा करेगी।1 ने मंगलवार को सभी प्रकाशकों की बैठक बुलाकर उन्हें नई दरें और नियम बताए। इसमें शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा ने विक्रय मूल्य बताया जिसमें मामूली वृद्धि हुई थी, जबकि किताबों के प्रकाशन में लागत कई गुना बढ़ चुकी है। 14 में से 12 प्रकाशकों ने विरोध करते हुए, पुस्तकें प्रकाशित करने से इन्कार किया है। शिक्षा निदेशक ने कहा कि जो प्रकाशक नये विक्रय मूल्य से सहमत नहीं वह अपनी दावा वापस ले सकते हैं। आगरा के प्रकाशक अतुल जैन व अजय रस्तोगी ने बताया कि इलाहाबाद व पटना के एक-एक प्रकाशक को छोड़कर सभी ने दावेदारी वापस लेने का एलान किया है, क्योंकि किताबों के कागज का मूल्य पिछले साल से 20 से 30 प्रतिशत बढ़ गया है और जीएसटी लागू होने के बाद उसमें और बढ़ोतरी होनी है। ऐसे में किताबें प्रकाशित कर पाना संभव नहीं है। उधर, की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में प्रकाशकों को नई दरों की जानकारी दी गई, कुछ ने विरोध किया, लेकिन किताबों के प्रकाशन पर संकट नहीं है। 11’ प्रति आठ पेज92 पैसे 1’ कवर 80 पैसे 1’ कागज की गुणवत्ता बी श्रेणी 1अब बदला विक्रय मूल्य 1’ प्रति आठ पेज 1.05 रुपये 1’ कवर 84 पैसे 1’ कागज की गुणवत्ता >>ए श्रेणी 1(नोट : एक साल में कागज का मूल्य बढ़ चुका व जीएसटी से लागत बढ़ने की उम्मीद है। )1किताबों का पूर्व विक्रय मूल्यजुलाई में बैठक पर सवाल1नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है और शासन ने अब किताबों का मूल्य तय किया गया है। ऐसे में प्रकाशन समय पर होना संभव ही नहीं है। सारे प्रकाशक एक साथ कार्य करते तब भी दो माह में किताबें मुहैया करा पाना आसान नहीं था। 1

No comments:
Write comments