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Thursday, July 27, 2017

इलाहाबाद : प्रधान व प्रधानाध्यापिका के विवाद में मिड डे मील बंद,रसोइयों की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद

मेजा तहसील में ऐसा नहीं है। तहसील के मेजा विकास खंड का बड्डिहा गांव साक्षरता अभियान को मुंह चिढ़ाता नजर आ रहा है। गांव के जोर बस्ती जो कि आदिवासी बस्ती है यहां पांच से लेकर 14 वर्ष के 32 बच्चों ने अभी तक विद्यालय का मुंह नही देखा है। बस्ती के दीपक पुत्र 12 राधेश्याम, मंजीत 12 पुत्र संत लाल, सुदर्शन 12 पुत्र राम लाल, दीपा 10 पुत्री दिवाकर, अंगूरा देवी 10 पुत्री नंद लाल, संदीप 10 पुत्र राधेश्याम ऐसे बच्चे हैं, जो आज तक विद्यालय नहीं गए हैं।

ग्राम प्रधान एवं प्रधानाध्यापिका के आपसी विवाद के कारण विकास खंड मेजा के प्राथमिक विद्यालय बड्डिहा में मिड डे मील का बनना ही ठप हो गया है। दोनों के आपसी विवाद के कारण 130 से भी ज्यादा नौनिहालों को मध्याह्न भोजन नहीं मिल पा रहा है। झगड़े का कारण बजट एवं रसोइयों की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद है। मामला जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में है।

मामला ग्राम प्रधान उपेंद्र सिंह एवं विद्यालय की प्रधानाध्यापिका संगीता चौधरी के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर है। अब विवाद का रूप धारण कर चुका है, जिसमें एक दूसरे को देख लेने एवं जान से मारने की धमकी तक पहुंच गया है। प्रधानाध्यापिका संगीता चौधरी का कहना है कि ग्राम प्रधान द्वारा मिड डे मील का खाना बनवाने के लिए आवश्यक सामान नही दिया जा रहे हैं। ग्राम प्रधान चाहते हैं कि विद्यालय में प्रत्येक दिन तहरी (खिचड़ी) बने जबकि वह भुगतान मिड डे मील के मीनू के हिसाब से मांगते हैं।

उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी के बच्चों को भी विद्यालय से ही भोजन दिया जाता है। इसके साथ ही विद्यालय में अब तक रसोइयों की तैनाती नहीं हो पायी है। विद्यालय में तैनात रसोइये विरोधी पक्ष के हैं, इसलिये प्रधान नए रसोइयों को रखना चाहते है। उधर ग्राम प्रधान उपेंद्र सिंह ने प्रधानाध्यापिका के ऊपर ही मनमानी का आरोप लगाया है।मामला संज्ञान में आ चुका है, इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्यवाई की जाएगी। सभी विद्यालयों में मिड डे मील बनना आवश्यक है। इसमें किसी प्रकार की हीला हवाली नहीं होनी चाहिए। मामला बच्चों के सेहत से जुड़ा है। संजय कुशवाहा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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