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Saturday, August 26, 2017

शीर्ष कोर्ट से निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने के बाद  माध्यमिक स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक मशीनों के प्रयोग पर उठने लगे सवाल

 

इलाहाबाद : शीर्ष कोर्ट से निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने के बाद सीसीटीवी कैमरे और बायो मैटिक मशीनों के प्रयोग पर सवाल उठने लगे हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य डॉ शैलेश कुमार पांडेय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी पर सरकार का हक नहीं रह गया है। उन्होंने अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक रमेश से मिलकर ज्ञापन दिया और कहा कि अब विद्यालयों में सीसीटीवी और बायो मैटिक व्यवस्था अध्यापकों के निजी अधिकारों का हनन है। उन्होंने मांग की है कि शीघ्र ही पूरे प्रदेश में विद्यालयों से सीसीटीवी कैमरा और बायोमैटिक की अनिवार्यता समाप्त की जाय। इण्टरमीडिएट एक्ट में भी अध्यापकों की उपस्थिति उपस्थिति पंजिका से लिये जाने का प्रावधान है। बायो मैटिक से अध्यापकों के पहचान का दुरुपयोग की भी संभावना बनी रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि आपकी मर्जी के बिना आपका बायोमैटिक निशान नहीं लिया जा सकता।


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