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Saturday, September 30, 2017

बरेली : शिक्षा के लिए संजीवनी बने सुपर-50 , वॉट्सएप ग्रुप बनाकर बीएसए ने शिक्षकों को बेहतर करने की दी प्रेरणा

बरेली : शिक्षा के लिए संजीवनी बने सुपर-50 , वॉट्सएप ग्रुप बनाकर बीएसए ने शिक्षकों को बेहतर करने की दी प्रेरणा

गोरखपुर : तीन अक्टूबर से बदल जाएगा स्कूलों का समय, 2 अक्टूबर को सुबह आठ बजे ध्वजारोहण अनिवार्य 

तीन अक्टूबर से परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों के समय बदल जाएंगे। परिषदीय विद्यालय सुबह नौ से तीसरे पहर तीन बजे तक संचालित होंगे, जबकि माध्यमिक विद्यालय सुबह 8:50 से दोपहर 2:50 बजे तक चलेंगे। 31 मार्च तक विद्यालयों का समय यही रहेगा।


विद्यालयों का समय एक अक्टूबर से बदल जाता है, लेकिन पहली को रविवार है। दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विद्यालयों में विविध कार्यक्रम आयोजित होने हैं। ऐसे में तीन अक्टूबर से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। परिषदीय और यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक विद्यालय दो चरणों (शीतकाल और ग्रीष्मकाल) में संचालित होते हैं। परिषदीय विद्यालय एक अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक संचालित होते हैं। एक अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह नौ से तीसरे पहर तीन बजे तक चलते हैं। वहीं माध्यमिक विद्यालय एक अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 बजे तक चलते हैं। एक अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह 8:50 से दोपहर 2:50 बजे तक संचालित होते हैं।


गांधी जयंती पर आयोजित होंगे विविध कार्यक्रम:परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों में दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विद्यालय खुलेंगे। सुबह आठ बजे ध्वजारोहण अनिवार्य है। इसके बाद शिक्षक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। छात्रों के बीच विविध प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। छात्र सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।

सम्भल : ....वाह रे बेसिक शिक्षा विभाग....बीत गया सितम्बर, नहीं कराई सत्र परीक्षा

सम्भल : ....वाह रे बेसिक शिक्षा विभाग....बीत गया सितम्बर, नहीं कराई सत्र परीक्षा

सितंबर और फरवरी में होनी चाहिए सत्र परीक्षा, शासन के आदेश के बाद भी नहीं कराई परीक्षा, बेसिक शिक्षा पर शासन का नहीं चला कोई आदेश

लापरवाही
परीक्षा न होने पर प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख भी हो गए अवाक, डीएम ने कहा गंभीर विषय

जागरण संवाददाता सम्भल: भले ही पूरे प्रदेश में शासन के आदेशानुसार कार्य होता हो लेकिन सम्भल का बेसिक शिक्षा विभाग शासन के आदेश को नहीं मानता। शासन के आदेश के बाद भी विभाग ने सत्र परीक्षा नहीं कराई। जबकि शासन ने अगस्त व सितंबर माह में सत्र परीक्षा कराने के निर्देश दिए थे। पूरे प्रदेश हर जनपद में सत्र परीक्षा हो चुकी है। ऐसे में सम्भल में बच्चों के जीवन के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। बीएसए जहां परीक्षाएं करा दिए जाने की बात कह रहे हैं वहीं शिक्षकों ने परीक्षा न होने की बात कही है। जबकि इस प्रकरण को डीएम आनंद कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया है। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में किस तरह पढ़ाई होती है। यह किसी से छुपा नहीं है। स्कूलों की हालत तो पहले ही इतनी खराब हैं कि पढ़ाई के नाम पर बस दिखावा किया जाता है। ऐसे में अब बीएसए ने बेसिक शिक्षा विभाग पर की एक और करारी चोट दी है। इस बार तो के सभी हदें पार करते हुए शासन के आदेश को मानने से इन्कार कर दिया। शासन ने सभी जनपदों के बीएसए को पत्र भेजकर अगस्त व सितंबर माह में सत्र परीक्षा कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन बीएसए डॉ. सत्यनारायण ने शासन के आदेश पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि इस बार जिले में किसी भी विद्यालय में सत्र परीक्षा नहीं हुई। बच्चे भी परीक्षा देने के लिए तैयारी करने में जुटे थे लेकिन विभाग द्वारा परीक्षा ही नहीं कराई। जिससे बच्चों को अपनी तैयारी का आकलन करने का मौका ही नहीं मिला। अब स्कूल में एक अक्टूबर को खुलेंगे। ऐसे में बीएसए चाहकर भी सितंबर माह में परीक्षा नहीं करा पाएंगे। जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह ने कहा कि यह प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है। यह पूरी तरह से गलत है। बीएसए से इस बारे में जवाब तलब किया जाएगा।
भविष्य चौपट करने पर लगा है बेसिक शिक्षा विभाग सम्भल:
भले ही शासन परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने के लिए कितने प्रयास कर ले लेकिन अधिकारियों ने परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्था न सुधारने की कसम खा रखी है। जो विषय समय सत्र परीक्षा नहीं करा सकते वह विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने में कितने गंभीर होंगे। यह आप भी आसानी समझ सकते है। अधिकारियों की के चलते बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है।
शिक्षामित्रों के आंदोलन में गुजर गया अभी तक का सत्र सम्भल:
इस बार के सत्र में परिषदीय विद्यालयों में नाम मात्र के लिए ही पढ़ाई हो सकी है। क्योंकि पिछले दो माह से शिक्षामित्र आंदोलित है। शिक्षामित्रों के आंदोलन के चलते जिले के कई स्कूल काफी दिनों तक बंद रहे। विभाग काफी प्रयास करने के बाद भी उन स्कूलों को खुलवा नहीं आया। अब शिक्षामित्रों ने स्कूल जाना शुरू किया तो बीएसए ने सत्र परीक्षा कराने की भी जहमत नहीं उठाई।
अभी हमें सत्र परीक्षा कराने का कोई आदेश नहीं मिला है। पिछली बार सितंबर माह तक परीक्षा हो गई थी। अगर कोई आदेश मिलता है तो परीक्षा कराई जाएगी -------कपिल मलिक, प्रधानाध्यापक इटायला माफी, सम्भल ब्लाक।
अभी तक परीक्षा कराने के लिए अधिकारियों की तरफ से कोई निर्देश नहीं मिले। निर्देश मिलते ही परीक्षा करा दी जाएगी-------मौकम सिंह, एनपीआरसी पवांसा ब्लाक।
जिन ब्लाकों में परीक्षा नहीं हुई है। उन्हें निर्देश दे दिए गए हैं कि वह सत्र परीक्षा करा ले। हालांकि परीक्षा सितंबर माह में ही होनी चाहिए थी
----------डॉ. सत्यनारायण बीएसए, सम्भल ।
जिले में सत्र परीक्षा नहीं हुई है। यह गंभीर विषय है। क्योंकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलबाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीएसए को परीक्षा करा देनी चाहिए थी। सत्र परीक्षा पूरे प्रदेश में हो चुकी है। इस मामले में जिलाधिकारी से फोन पर बता करूंगा और एक दो दिन में सम्भल भी आकर बता करूंगा। जिसने भी लापरवाही की है। उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। --------बलदेव सिंह औलख, प्रभारी मंत्री सम्भल।

गोरखपुर : ग्राम समृद्धि एवं स्वच्छता पखवाड़ा मनाए जाने के सम्बंध में निर्देश जारी, देखें

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मौलिक नियुक्ति के लिए अब भी धरने पर प्रशिक्षु शिक्षक, लगातार दूसरे दिन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात कर नियुक्ति की लगाई गुहार


इलाहाबाद। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर मौलिक नियुक्ति की मांग को लेकर प्रशिक्षु शिक्षक नवमी के दिन शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय में धरने पर बैठे रहे। प्रशिक्षुओं ने लगातार दूसरे दिन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात कर नियुक्ति की गुहार लगाई।

बीएड-टीईटी पास प्रशिक्षु शिक्षकों को पिछले साल परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने नियुक्त किया था। प्रक्रिया के अनुसार इन्हें छह माह का प्रशिक्षण प्रदान किया गया एवं उसके बाद लिखित परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा इन्होंने सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली है जिसका परिणाम 30 अगस्त को जारी हुआ।

महराजगंज : छह सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं होने की हुई शिकायत, शिकायतकर्ता ने सम्बन्धित प्रकरण की जांच कराने के लिया किया मांग

महराजगंज : छह सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं होने की हुई शिकायत, शिकायतकर्ता ने सम्बन्धित प्रकरण की जांच कराने के लिया किया मांग।

पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाएंगे हर संभव कदम, डिप्टी सीएम ने जताई प्रतिबद्धता

पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाएंगे हर संभव कदम, डिप्टी सीएम ने जताई प्रतिबद्धता।


मदरसे अब 15 अक्टूबर तक वेबपोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे अपना विवरण, लगभग 4 हजार मदरसों का विवरण अभी तक नहीं हुआ ऑनलाइन

मदरसे अब 15 अक्टूबर तक वेबपोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे अपना विवरण, लगभग 4 हजार मदरसों का विवरण अभी तक नहीं हुआ ऑनलाइन।



यूपी बोर्ड से विद्यालय की लाइन मान्यता पाने का आज अंतिम दिन, अब तक दो हजार से अधिक दावेदारी कर चुके

 इलाहाबाद  : यूपी बोर्ड से विद्यालय की ऑनलाइन मान्यता के लिए आवेदन करने का शनिवार अंतिम दिन है। इसके बाद आवेदन करने पर विलंब शुल्क देना होगा। शासन के निर्देश पर बोर्ड प्रशासन पहली बार मान्यता की फाइलें ऑनलाइन ले रहा है। अब तक दो हजार से अधिक स्कूल संचालक दावेदारी कर चुके हैं, माना जा रहा है कि यह संख्या और बढ़ेगी। 


यूपी बोर्ड से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट स्कूलों को मान्यता मिलती है। इसके पहले जिला विद्यालय निरीक्षक व क्षेत्रीय कार्यालय के जरिये दावेदारी होती रही है, लेकिन मान्यता के नाम पर तमाम बार कई खेल हुए हैं। मसलन कालेज के पास भूमि व भवन न होने के बाद भी मान्यता निर्गत हो जाती थी। ऐसे में शासन ने व्यवस्था पारदर्शी करने के तहत ऑनलाइन आवेदन लेने का निर्देश दिया। जुलाई से यह प्रक्रिया चल रही है। यही नहीं क्षेत्रीय कार्यालय व मुख्यालय पर लंबित करीब 1700 मान्यता की फाइलों को लौटाया गया था। इसमें जिला विद्यालय निरीक्षक को सत्यापन रिपोर्ट भी ऑनलाइन ही देने के निर्देश हैं।



अधिकारों व सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायतों में गठित होंगे महिला एवं बाल अधिकार मंच, यूनिसेफ की मदद से पहले चरण में 7 जिलों में शुरू होगा अभियान

लखनऊ: प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ग्राम स्तर पर महिलाओं व बच्चों के अधिकारों व उनकी सुरक्षा के लिए महिला एवं बाल अधिकार मंच गठित करने जा रही है। यह मंच महिला कल्याण विभाग यूनिसेफ की मदद से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में गठित करेगा। यह स्थानीय स्तर पर दबाव समूह के रूप में काम करेगा।

दरअसल, अभी ग्राम स्तर पर महिलाओं व बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। गांव की महिलाएं अपनी शिकायत कहां और किससे करें इसको लेकर भी कोई मंच नहीं है। इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ग्राम स्तर पर ही महिला एवं बाल अधिकार मंच गठित करने जा रही है। इसमें स्थानीय वरिष्ठ व सम्मानित नागरिकों जैसे अवकाश प्राप्त शिक्षक, भूतपूर्व सैनिक, प्रभावशाली महिला व अभिभावक के साथ ही महिला समाख्या आदि के लोग सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

इस मंच में ग्राम प्रधान की अहम भूमिका होगी। साथ ही प्रधान को इस बात के लिए तैयार किया जाएगा कि वह पंचायत स्तर पर तैयार की जाने वाली विकास योजनाओं में महिलाओं व बच्चों के मुद्दे शामिल करें।

■  पहले चरण में सात जिले : प्रदेश सरकार पहले चरण में सात जिलों के 29 ब्लॉक की 1129 ग्राम पंचायतों में यह मंच गठित करने जा रही है। इसमें जिन जिलों को शामिल किया गया है उनमें प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी व मुख्यमंत्री का क्षेत्र गोरखपुर के अलावा इलाहाबाद, जौनपुर, बलरामपुर, श्रवस्ती व बहराइच हैं। इसके बाद दूसरे चरण में प्रदेश की सभी 59163 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा।

Friday, September 29, 2017

अब सरकारी प्राइमरी स्कूलों में होगी इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई

अब सरकारी प्राइमरी स्कूलों में होगी इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई
उत्तर प्रदेश की सत्ता में बीजेपी के आते ही कई चीजों में बदलाव शुरू हो गया है. सरकारी प्राइमरी स्कूलों को कॉन्वेंट के तर्ज पर विकसित करने की कवायद सिर्फ यूनिफार्म बदलने तक ही सीमित नहीं होगी. बल्कि सरकार इन स्कूलों में पढ़ाई भी इंग्लिश मीडियम से कराएगी. इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने काम भी शुरू कर दिया है.

इस बदलाव पर बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने बताया कि शुरुआत में कुछ स्कूलों को इंग्लिश मीडियम के तहत चलाया जाएगा. इसके लिए प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों को ब्लॉकवार चिन्हित कर उनमें इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई कराई जाएगी. जायसवाल ने बताया कि अभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को एक सब्जेक्ट के रूप में इंग्लिश पढ़ाई जाती है. इसके अलावा बाकी विषयों की पढ़ाई अधिकतर स्कूलों में हिंदी मीडियम से होती है. लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद सरकारी स्कूल के बच्चे इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई करेंगे.

अनुपमा जायसवाल ने बताया कि स्कूलों को चिन्हित करने के बाद यहां ऐसे शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा जो बच्चों को इंग्लिश मीडियम से पढ़ा सकें. इसके लिए बेसिक शिक्षा मंत्री ने वर्तमान में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने को कहा है. योगी सरकार ने इसी सत्र से इन स्कूलों में बच्चों की खाकी वर्दी जैसी यूनिफॉर्म को बदलावाकर कॉन्वेंट स्कूल जैसी यूनिफॉर्म भी दी है. जायसवाल ने कहा कि अब इसी दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से कराने के लिए काम कर रहा है.


22 शिक्षा मित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुनर्विचार याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था शिक्षामित्रों का समायोजन

22 शिक्षा मित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुनर्विचार याचिका

बाराबंकी : ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि में किये गए कार्य के आधार पर एबीआरसी का 144 दिन का उपार्जित अवकाश अनुमन्य करने सम्बन्धी बीएसए ने जारी किया आदेश, देखें

बाराबंकी : ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि में किये गए कार्य के आधार पर एबीआरसी का 144 दिन का उपार्जित अवकाश अनुमन्य करने सम्बन्धी बीएसए ने जारी किया आदेश, देखें

फिरोजाबाद : ग्राम प्रधानों द्वारा 14वें वित्त आयोग से परिषदीय विद्यालयों/आंगनबाड़ी में शौचालय/ओवर हेड टैंक/ वाश बेसिन आदि लगवाने के पश्चात ही किसी और मद में धन खर्च किये जाने हेतु डीएम ने जारी किया आदेश, देखें

फिरोजाबाद : ग्राम प्रधानों द्वारा 14वें वित्त आयोग से परिषदीय विद्यालयों/आंगनबाड़ी में शौचालय/ओवर हेड टैंक/ वाश बेसिन आदि लगवाने के पश्चात ही किसी और मद में धन खर्च किये जाने हेतु डीएम ने जारी किया आदेश, देखें

झाँसी : लेखाधिकारी के विरोध में प्राथमिक शिक्षक संघ ने दिया धरना, बीएसए ने अगस्त माह की वेतन निर्गत कराकर धरना कराया समाप्त, सितम्बर माह की वेतन शीघ्र निर्गत करने का दिया आश्वासन

झाँसी : लेखाधिकारी के विरोध में प्राथमिक शिक्षक संघ ने दिया धरना, बीएसए ने अगस्त माह की वेतन निर्गत कराकर धरना कराया समाप्त, सितम्बर माह की वेतन शीघ्र निर्गत करने का दिया आश्वासन
आज आज लेखाधिकारी महोदया के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष जितेंद्र दीक्षित एवं महामंत्री श्री संजीव तिवारी जी के नेतृत्व में आज कार्यालय पर धरना हुआ जिसमें बीएसए साहब ने आकर धरना समाप्त कराया और बताया कि अभी अभी 15 मिनट पहले अगस्त माह की वेतन निर्गत करा दी गई है और सितंबर माह की वेतन का टोकन प्राप्त हो गया है सभी शिक्षक समुदाय में खुशी की बात बीएसए साहब के मुखारविंद से बताई गई और धरना को समाप्त कर आया सभी ने बीएसए साहब का धन्यवाद ज्ञापित किया। ब्लॉक अध्यक्ष बबीना नितिन चौरसिया ने आभार व्यक्त किया ।धरने में वरिष्ठ उपाध्यक्ष कमलेश परिहार,शिव कुमार पारासर, संजीव रावत, संजय द्विवेदी, मृत्युंजय, रविंद्र, मनोज यादव, संरक्षक सुनील पांडे,संजय जैन, चरण सिंह पटेल, अखिलेश पटेल,अजय मंगलम, विपिन कुमार सिंह, हर सिंधु गोस्वामी, मुन्ना भैया, माधव मिश्रा, मंजूबाला, मधु पासी, जगदीश भास्कर, सुधीर पुरोहित, जगदीश प्रसाद, रमन प्रताप, मुबीन खान, चंद्रभान दुबे, राजेश गुप्ता, राम राजा, सिद्धार्थ श्रीवास्तव,प्रवीण खरे,विनय श्रीवास्तव, संजय दुबे, प्रकाश सेन, उमाशंकर श्रीवास, अमित साहू, राजमोहन सिंह, गौरव रावत, संजीव अरजरिया, राजेश कुशवाहा, मुकेश कुमार वर्मा, राजेश कुमार, पंकज तिवारी, श्यामाकांत पांडे, मोहम्मद इसराइल, आसिफ खान, विवेक चतुर्वेदी, मनोज नगरिया, हरि प्रकाश शर्मा, विपिन कुमार सिंह, मनोज तिवारी, अमर कुमार दिनकर, संजीव पाठक, दीपक, अखिलेश कुमार, आदर्श द्विवेदी, मनोज कुमार सोनी, मनोज यादव, श्रीमती छाया निरंजन आदि तमाम सैकड़ों अध्यापक उपस्थित रहे। संचालन धीरेंद्र  सिंह कोषाध्यक्ष ने किया।

श्रावस्ती : प्र0अ0/ प्रभारी प्र0अ0 के व्हाट्सएप्प नंबर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में बीएसए ने समस्त बीईओ को जारी किया आदेश, देखें

श्रावस्ती : प्र0अ0/ प्रभारी प्र0अ0 के व्हाट्सएप्प नंबर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में बीएसए ने समस्त बीईओ को जारी किया आदेश, देखें

चंदौली : बगैर मान्यता के चल रहे सभी विद्यालय होंगे बन्द, छात्र उपस्थिति एवं शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार पर टिका है शिक्षकों का भविष्य - बीएसए

जागरण संवाददाता, चंदौली : दैनिक जागरण के प्रश्न प्रहर कार्यक्रम में गुरुवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भोलेंद्र प्रताप सिंह ने सवालों के जवाब दिए। उन्होंने एक छात्र को आइआइटी और बीटेक आदि की तैयारी के बारे में विधिवत जानकारी दी वहीं बेसिक शिक्षा में चल रहे सुधारों के बारे में अन्य प्रश्न कर्ताओं को बताया। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा के सुधार में जो कदम उठाए गए हैं वह अद्वितीय है। अब कोई शिक्षक यह कहकर नहीं बचेगा कि बच्चे विद्यालय नहीं आते हैं। यदि बच्चे विद्यालय नहीं आते हैं तो उस अध्यापक को प्रयास कर बच्चे को विद्यालय लाना होगा। क्योंकि अध्यापक का भविष्य भी अब छात्र उपस्थिति और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार पर टिका है। उन्होंने बगैर मान्यता के चल रहे विद्यालयों को पूरी तरह से बंद करने की बात कही वहीं जो शिक्षक विद्यालय नहीं जा रहे हैं उनकी जांच कर कठोर कार्रवाई के लिए कहा। बीएसए से लोगों ने सवाल किए और उन्होंने सवालों का कुछ इस तरह दिया जवाब।

सवाल : अरुण यादव, बसौली नौगढ़ निवासी ने कहा प्राइमरी विद्यालयों में अध्यापक कक्षाओं में ही इंटरनेट चलाते हैं। बगैर मान्यता के चल रहे विद्यालयों पर रोक लगेगी। शिक्षा का स्तर उठाने का क्या प्रयास हो रहा है। अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते, आपके स्तर से क्या कार्रवाई होगी। जवाब : उनके संज्ञान में ये बातें आईं हैं कि कुछ अध्यापक विद्यालय में नेट चलाते हैं। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ आदेश जारी किया गया है। ऐसे लोगों की सूचना देने के लिए लोगों से कहा गया। वहीं एनपीआरसी, बीआरसी, बीएसए, डीएम, सीडीओ आदि स्तर से बराबर जांच होती है और कार्रवाई भी हो रही है। कहा शिक्षकों का काम पठन पाठन का है और उन्हें शैक्षिक गुणवत्ता बनानी है। बगैर मान्यता के चल रहे विद्यालयों पर कार्रवाई हो रही है। मौजूदा समय में छात्रों की जो ड्रेस है वह किसी कानवेंट से कम नहीं है। शिक्षक भी पर्याप्त हैं, अब अभिभावकों का यह फर्ज बनता है कि उन्हें तैयार कर समय से विद्यालय भेजें। शिक्षकों का स्थानांतरण अब लाइन लाइन व्यवस्था से है, इसलिए इसमें गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।

सवाल : अविनाश सिंह, दुर्गापुर सकलडीहा निवासी ने कहा वह 11वीं मैथ से कर रहा है, इंजीनियरिंग करना चाहता है। इसके लिए क्या करें। जवाब : 12वीं के बाद यूपीटीयू या आइआइटी की तैयारी करें। इसके लिए सेल्फ या कोचिंग ही माध्यम है। वैसे इंटर अपीयरिंग वर्ष में भी आवेदन कर सकते हैं। इसकी परीक्षा मात्र दो बार ही दे सकते हैं। इसलिए सोच समझकर तैयारी करें। भौतिकी, रसायन और गणित के ही प्रवेश परीक्षा में प्रश्न आते हैं।

सवाल : रमेश यादव, भदलपुर, चंदौली निवासी ने कहा तीन वर्षों से विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक हैं पर इसके बाद भी अभिभावक कानवेंट स्कूल में अपने बच्चों को भेजते हैं। जवाब : बेसिक शिक्षा में शिक्षा का स्तर बढ़ा है। तभी तो नामांकन बढ़ हैं। वहीं विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक भी हैं। ऐसे में अभिभावक पूरी तरह से हम पर भरोसा करके अपने बच्चों को स्कूल भेजें। उनके बच्चों को कानवेंट से भी अच्छी शिक्षा विद्यालय में दी जाएगी। कहा एमडीएम मेन्यू के अनुसार बंट रहा है। विद्यालयों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को भेजना चाहिए।

सवाल : राजू चौहान, सहदुल्लापुर चकिया निवासी कक्षा से आठ तक के चल रहे गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों का पर क्या कार्रवाई हुई है। जवाब : ब्लाक वार बगैर मान्यता के चल रहे विद्यालयों की सूची तैयार है। उन्हें नोटिस भेजी जा चुकी है। कुछ विद्यालय बंद भी करा दिए गए हैं। पर शासन का निर्देश है कि बगैर मान्यता के विद्यालय नहीं चलने चाहिए।

सवाल : सद्दाम खां इलिया निवासी परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक व्यवस्था बेहतर बनाने के क्या प्रयास हैं। जवाब : विद्यालयों में पर्याप्त अध्यापक हैं। आधुनिक कोर्स है। ट्रेंड शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं सरकार ने छात्रों का शैक्षिक स्तर बढ़ाने का जो टारगेट दिया है, उससे तो सभी अध्यापक चाहेंगे कि उनकी भी तरक्की हो। जो अध्यापक पठन-पाठन पर ध्यान नहीं देगा उसकी तरक्की रुकेगी।

सवाल : एमके सिंह, चकिया निवासी ने कहा शहाबगंज के छित्तमपुर और अरजीकला में शिक्षक समय पर नहीं आते हैं। क्या कार्रवाई करेंगे। जवाब : इन शिक्षकों की दो दिन में जांच होगी और कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्पष्ट किया जो विद्यालय में समय से नहीं पहुंचेगा और पठन-पाठन में रुचि नहीं लेगा उसके खिलाफ संबंधित बीईओ कार्रवाई करेंगे। उक्त दोनों गांवों का मामला वे स्वयं देखेंगे।

23 सितंबर को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल से हुई थी गिरफ्तारी, अब तक नहीं हुई शिक्षामित्रों की रिहाई

23 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम स्थल शाहंशाहपुर से गिरफ्तार किए गए 36 शिक्षामित्रों को रिहाई गुरुवार को भी नहीं हो सकी। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। अब सेशन कोर्ट में पेशी के बाद शिक्षामित्रों की रिहाई पर फैसला होगा।

प्रशासन ने महिलाओं के लिए दो-दो लाख रुपये के दो जमानतदार, जबकि पुरुषों के लिए पांच-पांच लाख रुपये के दो जमानतदार की शर्त रखी थी। बेल बांड की सभी औपचारिकताएं बुधवार को पूरी कर एसडीएम राजातालाब के कार्यालय में सौंप दी गई थी। गुरुवार को शिक्षामित्रों के रिहाई की बात कही जा रही थी, जो नहीं हो सकी। बीते शनिवार को पशु धन प्रक्षेत्र का लोकार्पण करने शाहंशाहपुर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में अपनी मांगों को लेकर शिक्षामित्रों ने हंगामा कर दिया था। गिरफ्तार शिक्षामित्रों में आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की प्रांतीय सचिव रीना सिंह समेत मीरजापुर, कुशीनगर, अलीगढ़ व हाथरस समेत करीब 12 जिलों के शिक्षामित्रों को निरुद्ध किया गया। जमानत की राशि भी काफी अधिक कर देने की वजह से दूरदराज के जिलों से शिक्षामित्रों के अभिभावकों को काशी पहुंचना पड़ा।

आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अमरेंद्र दुबे ने बताया कि पुलिस की ओर से नई धारा जोड़ने से शिक्षामित्रों की जमानत नहीं हो सकी। कहा कि शुक्रवार को सेशन कोर्ट में पेशी के बाद रिहाई की उम्मीद है।



प्रदेश के स्कूलों में होगी एनसीईआरटी पैटर्न पर पढ़ाई, निजी स्कूलों पर लगाम के संकेत

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा है कि प्रदेश के स्कूलों में एनसीईआरटी पैटर्न पर पढ़ाई होगी। सिलेबस तैयार हो रहा है। इसमें, 20 से 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम प्रदेश से जुड़ी आवश्यक चीजों पर आधारित होगा। वह गुरुवार को रानी लक्ष्मीबाई सीनियर सेकंडरी स्कूल के ऑडिटोरियम में स्वच्छता, सुरक्षा और शिक्षा में गुणवत्ता मुद्दे पर आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे। गोष्ठी में राजधानी के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के सैकड़ों ¨प्रसिपल और प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हुए। यह पहला मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों के ¨प्रसिपल और संचालकों को एक जगह बैठाकर बात की गई। डीजीपी सुलखान सिंह, अपर मख्य सचिव माध्यमिक संजय अग्रवाल, निदेशक माध्यमिक अमर नाथ वर्मा के साथ शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्कूलों के मुद्दे पर एक साथ नजर आए। निजी स्कूलों पर लगाम के संकेत: उपमुख्यमंत्री ने निजी स्कूलों को साफ संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि मनमानी फीस वृद्धि, किताबें-कॉपी, यूनिफार्म एक जगह से बिकवाना यह सब हो रहा है। इन सबकी सूचनाएं आ रही हैं। यह नहीं चलेगा। एक बार बच्चे का दाखिला लेते समय कुछ समान नियम बनाए जाए। एक मंच तैयार किया जा रहा है जहां, सभी से सुझाव लिए जाएंगे। उसके आधार पर ही आगे कार्रवाई होगी। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में कोचिंग चलाने वाले प्रबंधनों को भी स्पष्ट संदेश दे दिया। ऐसी व्यवस्थाएं बंद कर दें। वेबसाइट पर जारी करें सूचना: डॉ. शर्मा ने स्कूल ¨प्रसिपल और प्रबंधनों को सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल अपने प्राइमरी सेक्शन को अन्य से अलग कर लें। स्कूल में सुरक्षा और स्वच्छता जैसी कमेटी का गठन करें। इनमें, अभिभावकों को शामिल किया जाए। उन्होंने प्रबंधनों को स्कूल में उपलब्ध सभी सुविधाओं की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा। परीक्षा के दौरान प्रबंधन के लोग रहेंगे दूर: उपमुख्यमंत्री नकल के मुद्दे पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि कई निजी स्कूल बोर्ड परीक्षा में बच्चों के फार्म भरवाने से लेकर पास कराने तक का ठेका ले रहे हैं। साफ किया कि इस बार की परीक्षा में नकल का खेल नहीं चलेगा। स्वकेन्द्र की व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा है। परीक्षा के दौरान 200 मीटर के दायरे में प्रबंधन के लोग नहीं मौजूद होंगे। सीसीटीवी कैमरा नहीं तो स्कूल को केन्द्र ही नहीं बनाया जाएगा। पुलिस केन्द्र के बाहर नजर रखेगी। डॉ. दिनेश शर्मा ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों सोशल मीडिया से दूर करें।

आरएलबी में गुरुवार को गोष्ठी को डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा ने भी संबोधित किया

डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा कि जब बच्चे घर से निकलते हैं तो उन पर अभिभावक नजर रखें। खासकर जब वे मोबाइल, टीवी में ज्यादा समय दें तो ध्यान रखना जरूरी है। क्योंकि इसके ज्यादा इस्तेमाल से मानसिक विकास कुंद हो जाता है। स्कूलों को सभी स्टाफ का 100 प्रतिशत सत्यापन कराना जरूरी है। स्कूल में जो विजिटर आएं, उनका प्रवेश कार्ड भी जरूरी है। इसके अलावा स्कूल कैंटीन में काम करने वाले कर्मचारियों एवं आउट सोर्सिंग स्टाफ का सत्यापन अनिवार्य है।

जिला प्रशासन की ओर से एक एप तैयार किया गया है। डीएम कौशल राज शर्मा ने बताया कि स्कूलों में तैनात अब सभी कर्मचारियों से लेकर स्कूली ड्राइवर व कंडक्टरों का सत्यापन कराया जाएगा। यह ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम वेबसाइट और मोबाइल एप्प दोनों ही मोड में काम करेगा। अगले महीने इस एप्प की शुरुआत की जाएगी। यहां स्कूल को अपने वाहनों की सभी सूचनाएं ऑनलाइन ही अपलोड करनी होगी। इसके बाद जिला प्रशासन और आरटीओ विभाग खुद ही अपलोड डिटेल को देख कर उस ड्राइवर और कंडक्टर का सत्यापन कर देगा।

बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी के मुद्दे पर जिलाधिकारी और निजी स्कूल आमने सामने नजर आए। असल में, जिलाधिकारी ने बच्चे से घर से निकले से लेकर छुट्टी के बाद घर तक पहुंचने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होने की बात कही। जिसपर स्कूल प्रबंधन भड़क गए। आईसीएसई स्कूलों के संगठन के प्रेसिडेंट माला मेहरा ने कहा कि कैम्पस के अंदर तो सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह स्कूलों की है। साथ ही कैम्पस के बाहर 500 मीटर तक भी यह देखा जा सकता है। लेकिन घर आने-जाने तक छात्र की सुरक्षा स्कूल के लिए मुमकिन नहीं है। स्कूल वाहनों में ट्रैकर लगाए जाएं जिसे अभिभावक भी चेक करें।

नया प्रयोग : बेसिक स्कूलों में सुधार की कवायद, सीबीएसई पैटर्न पर ब्लॉकों में खुलेंगे स्कूल


 

 

 

 

बेसिक स्कूलों में सुधार की कवायद अब धीरे-धीरे तेज हो गई है। इसका श्रेय भी बेसिक स्कूलों के उन शिक्षकों को जाता है जो वास्तव में बेसिक शिक्षा के प्रति नकारात्मक छवि को दूर करने में दिल से जुटे हैं। अब ऐसे स्कूल जिनको पर्यावरण, स्लोगन, स्वच्छता व बच्चों की उपस्थिति और पठन-पाठन को सुधारा हो तो ऐसे स्कूलों को सीबीएसई की तर्ज पर संचालित किया जाएगा।

बेसिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश में बेसिक स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर संचालित करने का शासनादेश जारी कर दिया है। इसमें हर ब्लाक में पांच-पांच स्कूलों का चयन किया जाएगा। बीएसए ने ऐसे स्कूलों को चिह्न्ति करना शुरू कर दिया है।

मुरादाबाद में अभी दो बेसिक स्कूल सीबीएसई पैटर्न पर हैं। अब सभी अच्छे स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर संचालित किया जाएगा। महात्मा गांधी जयंती दो अक्टूबर से बेसिक स्कूलों को इस पैटर्न पर संचालित करने की शुरुआत हो जाएगी। वर्ष 2018 से हर ब्लाक में पांच-पांच ऐसे स्कूल खुल जाएंगे। सीबीएसई पैटर्न पर संचालित स्कूलों में ऐसे शिक्षकों को स्थानांतरित किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग की अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किताबों से बच्चे पढ़ेंगे। बेसिक शिक्षा निदेशालय अंग्रेजी भाषा में सभी विषयों की किताबें हर वर्ष छपवाता है। मुरादाबाद के लोधीपुर राजपूत स्थित प्राइमरी स्कूल, मूंढापांडे समेत कई स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर करने की तैयारी बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। इससे ऐसे पब्लिक स्कूलों में महंगी फीस लेकर पढ़ाने वालों के लिए एक विकल्प होगा कि वह अब सरकारी स्कूल में सीबीएसई की शिक्षा अपने बच्चों को दिला सकेंगे।जिनमें गुणात्मक सुधार हुआ उनमें होगी सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई

गांधी जयंती दो अक्टूबर से शुरू हो जाएगा सीबीएसई पैटर्नशीघ्र ही सीबीएसई पैटर्न पर कुछ स्कूलों को संचालित किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों को चिह्न्ति किया जा चुका है। वर्ष 2018 तक हर ब्लॉक में पांच-पांच स्कूल सीबीएसई पैटर्न पर संचालित होंगे। -संजय सिंह, बीएसए

  

सीबीएसई बोर्ड : 9वीं और 11वीं के फार्म भरने में आधार जरूरी, स्कूल प्रबंधन छात्रों की संख्या में नहीं कर सकेंगे गड़बड़ी


लखनऊ। सीबीएसई ने 9वीं व 11वीं के पंजीकरण के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है। आधार कार्ड न होने की स्थिति में आधार नामांकन संख्या प्रयोग कर सकेंगे। स्कूल प्रबंधन छात्रों की संख्या में गड़बड़ी नहीं कर सकें, इसके लिए बोर्ड ने छात्रों की संख्या के अनुपात में सेक्शन की जानकारी भी मांगी है। पंजीकरण के बाद अगर इसमें कोई बदलाव होता है तो संबंधित स्कूल का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। सीबीएसई बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक केके चौधरी ने इस संबंध में स्कूल प्रबंधनों को निर्देश जारी किए हैं।पंजीकरण शुरू : सत्र 2017-18 के लिए 26 सितंबर से पंजीकरण शुरू हो गए हैं और इससे पहले ही बोर्ड ने यह निर्देश जारी किया है। 31 अक्तूबर तक बिना विलंब शुल्क के फॉर्म भरा जाना है। विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण 28 नवम्बर तक किए जा सकेंगे। स्कूलों में एनसीईआरटी के पैटर्न पर पढ़ाई होगी

पंजीकरण का कार्यक्रम:
26 सितम्बर से 31 अक्तूबर:150 रुपये
01 से 07 नवम्बर: 650 रुपये
08 से 14 नवम्बर : 1150 रुपये
15 से 21 नवम्बर: 2150 रुपये
22 से 28 नवम्बर: 5150 रुपये
(शुल्क रुपये प्रति छात्र)