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Wednesday, October 4, 2017

फतेहपुर : गोद लिए 24 परिषदीय स्कूलों का नहीं पुरसाहाल, संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रही शिक्षा, बीएसए ने दिया कायाकल्प का भरोसा

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग के 24 स्कूलों को अधिकारियों द्वारा गोद लेकर शैक्षिक माहौल बेहतर करने का सपना धराशाई हो गया है। वहीं संसाधनों की बात करें तो पेयजल के लिए बच्चे तरस रहे हैं। जर्जर कक्षा-कक्ष की बात हो या फिर विद्युतीकरण की सुविधा सब दिवा स्वप्न देखने के समान साबित हो रही है। तमाम स्कूल ऐसे हैं जिन विद्यालयों के कैंपस में अभी तक कदम नहीं पहुंचे हैं। अधिकारियों की उदासीनता कहें या फिर व्यस्तता शासन की मंशा पर कुठाराघात हो रहा है।

जिले में मौजूदा समय में 1903 प्राथमिक एवं 747 उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों की गिरती साख को बचाने के लिए समय समय पर अभिनव प्रयोग किए जाते रहे हैं। नए प्रयोग में विद्यालयों को अधिकारियों द्वारा गोद लिया गया है। एक माह पूर्व शासन के निर्देश पर जिले में विभागाध्यक्ष की कुर्सी संभालने वाले अधिकारियों द्वारा एक एक विद्यालय को गोद लिया गया था। गोद लेने का काम कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है। विद्यालयों की स्थिति में किसी ¨बदु पर सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा है।

प्राथमिक विद्यालय बिलंदा ऐसा ही एक गोद लिया स्कूल हैं। जिसे अप्रैल माह में तत्कालीन बीएसए विनय कुमार ने गोद लिया था। इसके बाद एक माह पूर्व इस विद्यालय को मुख्य विकास अधिकारी द्वारा गोद लिया गया है। स्कूल की बदहाली एक नजर पड़ते ही दिखाई पड़ जाती है। स्कूल में साफ सफाई की बहुतायत कमी है। तैनाती पाए अध्यापकों द्वारा चलाया गया स्वच्छता अभियान कारगर साबित नहीं हुआ। यहां पर सफाई कर्मी कौन है तैनात शिक्षकाएं नहीं जानती हैं। पेयजल के लिए लगाया गया हैंडपंप वर्षों से खराब पड़ा है। स्कूल में बाउंड्रीवाल नहीं है तो इमारत के तीन कक्ष आसमान से पानी टपकने पर झरने का रूप धारण कर लेते हैं। यह तो बानगी मात्र है जिले के 24 स्कूलों की कमोवेश यही स्थिति है।

पूर्व बीएसए ने डाली थी गोद लेने की परंपरा: गोद लेकर विद्यालयों के कायाकल्प की शुरुआत तत्कालीन बीएसए विनय कुमार सिंह द्वारा डाली गई थी। अप्रैल माह में उन्होंने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलंदा के साथ प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय मिश्रमऊ को गोद लिया था। इसके साथ ही सभी खंड शिक्षाधिकारियों को दो-दो स्कूल गोद दिलवाए थे। उन्होंने योजना बनाई थी कि इन स्कूलों में गोद लेने वाले अफसर शिक्षक की भूमिका में माह में कम से कम एक बार नजर आएंगे।

वही विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए विशेष निगाह रखेंगे जिससे कि यह स्कूल बानगी बन सकें। बीएसए श्री सिंह बताते हैं कि उनकी योजना को शासन ने सराहा और विद्यालयों को गोद लेने की परंपरा शासन ने शुरू करवाई है।

समय के साथ दिखेगा बदलाव : जिन स्कूलों को गोद लिया गया है उन विद्यालयों का कायाकल्प होगा। एक माह पूर्व ही इन विद्यालयों को अधिकारियों द्वारा गोद लिया गया है। विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से विद्यालयों में व्याप्त दिक्कतों को दूर कराया जाएगा। शैक्षिक माहौल के लिए तैनाती पाए शिक्षक-शिक्षिकाएं भी योगदान देकर मिशाल कायम करेंगी। - शिवेंद्र प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

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