DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कासगंज कुशीनगर कौशांबी गाजियाबाद गाजीपुर गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Wednesday, October 4, 2017

धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने पर संविधान की रोक नहीं, विश्वविद्यालयों में धार्मिक शिक्षा पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इन्कार, याचिका खारिज

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि देश का संविधान किसी भी धार्मिक शिक्षा को ग्रहण करने पर रोक नहीं लगाता। कोर्ट ने प्रदेश के दो केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कर्मकांड और नमाज पढ़ाने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में विधि छात्रों ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में कर्मकांड और नमाज पढ़ाने की वैधता को चुनौती दी थी।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने शाश्वत आनंद और पांच अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 28 के तहत सरकारी विश्वविद्यालय को धार्मिक पूजा पद्धति की शिक्षा देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अरुणा राय केस का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार है। संविधान धर्म के बारे में जानकारी लेने पर रोक नहीं लगाता। प्रत्येक व्यक्ति को अपने व अन्य धर्म के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है। कोर्ट के पूछने पर याची यह नहीं बता सका कि विश्वविद्यालयों में ऐसा क्या पढ़ाया जा रहा है जो अनुच्छेद 28 के तहत प्रतिबंधित किया गया है।

No comments:
Write comments