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Monday, October 30, 2017

कानपुर : अक्षयपात्र पर फिर होगी कवायद, मांगेंगे बजट, सरकार-अक्षयपात्र में पिछले साल हो चुका है समझौता

’ बजट की दरकार, टास्क फोर्स नहीं भेज रहीं जांच रिपोर्ट

500 से ज्यादा ब्लॉकों से रिपोर्ट नहीं आई

जनपदस्तरीय टास्कफोर्स ऑनलाइन रिपोर्ट नहीं भेज रही हैं। 500 से अधिक ब्लॉकों से भी रिपोर्ट नहीं आई हैं। परिवर्तन लागत और रसोइया मानदेय समय से उपलब्ध नहीं कराया जा पा रहा है। कानपुर नगर में केवल 32 फीसदी तक ही परिवर्तन लागत आदि पहुंच पाई। अब नोडल अफसर प्रतिदिन समीक्षा करेंगे। वहीं, रिपोर्ट में इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि मां समितियों के रजिस्टरों में टिप्पणी नहीं होती है। 50 फीसदी से ज्यादा में तो समितियों के बारे में जानकारी ही नहीं दी गई है।

कानपुर में अक्षयपात्र के माध्यम से परिषदीय स्कूलों के बच्चों को गरम भोजन उपलब्ध कराने के लिए फिर से कवायद की जाएगी। मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की समीक्षा में यह मुद्दा फिर उठाया गया। कानपुर नगर उन पांच जनपदों में है, जहां स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और अक्षयपात्र के बीच आपसी सहमति पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। शहर में केंद्रीय किचन के लिए स्थान पर चिह्न्ति हो चुका है। मध्यान्ह भोजन से जुड़े विभिन्न ¨बदुओं की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि वर्ष 2016 में कानपुर नगर समेत 11 जनपदों में अक्षयपात्र को गरम भोजन उपलब्ध कराने का जिम्मा देने का निर्णय लिया गया था। इनमें से पांच जनपदों आगरा, कानपुर नगर, वाराणसी, इलाहाबाद और अंबेडकर नगर के लिए आपसी समझौते पर हस्ताक्षर हो गए। यह समझौता जिलाधिकारी और नगर आयुक्तों ने अक्षयपात्र के साथ किया था। अक्षयपात्र शुरू नहीं कर सका काम : परमपुरवा स्थित पंडित रतनलाल शुक्ल इंटर कॉलेज के सामने खाली पड़ी जगह पर अक्षयपात्र को केंद्रीय किचन बनाने के लिए जगह दी गई थी। अक्षयपात्र ने भी इसके लिए तैयारी कर ली थी। पर जो बजट पास हुआ वह खातों में नहीं आया। अक्षयपात्र यहां से करीब एक लाख बच्चों को गरम भोजने देने की तैयारी में था। 25 अक्तूबर को लखनऊ में हुई बैठक के दौरान बताया गया कि 23 जनपदों में 132 एजेंसियां हैं। लखनऊ में 12 सौ विद्यालयों के 1.25 लाख बच्चों को अक्षयपात्र ही भोजन उपलब्ध करा रहा है। जुलाई में शासन को सूचना भेजी गई थी। अब फिर जानकारी दी जा रही है।

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