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Thursday, November 30, 2017

शोध व आधारभूत संरचना के विकास को मिलेंगे 2000 करोड़, निशक्त बच्चों की जरूरतों पर बनेगी कार्ययोजना


निशक्त बच्चों की जरूरतों को समझते हुए स्कूलों में उनके अनुकूल माहौल बनाने तथा उन्हें शिक्षा का समान एवं समावेशी अवसर प्रदान करने के लिये मानव संसाधन विकास मंत्रालय शिक्षा से जुड़े विभिन्न घटकों के साथ विचार-विमर्श करने जा रही है ताकि ऐसे बच्चों की मदद के लिये कार्य योजना तैयार की जा सके। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि निशक्त बच्चों पर विशेष ध्यान दिये जाने की जरूरत होती है। ऐसे में इनसे जुड़े विभिन्न विषयों पर र्चचा के लिये मंत्रालय 1 दिसंबर को कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में शिक्षा से जुड़े विभिन्न पक्षकार हिस्सा लेंगे ताकि ऐसे बच्चों की मदद के लिये रणनीति और कार्य योजना तैयार की जा सके।



■ हेफा की तरफ से दिया जा रहा यह ऋण ब्याज मुक्त होगा
■ पांच आईआईटी समेत छह संस्थानों को मिलेगा यह ऋण



मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजेंसी (हेफा) ने पांच आईआईटी समेत छह संस्थानों को शोध एवं आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए 2000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करने का निर्णय किया है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपने ट्वीट में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, मुझे यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजेंसी (हेफा) छह संस्थाओं के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 2000 करोड़ रुपये मंजूर कर रही है। 



यह धनराशि इन छह संस्थाओं में शोध, अकादमिक विकास एवं आधारभूत संरचनाओं से जुड़ी परियोजनाओं से संबंधित होगी। इन छह संस्थाओं में आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बंबई, आईआईटी मद्रास, आईआईटी खड़गपुर और एनआईटी कर्नाटक में कम्प्यूटर विज्ञान विभाग शामिल है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 सितंबर 2016 को प्रमुख शैक्षिक संस्थानों में उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजेंसी (हेफा) के गठन को मंजूरी प्रदान की थी। उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजेंसी चिह्नित प्रवर्तक और मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से 2,000 करोड़ रुपये के अधिकृत पूंजी से प्रवर्तित होगी। इसमें सरकार की इक्विटी 1,000 करोड़ रुपये होने की बात कही गई है ।

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