DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कैसरगंज कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महाराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फर नगर मुजफ्फरनगर मुज़फ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी मैनपूरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Thursday, November 9, 2017

पाठ्यक्रम संशोधन से अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेंगे मदरसों के छात्र, राज्य सरकार की इस पहल से नौकरी व उच्च शिक्षा में होगी आसानी


■ मदरसा बोर्ड ने पाठ्यक्रम में के लिए गठित कर चुकी है कमेटी
■ अब अनिवार्य रूप से पढ़ाए जाएंगे गणित- विज्ञान सरीखे पाठ्यक्रम


■ पाठ्यक्रम में संशोधन के लिए कमेटी गठित

मदरसों में अब तक मदरसा बोर्ड के ही पाठ्यक्रम चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश अरबी फारसी मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रमों में बदलाव के लिए राज्य सरकार ने पहले ही कमेटी का गठन कर दिया है। सरकार से हरी झंडी मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम युक्त पुस्तकें शामिल कर ली जाएंगी। यह मदरसा आधुनिकीकरण की दिशा में अगला कदम होगा। अगले शैक्षिक सत्र से मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रमों शामिल कर लिया जाएगा। - एसपी तिवारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।



इलाहाबाद :  मदरसों में दीनी तालीम से इतर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें लागू होने से यहां के छात्र समान्य बोर्ड के छात्रों के साथ अब कंधे से कंधा मिलाकर चल सकेंगे। नई नीति के अनुसार मदरसों में गणित और विज्ञान सरीखे पाठ्यक्रमों को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अरबी-फारसी विभागाध्यक्ष डा. सालेहा रशीद कहती हैं कि प्रदेश सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। मदरसों में वर्तमान में दर्स निजामी यानि सैकड़ों वर्ष पुराने और परंपरागत पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे है। दशकों से इसके पाठ्यक्रम में की आवश्यकता महसूस हो रही है। कई मदरसों में आधुनिक शिक्षा शुरू भी की गई है।



 कंप्यूटर और अंग्रेजी सरीखे विषय शामिल भी कर लिए गए हैं, लेकिन यहां से निकले छात्र अपने आप को अधूरा सा महसूस करते हैं। राज्य सरकार के इस फैसले से मदरसों में प्रतियोगी परीक्षा एवं आधुनिक शिक्षा के लिए बेहतरीन पहल माना जा सकता है। मदरसा संचालकों को इस को रचनात्मक पहल के रूप में लेना चाहिए। राज्य के तीन हजार से अधिक मान्यता एवं गैर मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ रहे हजारों छात्रों को इस सकारात्मक परिवर्तन का फायदा होगा।



■ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाभप्रद होंगे पाठ्यक्रम 

एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम छात्रों के सर्वागीण विकास को ध्यान में रखकर किया गया है। ये पाठ्यक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सर्वाधिक लाभप्रद होते हैं। छात्र सिविल सर्विसेज से लेकर राज्य लोकसेवा आयोग, एसएससी, रेलवे, बैंक सहित विभिन्न राजकीय सेवाओं में जाने की तैयारी प्रभावशाली ढंग से कर सकते हैं। - डा. अहमद मकीन, सचिव, मदरसा वसीअतुल उलूम, बख्शीबाजार इलाहाबाद। 


No comments:
Write comments