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Tuesday, November 21, 2017

नकल के लिए चर्चित जिलों में ही केंद्र बनाने में हुई गड़बड़ियां, केंद्र निर्धारण में मनमानी कर फंसे डीआइओएस,

परीक्षकों के सत्यापन के बाद निकलेगी सूचीवीडियो कांफ्रेंसिंग में आज पूछे जाएंगे तल्ख सवाल ,

यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्र निर्धारण में जिला विद्यालय निरीक्षकों ने इसी तरह से तमाम सूचनाओं का अंकन मनमाने तरीके से किया है। इससे बोर्ड अफसरों पर केंद्र निर्धारण में पक्षपात करने के आरोप लग रहे हैं, जबकि अधिकांश गड़बड़ियां डीआइओएस ने पुराने र्ढे पर कार्य करते हुए की हैं। यही नहीं कालेजों में संसाधन, धारण क्षमता और एक कालेज से दूसरे के बीच की दूरी तक का सत्यापन सही से नहीं किया गया।


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माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2018 के लिए परीक्षा केंद्रों की अनंतिम सूची वेबसाइट पर जारी कर दी है। उसके बाद से केंद्र निर्धारण पर हंगामा मचा है। निजी कालेजों के अधिक संख्या में केंद्र बनने और करीब ढाई हजार से अधिक राजकीय व अशासकीय कालेजों के केंद्र न बनने से यूपी बोर्ड प्रशासन सवालों के घेरे में हैं। हालांकि सोमवार तक उन पर आपत्तियां लेने का कार्य पूरा हो गया है। पिछले वर्षो में केंद्र बन रहे करीब 3300 से अधिक कालेजों को बाहर किया गया है। माना जा रहा है कि यह संख्या अंतिम सूची जारी होने पर और बढ़ सकती है, क्योंकि कई राजकीय और अशासकीय कालेज और केंद्र बनाए जाने के आसार हैं।1शासन व बोर्ड के अफसर मंगलवार को सुबह 11 से तीन बजे तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जिला विद्यालय निरीक्षकों से रूबरू होंगे। इसमें गलत अंकन वाले डीआइओएस से जवाब तलब होने के आसार हैं। साथ ही हिदायत दी जाएगी कि जो आपत्तियां मिली हैं उनका सही से जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी से निस्तारण कराएं। अफसर यह भी पूछेंगे कि आखिर अधिकांश गड़बड़ियां सिर्फ उन्हीं जिलों में ही क्यों हुई हैं जो नकल के रूप में कुख्यात हैं। कई जिला विद्यालय निरीक्षकों पर कार्रवाई होने के पूरे आसार हैं।

शिक्षक संगठन मौन, कुछ मुखर : परीक्षा केंद्र निर्धारण पर प्रदेश के शिक्षक संगठन पूरी तरह से मौन हैं। उनकी ओर से डीआइओएस और बोर्ड प्रशासन तक से कोई आपत्ति नहीं की गई है। वहीं, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता डॉ. शैलेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता बरतने के उद्देश्य से ऑनलाइन केंद्र निर्धारण का निर्णय लिया था, परंतु जिला विद्यालय निरीक्षकों ने अपने व्यक्तिगत हितों को साधने के काम किया है जिस कारण सही केंद्र निर्धारण नहीं हो सका है और स्वच्छ छवि वाले विद्यालय परीक्षा केंद्र नहीं बन पाए हैं।रा

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