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Tuesday, December 5, 2017

दिल्ली : कक्षा में रोशनी ही नहीं, कैसे उज्‍जवल होगा बच्चों का भविष्य, टूटी पड़ी हैं बेंच, प्रमुख प्रयोगशालाएं तक नहीं


दिल्ली सरकार शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार का दावा तो करती है, लेकिन हकीकत इससे परे है। स्कूल में शिक्षकों की कमी तो है ही, दूसरी पाली में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कक्षा में रोशनी तक की व्यवस्था नहीं है।

हम बात कर रहे हैं सुंदरनगरी स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक बाल विद्यालय की, जहां दोपहर डेढ़ से छह बजे तक दूसरी पाली चलती है। अव्यवस्थाओं का आलम देखिए कि बी ब्लॉक के दूसरे तल पर स्थित कक्षा आठ ए में पिछले डेढ़ माह से बिजली का कनेक्शन खराब है, लेकिन उसे दुरुस्त नहीं कराया गया। आजकल शाम पांच बजे ही अंधेरा हो जाता है, लेकिन स्कूल छह बजे तक है। ऐसे में कक्षा में बिजली नहीं होने के कारण विद्यार्थियों का एक घंटा बेकार चला जाता है। अंधेरे में पढ़ना विद्यार्थियों के लिए मुश्किल हो जाता है। अंधेरे में आंखों पर दबाव पड़ता है, इसलिए कई विद्यार्थी कन्नी काटते रहते हैं। वहीं, स्कूल की सीढ़ियों पर भी लाइटें नहीं हैं। ऐसे में जरा सा पांव पिसला तो गंभीर रूप से चोटिल होना तय है।

 : स्कूल में कंप्यूटर और जीव विज्ञान की प्रयोगशाला नहीं है। पुस्तकालय में भी किताबों की काफी कमी है। ज्यादातर कक्षाओं की बेंच टूटी पड़ी हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि शिक्षा विभाग को इस बाबत कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन समाधान नहीं हुई। उम्मीद है कि जल्द ही रोशनी की सुविधा बहाल हो जाएगी।

इस स्कूल में कक्षा छह से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई होती है। इन कक्षाओं के चार से लेकर आठ सेक्शन हैं। शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन तैनात हैं महज । कोई शिक्षक छुट्टी पर रहते हैं तो उनके बदले दूसरे शिक्षक नहीं होते। सोमवार को भी वाणिज्य के अध्यापक के छुट्टी पर होने की वजह से कक्षा 10 के विद्यार्थी बैठे रहे। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए पीजीटी के 25 और टीजीटी के 50 अध्यापक होने चाहिए। अभी 25 अध्यापकों की जरूरत है। विभाग को भी प्रत्येक माह लिखित में जानकारी दी जाती है, लेकिन अभी तक शिक्षक नहीं मिले।’

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