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Thursday, December 7, 2017

गोरखपुर : सख्त हुआ विभाग होगी कार्रवाई, सिर्फ एक खाता संचालन का देना होगा प्रमाण पत्र, अब एक से अधिक खाता नहीं संचालित कर सकेंगे शिक्षक


बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से पहले भी इन खातों को छोड़ने के लिए पत्र जारी किया गया था लेकिन ऐसे शिक्षकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इस स्थिति को देखते हुए पांच दिसंबर को एक और पत्र जारी किया गया। इस पत्र में बीएसए का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी दशा में एक अध्यापक से एक से अधिक विद्यालयों का खाता संचालित कराने की सूचना पायी जाती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सम्बंधित अध्यापक (प्रभार देने व लेने वाले) की होगी। सम्बंधित अध्यापक एवं खंड शिक्षा अधिकारी का उत्तरदायित्व निर्धारण करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

एक से अधिक ों में विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) एवं मिड डे मील (एमडीएम) के खातों के संचालन का मोह मास्टर साहब को फंसा सकता है। बार-बार आदेश के बाद भी अतिरिक्त खातों का संचालन बंद न करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

बीएसए की ओर से इस सम्बंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कड़ा पत्र जारी कर एक से अधिक खातों के संचालन को रोकने का आदेश दिया गया हे। सभी खंड शिक्षाधिकारियों को 10 दिनों के भीतर इस आशय का प्रमाण पत्र देना होगा कि उनके यहां किसी शिक्षक द्वारा एक से अधिक खातों का संचालन नहीं किया जा रहा है।

शिक्षकों की कमी के दौरान एक से अधिक विद्यालयों के एसएमसी व एमडीएम का चार्ज एक अध्यापक को दे दिया गया था। बाद में शिक्षकों की भर्तियां होने के बाद लगभग सभी विद्यालयों पर शिक्षकों की उपस्थिति हो गई, लेकिन 100 से अधिक शिक्षकों ने अतिरिक्त खातों का संचालन उन्हें नहीं सौंपा। संबंधित विद्यालय के शिक्षक के हाथ में खातों का संचालन न होने के कारण उसे विद्यालय में सुविधाओं का प्रबंध करने में काफी परेशानी होती है।

अनैतिक लाभ का चक्कर शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि अनैतिक लाभ के चक्कर में एक से अधिक खातों का संचालन शिक्षक छोड़ना नहीं चाहते। ये शिक्षक अपनी ऊपर तक पहुंच की धौंस देकर खातों पर अधिकार जमाए रहते हैं। एसएमसी के खातों में सर्वशिक्षा अभियान का सारा पैसा आता है।एमडीएम से जुड़ा धन आता है। जब इन शिक्षकों को इच्छा होती है तो कुछ पैसा संबंधित विद्यालय को दे देते हैं और उनसे काम कराने को कहते हैं लेकिन समय से पैसा न मिलने के कारण सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं।’

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