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Thursday, January 18, 2018

आरक्षण का लाभ पाकर पदोन्नति का मामला : बेसिक शिक्षकों को पदावनत न किये जाने पर असंतोष, कोर्ट के आदेश पालन को चक्कर लगा रहे शिक्षक

लाभ पाकर पदोन्नत हुए बेसिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पदावनत न किए जाने पर असंतोष जताते हुए सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। समिति ने कहा कि अदालती आदेश का पालन न किए जाने से सामान्य व अन्य पिछड़ी जाति के शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हो पा रही है, जिससे यह शिक्षक अदालतों के चक्कर लगाने को मजबूर हो गए हैं।

समिति के स्थापना दिवस पर बुधवार को हाइडिल फील्ड हॉस्टल में हुई सभा में कहा गया कि प्रदेश के अन्य सभी विभागों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक पदावनति प्रक्रिया दो साल पहले पूरी की जा चुकी है, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग में इसका पालन नहीं किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए मुख्य सचिव ने 21 अगस्त 2015 को सभी विभागों को ऐसे सभी कार्मिकों को पदावनत करने का निर्देश दिया था, जो आरक्षण के जरिये 16 नवंबर 1997 से 28 अप्रैल 2012 के बीच पदोन्नत किए गए थे। पदावनति से रिक्त पदों पर वरिष्ठता के अनुसार पदोन्नति करने के निर्देश शासन ने दिए थे। समिति ने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा विभाग में उच्च स्तर पर भारी भ्रष्टाचार की वजह से पिछली सरकार के समय सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू नहीं किया गया, लेकिन अब सरकार बदलने के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का उपेक्षापूर्ण रवैया चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवमानना की जा रही है। समिति ने बताया कि लखनऊ, रायबरेली और वाराणसी के प्राथमिक शिक्षकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसे लेकर अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी, तब इन जिलों में पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक जूनियर शिक्षकों को रिवर्ट करने और उनका वेतन फ्रीज करने की कार्यवाही शुरू हुई।

समिति ने सवाल उठाया है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू कराने के लिए क्या सभी 75 जिलों के शिक्षकों को अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ेगी। बैठक में एए फारुकी, एचएन पांडेय, राजीव सिंह, एसएस निरंजन, वाइएन उपाध्याय, रीना त्रिपाठी आदि मौजूद थे।

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