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Saturday, March 17, 2018

उत्तर प्रदेश में 1999 के बाद प्रधानाचार्य पदों पर सीधी भर्ती नहीं, राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ,

कालेजों में प्रधानाचार्य पदों पर, नियुक्तियों का रास्ता साफ

उत्तर प्रदेश में 1999 के बाद प्रधानाचार्य पदों पर सीधी भर्ती नहीं हुई है। बड़ी संख्या में विद्यालयों में पद रिक्त चल रहे हैं

प्रदेश सरकार ने राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा नियमावली, 1992 में चतुर्थ संशोधन को राज्य मंत्रि परिषद ने मंजूरी दे दी है। संशोधन के अनुसार राजकीय इंटर कालेज (बालक या बालिका) में प्रधानाचार्य के पदों पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट या इससे उच्चतर कक्षाओं में तीन वर्ष पढ़ाने का अनुभव रखना होगा। इसके साथ ही आवेदन की आयुसीमा भी बढ़ाई गई है। विज्ञापन के कैलेंडर वर्ष में अभ्यर्थी के लिए पहली जुलाई को कम से कम 30 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष की आयुसीमा तय की गई है।

पहले यह 21 वर्ष से 35 वर्ष थी। इसके अतिरिक्त संबंधित नियमावली को उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा नियमावली को प्रतिस्थापित कर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक परिवीक्षा नियमावली कर दिया गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में 1999 के बाद प्रधानाचार्य पदों पर सीधी भर्ती नहीं हुई है। बड़ी संख्या में विद्यालयों में पद रिक्त चल रहे हैं।

गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज (बीआरडी) में तैयार होने वाले 15 मंजिल के बाल रोग चिकित्सालय का नक्शा अग्निशमन विभाग की आपत्ति के बाद बदल दिया गया है। 500 बिस्तरों के इस बच्चों के अस्पताल के लिए पहले 15 मंजिल का टावर बनाने की योजना थी लेकिन, अब यह टॉवर 11 मंजिल का होगा।

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