DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कासगंज कुशीनगर कौशांबी गाजियाबाद गाजीपुर गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Sunday, April 1, 2018

संस्कृत कालेज शिक्षकों की भी लिखित परीक्षा, चयन की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को


इलाहाबाद : योगी सरकार ने प्रदेश के संस्कृत माध्यमिक कालेजों के संबंध में अहम निर्णय किया है। अब अन्य शिक्षकों की तर्ज पर संस्कृत कालेजों का प्रधानाध्यापक व अध्यापक बनने के लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा देनी होगी। इन कालेजों के शिक्षक चयन का जिम्मा उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को सौंपा गया है।

■ चयन की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को

■ शिक्षा निदेशालय को चयन का प्रस्ताव भेजने का दिया निर्देश

योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद से शैक्षिक मेरिट और साक्षात्कार के आधार पर हो रही भर्तियों की नियमावली में बदलाव किया है। अधिकांश भर्तियां लिखित परीक्षा से कराई जा रही हैं। ऐसे में भेदभाव से ऊपर उठकर सरकार ने संस्कृत शिक्षकों का चयन भी लिखित परीक्षा से कराने का निर्णय किया है।


शासन के संयुक्त सचिव शत्रुंजय कुमार सिंह ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक डा. अवध नरेश शर्मा को निर्देश दिया है कि उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित सहायता प्राप्त प्रथमा, पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा पाठशालाओं के प्रधानाध्यापकों व अन्य अध्यापकों का चयन अब लिखित परीक्षा के माध्यम से होगा। इन शिक्षकों के चयन की परीक्षा व अन्य कार्यवाही उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से कराई जाएगी।


नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव : शासन ने निर्देश दिया है कि संस्कृत कालेजों के प्रधानाध्यापक व अध्यापक चयन का प्रस्ताव चयन बोर्ड को भेजा जाए। यदि चयन बोर्ड की नियमावली में किसी तरह की संशोधन की जरूरत हो तो उसका परीक्षण करके संशोधन प्रस्ताव तत्काल उपलब्ध कराएं। यदि यह जरूरत नहीं है तो अविलंब रिक्त पदों का ब्योरा चयन बोर्ड भेजा जाए।


डीआइओएस, जेडी से छिना कार्य : संस्कृत कालेजों में शिक्षक चयन कार्य अब तक जिला विद्यालय निरीक्षक यानि डीआइओएस और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक यानि जेडी के माध्यम से होता रहा है। इसमें संस्कृत कालेज संचालक अफसरों को प्रभावित करके आसानी से अपनों की नियुक्ति दिलाने में सफल हो जाते रहे हैं। योग्य शिक्षक न होने से इन कालेजों में पठन-पाठन का स्तर भी गिर रहा था। शासन ने इस व्यवस्था पर पूर्ण विराम लगा दिया है।


एक साल से चयन बोर्ड ठप : शिक्षा निदेशालय भले ही संस्कृत कालेजों में चयन का प्रस्ताव चयन बोर्ड को तत्काल भेज दे, लेकिन वहां इस पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी, क्योंकि चयन बोर्ड एक साल से ठप पड़ा है। अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति का इंतजार किया जा रहा है। शासन के इस प्रस्ताव से चयन बोर्ड जल्द संचालित होने के संकेत भी मिल रहे हैं।

No comments:
Write comments