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Tuesday, May 29, 2018

मेधावियों की उत्तर पुस्तिकाएं वेबसाइट से दूर, हाईस्कूल, इंटर का रिजल्ट आए एक माह हो रहा, अभी तस्वीर साफ नहीं

उप मुख्यमंत्री ने रिजल्ट के बाद सार्वजनिक करने का दिया था निर्देश

इलाहाबाद : ने हाईस्कूल, इंटर परीक्षा 2018 का कार्यक्रम से लेकर रिजल्ट जारी करने में काफी तेजी दिखाई लेकिन, पारदर्शिता के तहत कदम नहीं उठाया जा रहा है। मंगलवार को परीक्षा परिणाम जारी होने का एक माह हो रहा है, अब तक मेधावियों की उत्तर पुस्तिकाएं या फिर दूसरे रूप में प्रश्नपत्रों की उत्तरकुंजी जारी करने पर निर्णय नहीं हो सका है। अफसर इस प्रकरण में बोलने को भी तैयार नहीं है।

की परीक्षाओं से पहले ही उप मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्री डा. दिनेश शर्मा ने एलान किया था कि टॉपर आने वालों की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक की जाएंगी। इसका खूब प्रचार हुआ, वजह यह थी कि जो बोर्ड इधर के वर्षो में प्रदेश स्तरीय टॉपर की सूची भी अधिकृत रूप से मुहैया नहीं करा रहा था, वह कई कदम आगे बढ़कर उत्तर पुस्तिका अपलोड करने जा रहा है। यह कदम अन्य बोर्ड व परीक्षा संस्थाओं के लिए मिसाल भी बनता, क्योंकि अभी कोई यह करने की हिम्मत नहीं जुटा सका है।


बोर्ड ने पहले रिजल्ट के एक सप्ताह बाद उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड करने को कहा। बाद में कहा गया कि टॉपर नहीं विषयवार मेधावियों की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक होंगी। अब रिजल्ट आए एक माह हो रहा है, अभी इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। सूत्रों की मानें तो संबंधित मेधावियों की कॉपियां मुख्यालय पर मंगाई गई व उनका परीक्षण भी कराया गया लेकिन, अगला कदम नहीं उठाया जा सका है।


इसकी वजह यह है कि इस बार अपेक्षा से बेहतर रिजल्ट जारी हुआ। उसके बाद मॉडरेशन अंक प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। इसी बीच गोपनीय एवार्ड ब्लैंक ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर आ गईं। मेधावियों की कॉपियां देखने वालों ने अफसरों से कहा है कि सब्जेक्टिव इम्तिहान में परीक्षक अलग-अलग अंक देते हैं ऐसे में कॉपियां सार्वजनिक होने पर मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठना तय है। बोर्ड ने प्रश्नों की उत्तरकुंजी निकालने पर भी मंथन किया लेकिन, उस पर भी सहमति नहीं बन पाई है।

संदिग्ध परीक्षकों पर कार्रवाई नहीं : बोर्ड की गोपनीय ओएमआर शीट सोशल मीडिया में अपलोड करने वाले दो परीक्षकों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया। परीक्षकों ने इसमें शामिल होने से इन्कार किया है। ऐसे में बोर्ड यह तय नहीं कर पा रहा है कि आखिर उन पर किस आधार पर कार्रवाई कर दें। मूल्यांकन केंद्रों के परीक्षा नियंत्रकों व सीसीटीवी फुटेज से भी रास्ता नहीं निकला है।

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