DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कासगंज कुशीनगर कौशांबी गाजियाबाद गाजीपुर गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Sunday, June 24, 2018

कई चुनौतियां पेश करेगा विभागों का पुनर्गठन, व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर ही रही चर्चाएं

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : सचिवालय में विभागों के पुनर्गठन की कवायद ने जहां नौकरशाही से लेकर मंत्रियों तक में बेचैनी पैदा कर दी है, वहीं इससे होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। माना जा रहा है कि प्रस्तावित व्यवस्था को कई चुनौतियों से जूझना होगा।
अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित समिति ने विभागों की संख्या 95 से घटाकर 57 करने के साथ ही 62 विभिन्न विभागों को आपस में मिलाकर 24 नये विभाग बनाने की सिफारिश की है। अभी हर विभाग में शीर्ष पद पर अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव स्तर के अधिकारी नियुक्त किये जाते हैं जो स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। अब यदि कई विभागों को मिलाकर एक विभाग बनाने की सिफारिश को मूर्त रूप दिया गया तो यह तय है कि विलय के स्वरूप गठित होने वाले नये विभाग में शीर्ष स्तर पर अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव स्तर के एक ही अधिकारी की तैनाती होगी, जबकि संघटक विभागों में तैनात किये जाने वाले अफसर उस शीर्ष अधिकारी के अधीन ही काम करेंगे। ऐसे में स्वतंत्र रूप से विभाग की कमान संभालने की उनकी हसरत पूरी नहीं हो पाएगी। कुछ ऐसा ही तजुर्बा विभागों के उन मंत्रियों का भी होगा जो अभी स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं। यह भी आशंका जतायी जा रही है कि यदि विलय कर बनाये जाने वाले नये विभागों में कैबिनेट मंत्री की नियुक्ति में वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया तो मंत्रियों की आपसी तनातनी बढ़ सकती है।
विभागों के विलय से एक व्यावहारिक दिक्कत यह आ सकती है कि उच्च शिक्षा और प्राविधिक शिक्षा जैसे विभाग जिनमें मुकदमों की संख्या ज्यादा है, यदि वे एक हुए तो गठित होने वाले नये विभाग के शीर्ष अधिकारी पर मुकदमों का बोझ बढ़ जाएगा। समिति ने फिलहाल बेसिक और माध्यमिक शिक्षा जैसे विभागों को उनके मौजूदा स्वरूप में अलग-अलग ही बनाये रखने की सिफारिश की है। इन विभागों पर मुकदमों का सर्वाधिक अंबार है। यदि भविष्य में इन दोनों विभागों को मिलाने की संस्तुति की गई तो नये विभाग पर मुकदमों का बोझ बेतहाशा बढ़ जाएगा।

No comments:
Write comments