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Wednesday, July 4, 2018

अलीगढ़ : नौनिहालों को आज भी है चारदीवारी की दरकार, 686 स्कूल बाउंड्रीवाल विहीन, बजट की कमी से होती मानकों की अनदेखी

बजट की कमी से बिगड़ते मानक : चारदीवारी निर्माण में बजट की कमी मानकों को ताक पर रखवा देती है। अभी जो दीवार बनाई जाती है, वो 4.5 इंच मोटी और चार फुट ऊंची होती है। इस काम के लिए 1105 रुपये प्रति मीटर के हिसाब से बजट मिलता है। इससे तूफान आने व जानवरों के धक्के से भी दीवार ढह जाती है। जानकारों की मानें तो दीवार नौ इंच मोटी और कम से कम छह फुट ऊंची बननी चाहिए। यही हाल गेट का भी है। सात हजार रुपये एक गेट निर्माण को मिलते हैं। 55 रुपये प्रति किलो लोहे के हिसाब से 5500 रुपये का गेट और करीब दो हजार रुपये से एक गुणा एक फुट के पिलर बन जाते हैं। मजदूरी, ढुलाई का अता-पता नहीं। ऐसे में मजबूत गेट कहां से लगे?


सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर दावे भले ही कुछ भी किए जाएं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कहीं चार दीवारी नहीं हैं तो कहीं बिजली का कनेक्शन और कहीं पीने तक के पानी का इंतजाम नहीं। इसके चलते बच्चों को होनी वाली दिक्कतों का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। यह हाल तब है, जब स्कूलों की हालत सुधारने के लिए हर साल मोटा बजट खर्च किया जाता है। स्कूलों के हालातों पर दैनिक जागरण अभियान शुरू कर रहा है। प्रस्तुत है पहली कड़ी..1

जागरण संवाददाता ,अलीगढ़ : दो जुलाई से सरकारी स्कूल खुल गए। मगर, चारदीवारी व स्कूल गेट जैसी सुरक्षात्मक व मूलभूत जरूरतें अभी भी अधूरी ही हैं। नौनिहालों की, स्कूलों में चारदीवारी की आस आज भी बरकरार है। चारदीवारी व गेट गिरने से उसके मलबे में दबकर कुछ बच्चों की जान भी जा चुकी है। मगर शासन आंखें खोलने को तैयार नहीं दिख रहा। कक्षा एक से आठ तक के सरकारी स्कूलों में करीब डेढ़ लाख रनिंग मीटर (150 किलोमीटर) की चारदीवारी (बाउंड्रीवाल) नहीं है। जिले में 1776 प्राइमरी व 735 जूनियर हाईस्कूल मिलाकर कुल 2511 बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल हैं। इसी में सरकार के एडेड 33 व माध्यमिक शिक्षा से संबद्ध 128 स्कूल और भी हैं, जिनसे बेसिक स्कूलों की कुल संख्या 2670 हो जाती है। इनमें से 418 प्राइमरी स्कूल व 268 जूनियर हाईस्कूल समेत कुल 686 स्कूल निर्माण के समय से ही चारदीवारी विहीन हैं। वहीं, अन्य भवनों को मिलाकर 1420 रनिंग मीटर दीवार ढही पड़ी है। जिले में स्कूलों की कुल छह लाख रनिंग मीटर बाउंड्रीवाल है, जिसमें 418 प्राइमरी में 81348 मीटर व 268 जूनियर हाईस्कूल में 76733 मीटर समेत कुल 158121 रनिंग मीटर बाउंड्रीवाल का अता-पता नहीं है। स्कूलों में बाउंड्रीवाल न होने से स्कूल की सुरक्षा को लेकर सवाल तो उठता ही है, साथ ही चोरी की घटनाएं भी होती हैं। आस-पास के लोगों के कब्जे भी होते हैं।1अतरौली के गांव गनेशपुर गोबिंदपुर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की चार दीवारी नहीं होने पर गांव वालों ने बस, टेंपो, टैक्टर, कार, थ्रेसर, कल्टीवेटर व पशुओं को बांध रखा है ’जागरणअतरौली के गांव शेरपुर में प्राथमिक विद्यालय की नही चार दीवारी ’जागरणचारदीवारी क्षतिग्रस्त होने वाले स्कूलों को चिह्न्ति करा रहे हैं। इनकी सूची ग्राम पंचायत को भेजी जाएगी। अब ग्राम पंचायत स्तर से ही कार्य कराया जाएगा। शासन से निर्माण के लिए करीब 10 करोड़ रुपये बजट का प्रस्ताव भी भेजा था। मगर, बजट स्वीकृत नहीं हुआ। - डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय,
बीएसएचंडौस के नगला नत्था के प्राथमिक विद्यालय की टूटी पड़ी बाउंड्री वॉल ’जागरणचार साल से नहीं मिला बजट1बीएसए दफ्तर पर सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी बीबी पांडेय ने बताया कि पिछले चार साल से चारदीवारी निर्माण के लिए बजट नहीं भेजा गया। जिले में चारदीवारी निर्माण के लिए पिछली बार भी 10 करोड़ रुपये बजट मांगा गया था। मगर बजट का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ।
जूनियर के 36 व प्राइमरी के 25 फीसद स्कूल चारदीवारी विहीन : ब्लॉकवार स्कूलों में बाउंड्रीवाल न होने के आंकड़ें प्रतिशत के आधार पर देखें तो 735 जूनियर स्कूलों में 36 फीसद के हिसाब से 264 स्कूलों में चाहरदीवारी क्षतिग्रस्त या नहीं हैं। वहीं 1776 प्राइमरी स्कूलों में 25 फीसद के हिसाब से 444 स्कूलों में दीवार क्षतिग्रस्त या नहीं हैं।

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