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Monday, July 2, 2018

फर्रुखाबाद : अधूरी व्यवस्थाओं के बीच आज से स्कूलों में पढ़ाई, यूनिफ़ॉर्म के लिये खातों में नहीं पहुंचा धन, कापी-किताब व बैग का इंतजार

जागरण संवाददाता, फरुखाबाद : एक माह दस दिन के ग्रीष्मावकाश के बाद सोमवार से परिषदीय विद्यालय खुलेंगे। शासन व विभाग ने गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और बच्चों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बिंदुवार निर्देश भी जारी कर दिए। हकीकत यह है कि गर्मी की छुट्टी के बाद भी अधूरी व्यवस्थाओं में बच्चों की पढ़ाई हिचकोले खाएगी। अंतर्जनपदीय तबादले से कई विद्यालयों में एक ही शिक्षक रह गया। स्कूलों की रसोई में भी कंगाली का धुआं उठेगा। यूनीफार्म, कापी-किताब व बैग का इंतजार और आगे खिंचेगा।

जिले में 1290 प्राथमिक व 565 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। दो जुलाई को विद्यालय खुलने से दो दिन पहले ही स्कूल में जाकर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश शिक्षकों को दिए गए थे। अब सोमवार से बच्चे भी पढ़ने पहुंचेंगे। पहले से ही चल रही शिक्षकों की कमी और अधिक गुल खिलाएगी। अंतर्जनपदीय तबादले वाले शिक्षकों की कार्यमुक्ति से कई विद्यालयों में एक ही शिक्षक रह गया। ऐसे विद्यालयों के एक शिक्षक को ही सभी कक्षाओं के बच्चों को संभालना होगा। पढ़ाना तो दूर सभी बच्चों को वह ठीक से संभाल भी पाएं, यह बड़ी बात होगी। बढ़पुर ब्लाक में प्राथमिक विद्यालय अजरुन नगला, आरमपुर, बसेली, पचपुखरा व उच्च प्राथमिक विद्यालय शमशेर नगर में भी एक शिक्षक ही है।

यूनीफार्म को खातों में पैसा भी नहीं पहुंचा :
सभी बच्चों को दो सेट यूनीफार्म मिलनी है। धनराशि हस्तांतरण प्रक्रिया लेटलतीफी में घिरी रही। विद्यालयों के एसएमसी खाते में पैसा अभी तक नहीं पहुंचा। कई विद्यालयों में 2017-18 की अवशेष 25 फीसद धनराशि अभी भी नहीं पहुंची।

रसोइयों को चार माह का मानदेय नहीं मिला :
सामान्य वर्ग की चार हजार से अधिक रसोइयों को जनवरी, फरवरी, मार्च व अप्रैल का मानदेय नहीं मिला। साल में 10 माह का ही मानदेय दिए जाने के शासनादेश के चलते रसोइयों को मई व जून का मानदेय नहीं मिलता। प्राथमिक विद्यालयों को मध्याह्न भोजन के मसाले, दाल, सब्जी व ईंधन आदि की परिवर्तन लागत अप्रैल से नहीं मिली।

नियमित समय सारिणी का कैसे हो पालन : विभागीय अधिकारियों ने नियमित समय सारिणी से पढ़ाई कराने का फरमान सुनाया है। अध्यापकों की कमी, बच्चों के पास कापी-किताब न होने से समय सारिणी का अनुपालन दूर की कौड़ी ही है।

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