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Wednesday, July 4, 2018

मदरसों के छात्र अब पहनेंगे पैंट-शर्ट, जल्द लागू होगा कॉमन ड्रेस कोड, आई मिश्रित प्रतिक्रियाएं

राब्यू, लखनऊ : अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने अपने विभाग के राज्यमंत्री के ड्रेस कोड संबंधी बयान से मंगलवार की देर रात किनारा करते हुए कहा कि ‘मदरसों में ड्रेस कोड को लेकर सरकार ने कोई नीति निर्धारित नहीं की है। इस विषय को लेकर विभाग का कोई मत नहीं है।’ न्यूज एजेंसी (पेट्र्र) ने चौधरी के ट्वीट के हवाले से यह खबर जारी की है। हालांकि, देर रात राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने कैबिनेट मंत्री के किसी भी तरह के ट्वीट की जानकारी से इन्कार करते हुए कहा कि वह अपनी बात पर कायम हैं।

सरकार बना रही मदरसों को निशाना : उलेमा जासं, देवबंद : कॉमन ड्रेस कोड पर उलमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उलमा ने कहा कि सरकार मदरसों को बेवजह निशाना बना रही है। जमीयत उलमा-ए-हंिदू के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि यूपी की वर्तमान सरकार के पास मदरसों को टारगेट करने के अलावा कोई दूसरा एजेंडा नहीं है।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : योगी सरकार मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने के बाद अब वहां डेस कोड अनिवार्य करने जा रही है। यानी अब छात्र कुर्ता-पायजामा पहनकर मदरसों में पढ़ने नहीं जा सकेंगे। यहां के छात्र भी आम स्कूलों की तरह पैंट-शर्ट पहनकर पढ़ाई करने जाएंगे। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि यहां के छात्र किस रंग की ड्रेस पहनेंगे। सरकार शीघ्र ही इसके औपचारिक आदेश जारी करेगी। मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मंगलवार को हज हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा कि मदरसों में भी जल्द ड्रेस कोड लागू होगा। अभी यहां के छात्र कुर्ता-पायजामा ही पहनते हैं। लोगों ने इसे ही मदरसों का डेस कोड समझ लिया है। ड्रेस कोड होने से यहां के लड़कों में भी छात्र वाली भावना जागृत होगी। उन्होंने कहा कि मदरसों में ऊंचे पायजामे के साथ कुर्ता पहन कर छात्र आते हैं। इससे उनकी पहचान एक धर्म विशेष से होती है। मदरसे के छात्रों के बीच इसे खत्म करना जरूरी है। मदरसों में नया ड्रेस कोड किस रंग का होगा इसे लेकर अभी विचार चल रहा है। जल्द ही सरकार इस पर अंतिम निर्णय करेगी। मंत्री ने कहा कि मदरसों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रदेश सरकार पहले ही एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर चुकी है। यहां धार्मिक शिक्षा के साथ ही सामाजिक शिक्षा भी दी जाएगी।


जागरण संवाददाता, अलीगढ़ : प्रदेश सरकार के मदरसों में कुर्ता-पैजामा की जगह अब पैंट-शर्ट लागू करने से प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। कुछ का कहना है कि सरकार बेहतर शिक्षा की व्यवस्था करे, कपड़ों से बच्चों के अंदर ज्ञान नहीं आता। वहीं, कुछ ने योगी सरकार के इस निर्णय को सही ठहराया है। कुछ भी लागू करने से पहले उसका बाकायदा नियम-कानून बनना चाहिए। ऐसा न हो कि आज प्रदेश सरकार पैंट-शर्ट कर दे तो दूसरी सरकार आए तो वो फिर बदल दे। फिर बच्चे ऐसे ही करते रह जाएंगे। 

अहमद हुसैन, मौलाना ये अच्छी पहल है, इसका मैं तहेदिल से स्वागत करता हूं। कुर्ता-पैजामा से मदरसे के बच्चे मानसिक तौर पर अपने को बंधा महसूस करते थे, मगर पैंट-शर्ट पहनने से उनके अंदर अच्छी फीलिंग आएगी। दीनी तालिम के साथ वह दुनिया की भी तालिम जान सकेंगे। 

मुहम्मद आमिर रशीद, मुस्लिम यूथ एसोसिएशन सबसे जरूरी है कि बच्चों अच्छी शिक्षा मिले। ड्रेस कोड मायने नहीं रखता है। अच्छे कपड़े पहना दिए जाएं और पढ़ाई अच्छी न हो तो उसका कोई महत्व नहीं होता है। 

नदीम कुरैशी, अल कुरैश वेलफेयर एसोसिएशनजागरण संवाददाता, अलीगढ़ : प्रदेश सरकार के मदरसों में कुर्ता-पैजामा की जगह अब पैंट-शर्ट लागू करने से प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। कुछ का कहना है कि सरकार बेहतर शिक्षा की व्यवस्था करे, कपड़ों से बच्चों के अंदर ज्ञान नहीं आता। वहीं, कुछ ने योगी सरकार के इस निर्णय को सही ठहराया है। कुछ भी लागू करने से पहले उसका बाकायदा नियम-कानून बनना चाहिए। ऐसा न हो कि आज प्रदेश सरकार पैंट-शर्ट कर दे तो दूसरी सरकार आए तो वो फिर बदल दे। फिर बच्चे ऐसे ही करते रह जाएंगे।

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