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Sunday, August 26, 2018

सिद्धार्थनगर : कूटरचित प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हथियाने वाले 38 शिक्षकों को बीएसए ने किया बर्खास्त, आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने तथा वेतन रिकवरी का निर्देश भी जारी

सिद्धार्थनगर : जनपद में कूटरचित प्रमाणपत्रों के सहारे परिषदीय विद्यालयों में नौकरी हथियाने वाले 38 शिक्षकों के विरुद्ध बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया है। साथ ही अब तक प्राप्त वेतन की रिकवरी करते हुए आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया है। परिषदीय विद्यालयों में सितंबर 2016 में यहां लगभग पांच सौ सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हुई थी। नियुक्ति के समय से ही फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वालों की शिकायतें चल रहीं थीं। नियुक्ति पाने से वंचित कुछ अभ्यर्थियों ने जांच की मांग को लेकर उसी समय से मोर्चा खोल रखा था। मंगलवार को उन्होंने जब बीएसए कार्यालय पर आत्मदाह का प्रयास किया तो विभाग के ऊपर फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कुछ दिन पहले जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू ने मुख्य विकास अधिकारी हर्षिता माथुर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। टीम में एसडीएम सदर व जिला विद्यालय निरीक्षक भी शामिल थे। टीम ने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जिसमें 38 शिक्षकों के प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए। इस आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारी राम सिंह ने शनिवार को इन शिक्षकों का सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया। साथ ही संबंधित खंड शिक्षा अधिकरियों को आपराधिक धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराने के साथ अब तक प्राप्त वेतन की रिकवरी का निर्देश दिया है।

फिर फर्जी शिक्षकों के कारनामे से कांपा जिला :

 भारत-नेपाल सीमा स्थित इस जिले में नटवरलालों का गिरोह डेढ़ दशक से सक्रिय है। शनिवार को एक बार फिर 38 प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक बर्खास्त कर दिए गए हैं। हालांकि विभाग को पूर्व से फर्जी शिक्षकों के विषय में आशंका थी। यहां अर्से से जालसाज फर्जी शिक्षकों के भर्ती का ठेका ले रहे हैं। वर्ष 2009 में जिला शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान में लगी आग को भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने पखवारा भर पूर्व खतरा भांपकर ही जिलाधिकारी से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। एक साथ 38 फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि जिले में अभी जालसाजों का गठजोड़ मजबूत है। यह बताना जरूरी है कि यहां जालसाजों का गठजोड़ नया नहीं है। पिछले 15 वर्षों से उनकी भूमिका पर सवाल उठता रहा है, पर किसी न किसी तरह उनकी फाइल दबा दी जाती है। इस बार भी आशंका यही व्यक्त की जा रही है। सूबे में 16438 शिक्षकों के भर्ती के तहत यहां भी उनके अभिलेखों की जांच चल रही है। प्रबल आशंका है कि इसमें बड़े पैमाने पर फर्जी शिक्षक शामिल हैं। सुरक्षा की मांग से जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है। गंभीरता से जांच हो तो जिले में पांच सौ से अधिक शिक्षक फर्जी निकल सकते हैं।
केस एक : 13 मार्च 2013 जिले में फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत न्यायालय के आदेश पर 2009-10 के 36 शिक्षकों के विरुद्ध विभाग ने मुकदमा दर्ज करवाया गया। यह मुकदमा सदर थाने में तत्कालीन बीएसए भूपेंद्र नरायन सिंह की तहरीर पर दर्ज किया गया। इन फर्जी शिक्षकों में ज्यादातर शिक्षक देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, मऊ, आजमगढ़, बहराइच के रहने वाले थे। उन्हें 2009 में जिले में नियुक्ति मिली थी। पूर्व में ही मुकदमे के लिए आदेश मिले थे, पर उनकी सेटिंग इतनी मजबूत थी कि इनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो पाई थी। मुकदमा दर्ज होने के बावजूद इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

केस दो : 10 मई 2013 को फर्जी शिक्षक उपेंद्र प्रसाद सिंह का मामला सामने आ गया। इस प्रकरण में एक ही नाम, वल्दियत और एक ही मार्कशीट पर जिले में एक जुलाई 2009 में कैथवलिया रामनाथ भनवापुर में पहली ज्वानिंग कराई गई। इसके बाद उसी नाम और उसी मार्कशीट से 29 सितंबर 2009 को फिर से बेलहसा खुनियांव में विभाग ने नई ज्वानिंग करा दी थी। जांच में पता चला था कि दोनों उपेंद्र प्रसाद सिंह की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट कानपुर के गांधी इंटर कालेज से बनवाई गई है। बीएससी भी दोनों ने जनता कॉलेज इटावा से किया था। दोनों के रोल नंबर भी हाईस्कूल और बीएससी तक एक ही रहे हैं। विभाग इसे पकड़ने में नाकाम रहा। असली उपेंद्र प्रसाद सिंह आखिर कौन है ? इसका खुलासा नहीं हो सका।
केस तीन : वर्ष 2009 में बांसी जिला शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान में आग लग गई। इसमें तमाम महत्वपूर्ण फाइलें जल गई। बांसी कोतवाली पुलिस को घटना की जांच सौंपी गई थी, पर इस जांच का भी कोई नतीजा नहीं निकल सका। जांच के बाद मामला टाय-टाय फिस्स है। आज भी तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेज वहां से नहीं मिल पा रहे हैं।

कार्यवाही के लिए कुल 68 शिक्षकों की सौंपी थी सूची 

सिद्धार्थनगर में फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए संघर्षरत अभ्यर्थियों ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त सूचनाओं के आधार पर विभाग को 68 फर्जी शिक्षकों की सूची सौंपी थी। हालांकि उनका यह भी मानना था कि जनपद में 100 से अधिक फर्जी शिक्षक कार्यरत हैं। इस प्रकार अभी भी बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षक कार्रवाई की जद में नहीं आ सके हैं। उनका कहना है कि सिर्फ कुछ शिक्षकों की बर्खास्तगी करके जांच समिति को अपने कार्यो की इतिश्री नहीं समझ लेनी चाहिए बल्कि मामले में लिप्त तत्कालीन कर्मियों व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

इन शिक्षकों पर हुई कार्रवाई : प्राथमिक विद्यालय पिपरसन पर तैनात कु.रीना, प्रावि झकहिया रंजेश सिंह, प्रावि जोमखुंडा आलोक पाण्डेय, प्रावि दुल्हा खुर्द साहबजादा सिंह, प्रावि हिसामुद्दीनपुर अंशुमान कुमार श्रीवास्तव, प्रावि हौसिलाबाद मोहन सिंह, प्रावि हटवा राकेश सिंह, प्रावि भड़ही उर्फ मिश्रौलिया वंदना सिंह, प्रावि गोटुटवा जितेंद्र कुमार सिंह, प्रावि करौंदा नानकार रागिनी सिंह, प्रावि गोहनिया ताज अतुल कुमार सिंह, प्रावि हरैया द्वितीय आदित्य सिंह, प्रावि गनेशपुर रियाजुद्दीन, प्रावि फरेनी रीना श्रीवास्तव, प्रावि जिवराए राजन सिंह, प्रावि जमैती-जमैता अमित कुमार, प्रावि तेनुआ सुषमा सिंह, प्रावि गौरडीह अमितेंद्र शेखर मिश्र, प्रावि गनवरिया बुजुर्ग ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, प्रावि धौरहरा पूरबडीह छोटेलाल, प्राविजमुनी गो¨वदलाल गुप्ता, प्रावि जलालपुर कृपानिधान यादव, प्रावि जामडीह विवेक राय,प्रावि इमिलिया जनूबी ललित सिंह, प्रावि अमहट अंकित कुमार श्रीवास्तव, प्रावि हिलांगी नानकार भोरिकनाथ यादव, प्रावि गुजरौलिया सूर्यदेव सिंह, प्रावि गो¨वदपुर आनंद शेखर, प्रावि गोरया घनश्याम तिवारी, प्रावि गिरधरपुर राजेश कुमार सिंह, प्रावि धरूआर शशिकांत त्रिपाठी, प्रावि घनश्यामपुर मनोज कुमार द्विवेदी, प्रावि झहराव अविनाश कुमार सिंह, प्रावि वरवां प्रिया यादव, प्रावि घरूआर इंद्रदेव, प्रावि केवटलिया कुमारी शिल्पी गुप्ता, प्रावि गुजरौलिया हरिशंकर कुमार गुप्ता, प्रावि डड़ऊजोत जंमेजय सिंह शामिल हैं।





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