DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कासगंज कुशीनगर कौशांबी गाजियाबाद गाजीपुर गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, August 14, 2018

58 हजार एससी छात्रों को वित्त विभाग का झटका, दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए धनराशि देने से वित्त विभाग ने किया मना

58 हजार एससी छात्रों को वित्त विभाग का झटका

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पिछले शैक्षिक सत्र में दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति पाने से वंचित रह गए अनुसूचित जाति (एससी) के 58 हजार से ज्यादा छात्रों को वित्त विभाग ने तगड़ा झटका दिया है। फंड की कमी बताते हुए वित्त विभाग ने इन छात्रों के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से मांगी गई 178 करोड़ रुपये की धनराशि देने से फिलहाल मना कर दिया है। अब निगाहें विधानमंडल के मानसून सत्र में सरकार की ओर से पेश किये जाने वाले अनुपूरक बजट पर लगी हैं।

पिछले वित्तीय वर्ष में अनुसूचित जाति के 58093 छात्र दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रह गए थे। इनमें से 16,486 छात्र ऐसे हैं जिनके खाते में छात्रवृत्ति या शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम ट्रांजेक्शन फेल हो जाने के कारण नहीं पहुंच सकी। इन छात्रों को पिछले सत्र की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए समाज कल्याण विभाग ने वित्त विभाग से 29.61 करोड़ रुपये की मांग की है। 1 शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित बाकी 41,607 छात्रों में से 17032 ऐसे हैं जिन्हें फंड के अभाव में बीती 31 मार्च तक छात्रवृत्ति नहीं मिली या शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं हो सकी। वहीं लगभग 20 हजार छात्र ऐसे हैं जिन्हें किन्हीं कारणों से संदेहास्पद (सस्पेक्ट) श्रेणी में डाल दिया गया था। बीती अप्रैल और मई में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के वेबपोर्टल को खुलवाकर जिला स्तरीय समिति से इन छात्रों के बारे में निर्णय कराया गया। बाकी छात्र वे हैं जिनके शिक्षण संस्थानों ने उनके आवेदन फारवर्ड करते हुए उनमें फीस नहीं भरी थी। समाज कल्याण विभाग ने हस्तक्षेप कर आवेदन पत्रों में इन छात्रों की फीस भरवायी।

No comments:
Write comments