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Friday, August 10, 2018

लखीमपुर खीरी : बिना पढ़ाये ही वेतन ले रहे गुरुजी, अटैचमेन्ट के नाम पर बेसिक शिक्षा विभाग में चल रहा खेल

बिना पढ़ाए ही वेतन ले रहे गुरुजी

अटैचमेंट के नाम पर बेसिक शिक्षा विभाग में चल रहा खेल, अधिकारी बेपरवाह
कई स्तरों पर चेक होता है पावना

शिक्षकों की उपस्थिति पर स्कूल का प्रधानाध्यापक अपनी मुहर लगाता है, इसके बाद पावना एनपीआरसी के पास आता है। यहां चेक करने के बाद संबंधित बीईओ पावना बिल पास करते हैं। जिसे लेखा विभाग को वेतन बनाने के लिए भेजा जाता है। लेखा कार्यालय द्वारा चेकिंग के बाद वेतन पास किया जाता है।

संवादसूत्र, लखीमपुर : शिक्षकों के अटैचमेंट के मुद्दे पर शासन को गुमराह करने वाले बेसिक शिक्षा विभाग में ऐसे-ऐसे मामले उजागर हो रहे हैं, जिससे अधिकारियों के दावों की पोल खुल रही है। बीएसए बुद्धप्रिय सिंह ने शासन को रिपोर्ट भेजी कि उनके जिले में कहीं भी शिक्षक अटैच नहीं हैं, लेकिन विभागीय दस्तावेजों से विभागीय अधिकारी सवालों में घिरते जा रहे हैं। बिजुआ ब्लॉक में अटैचमेंट के दो मामले शिक्षकों के पावना बिल से प्रमाणित हुए हैं।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक बिजुआ ब्लॉक का पावना बिल 20-21 जुलाई को संबंधित पटल पर आया, जिसे 25 जुलाई को लेखा अनुभाग में उपस्थिति के अनुसार वेतन बनाने के लिए भेजा गया। एक ही ब्लॉक के दो उच्च प्राथमिक विद्यालयों के पावना बिलों में उपस्थिति वाले कॉलम में शिक्षकों के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। बिजुआ ब्लॉक के राजगढ़ गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पावना बिल में वहां तैनात शिक्षक शैलेंद्र दीक्षित और इसी तरह बेलवा मलूकापुर उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पावना बिल में वहां तैनात शिक्षक विमल कुमार मिश्र के हस्ताक्षर नहीं हैं। शैलेंद्र दीक्षित के कॉलम में प्रधानाध्यापक की कोई टिप्पणी नहीं है, जबकि विमल कुमार मिश्र की उपस्थिति कॉलम में प्रधानाध्यापक द्वारा लिखा गया है कि वह बीएसए दफ्तर में जन सुनवाई पटल पर संबद्ध किए गए हैं। दोनों शिक्षकों का पावना बिल पर हस्ताक्षर न होने के कारण प्रधानाध्यापक यह स्पष्ट कर रहे हैं कि ये शिक्षक स्कूलों के शिक्षण कार्य का हिस्सा नहीं हैं। कई महीनों से ये शिक्षक स्कूलों में नहीं जा रहे हैं। इन मामलों के उजागरहोने से अटैचमेंट से इन्कार करने वाले अधिकारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।1जिम्मेदार की सुनिए: बिजुआ के बीईओ संजय राय कहते हैं कि शिक्षक शैलेंद्र दीक्षित और विमल मिश्र अपने स्कूलों में शिक्षण कार्य नहीं कर रहे हैं। शैलेंद्र को शिक्षकों के सीएल अवकाश का पोर्टल देखने का जिम्मा सौंपा गया है। नियमानुसार दोनों शिक्षकों का वेतन रुक जाना चाहिए।

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