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Sunday, July 28, 2019

10वीं व 12वीं में 100% नंबर आना असामान्य, राज्यसभा में एचआरडी मिनिस्ट्री ने दी जानकारी, की जा सकती है अंक सिस्टम की समीक्षा

10वीं व 12वीं में 100% नंबर आना असामान्य, राज्यसभा में एचआरडी मिनिस्ट्री ने दी जानकारी, की जा सकती है अंक सिस्टम की समीक्षा



शतप्रतिशत अंक मिलने पर चिंता जताई जाती रही है। कुछ एक्सपर्ट ने परीक्षा में अंक देने के सिस्टम में मानक बनाने और व्यावहारिक परीक्षा बढ़ाने का सुझाव भी दिया, लेकिन परीक्षा सुधार के प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ा जा सका, लेकिन इस बार बदलाव की मांग उठी है। एचआरडी मिनिस्ट्री सूत्रों के अनुसार सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ होने वाली बैठक में यह विषय उठाया जा सकता है। सभी से विचार मांगे जा सकते हैं।
...पर यहां जीरो रिजल्ट का भी ट्रेंड


एक तरफ जहां बहुत अधिक अंक मिल रहे हैं, वहीं जीरो रिजल्ट का भी ट्रेंड दिखाई दिया है। पूरे देश में लगभग 100 से अधिक ऐसे स्कूल थे, जहां 2017 में जीरो रिजल्ट आया था। इसके बाद एचआरडी ने एक कमिटी बनाई, जिससे जीरो रिजल्ट आने के पीछे कारण जानने को कहा गया। कमिटी ने रिपोर्ट दे दी है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के बाद विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों को लगाया गया है। कमिटी ने पाया कि यहां मानसिक रूप से स्टूडेंट को अच्छे नंबर लाने के लिए तैयार नहीं किया जा रहा था। एचआरडी के अनुसार इस साल इन सभी स्कूलों में औसतन 30 से 40 फीसदी परिणाम आए हैं। अगले साल इसे और बेहतर करने का टारगेट है।



नई दिल्ली: जिस तरह सीबीएसई में दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में छात्रों को शत-प्रतिशत नंबर मिल रहे हैं, उसे सरकार ने असामान्य माना है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने संसद में इससे संबंधित जवाब दिया है। राज्यसभा में पूछा गया था, ‘क्या दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में लगभग पूरे अंक पाने वाले छात्रों की बड़ी संख्या होना एक असामान्य बात है/ क्या इससे वे विवेकशील नागरिक बनेंगे, जो बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे/’

 इसके जवाब में मंत्रालय ने कहा कि यह असामान्य है। देखा गया है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में लगभग पूरे अंक ला रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार जिस तरह अंकों पर सवाल उठे हैं, उसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। इस बारे में कुछ राज्यों की ओर से भी शिकायत आई थी कि जिस तरह सीबीएसई उदारता से नंबर देता है, उससे उनके राज्य के स्टूडेंट पीछे छूट जाते हैं।

पहले भी उठते रहे हैं सवाल

अंक देने में राज्य बोर्ड और सीबीएसई के बीच के फासले के अलावा छात्रों को लिटरेचर में




 

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