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Monday, July 29, 2019

बिना प्रशिक्षण लिए ही गुरुजी बन रहे हैं "साहब", उच्च शिक्षा विभाग में नहीं है प्रशिक्षण की व्यवस्था, प्रशासनिक अधिकारियों में है अनुभव का अभाव

बिना प्रशिक्षण लिए ही गुरुजी बन रहे हैं "साहब", उच्च शिक्षा विभाग में नहीं है प्रशिक्षण की व्यवस्था, प्रशासनिक अधिकारियों में है अनुभव का अभाव।


बिना प्रशिक्षण लिए ही गुरुजी बन रहे हैं ‘साहब’
July 29, 2019   
राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : कार्यो में बेहतरी के लिए हर विभाग साल-दो साल में प्रशिक्षण कराता है। अगर किसी का कार्यक्षेत्र बदलता है तो उसे अनिवार्य रूप से प्रशिक्षित कराया जाता है। मकसद होता है कि संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के व्यक्तित्व का विकास करके कार्यो में गुणवत्ता लाया जाए, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग में यह नियम लागू नहीं होता। यहां न ट्रेनिंग का प्रावधान है न किसी विशेषज्ञ से दिशा-निर्देश लिया जाता है। यह स्थिति तब है, जब पढ़ाने वाले शिक्षक से प्रशासनिक काम लिया जाता है। कक्षा में पढ़ाते-पढ़ाते शिक्षक बिना प्रशिक्षण प्राप्त किए प्रशासनिक अधिकारी बन जाते हैं, लेकिन उन्हें उसका कोई अनुभव नहीं होता।
उप्र लोकसेवा आयोग से उच्चतर शिक्षा सेवा समूह ‘क’ के तहत राजकीय डिग्री कॉलेजों के सहायक प्रोफेसर पद का चयन होता है। सहायक प्रोफेसर बनने वाले कॉलेज में पढ़ाते हैं। फिर पदोन्नति पाकर यही प्राचार्य व उच्च शिक्षा विभाग में निदेशक, संयुक्त निदेशक, संयुक्त सचिव, सहायक निदेशक, अपर सचिव, उपसचिव, मंडलीय उच्च शिक्षाधिकारी जैसे प्रशासनिक पदों पर आसीन होते हैं। प्रशासनिक पद शैक्षणिक कार्य से भिन्न होता है। प्रशासनिक पद पर बैठने वाला ही उच्च शिक्षा का नीति निर्धारण करता है, लेकिन उसके मद्देनजर उन्हें प्रशिक्षित नहीं कराया जाता। इसके चलते अधिकतर अधिकारी शिक्षक की मानसिकता से उबर नहीं पाते। कड़े व बड़े निर्णय लेने से बचते हैं। कार्यवाहक उच्च शिक्षा निदेशक व उच्च शिक्षा के संयुक्त सचिव डॉ. अमित भारद्वाज भी मानते हैं कि पठन-पाठन छोड़कर प्रशासनिक कार्य देखने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षण मिलना चाहिए। कहते हैं कि प्रशासनिक पदों पर बैठने वाले लोगों को प्रशिक्षण मिले, उसका प्रस्ताव बनाकर वह शासन को जल्द भेजेंगे।

नहीं है जिलास्तरीय अधिकारी

उच्च शिक्षा विभाग में जिला स्तर पर कोई अधिकारी नहीं है। जिलास्तरीय अधिकारी न होने से योजनाएं जमीनी स्तर पर लागू नहीं होतीं। न ही डिग्री कॉलेजों पर अंकुश लगता है।








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