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Tuesday, August 27, 2019

प्रदेश के 4300 से अधिक सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में फीस बढ़ाने की तैयारी


एडेड कॉलेजों की बढ़ेगी फीस
27 Aug 2019

4300 से अधिक स्कूलों के 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को देनी पड़ेगी बढ़ी फीस

प्रदेश के 4300 से अधिक सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में फीस बढ़ाने की तैयारी है। इन स्कूलों में मेंटनेंस और फर्नीचर के लिए बजट नहीं होने से स्थितियां बदतर होती जा रही हैं। हालात यह है कि अगर पंखा खराब हो जाए तो प्रिंसिपल को अपनी जेब से पैसे देकर मरम्मत करानी पड़ती है।


इन स्कूलों में फंड की गंभीर कमी को देखते हुए सरकार ने फीसवृद्धि का मन बनाया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने अपर शिक्षा निदेशक राजकीय, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक और वित्त नियंत्रक माध्यमिक को फीसवृद्धि का प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया है। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिनियम (आरटीई) लागू होने के कारण कक्षा एक से आठ तक के बच्चों से फीस नहीं ली जाती।



कक्षा 9 से 12 तक छात्र-छात्राओं से बहुत मामूली फीस लेते हैं जिससे स्कूल का खर्च पूरा करना मुमकिन नहीं। यहां तक की चाक-डस्टर खरीदने के लिए रुपये नहीं बचते। इसलिए कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं की फीस बढ़ाई जाएगी। फंड नहीं होने के कारण जिले के सहायता प्राप्त स्कूलों में बिजली, जलकल, सीवर का बिल लाखों रुपये में है जिसे भरना मुश्किल हो रहा है।

जहां एक ओर राजकीय माध्यमिक कालेजों के भवन एवं साज-सज्जा के लिए शासन पर्याप्त धन देता है। वहीं दूसरी ओर अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन को छोड़कर एक भी रुपया अनुदान नहीं मिलता।


शासन का निर्देश है कि छात्र निधियों में लिया गया शुल्क उसी मद में खर्च किया जाए। ऐसी स्थिति में निर्धारित फीस से विद्यालय का संचालन कठिन है। अब बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने वाले कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के ऑनलाइन पंजीकरण के साथ ही वर्षपर्यन्त स्थानान्तरण, अधियाचन, छात्रवृत्ति, यू-डायस जैसी सभी सूचनाएं ऑनलाइन देनी होती है। अधिकांश कॉलेज हजारों रुपये खर्च कर सायबर कैफे से यह काम कराते हैं जबकि इन कार्यों के लिए एक भी पैसा छात्रों से नहीं लिया जा सकता। अत: शासन को इन संस्थाओं की बेहतरी के लिए अवश्य कुछ करना चाहिए। -डॉ. योगेन्द्र सिंह, प्रधानाचार्य केपी इंटर कॉलेज

यूपी बोर्ड ने परीक्षा शुल्क तो ढाई गुना बढ़ा दिया लेकिन स्कूलों को कुछ नहीं मिलता। बजट के अभाव में सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का प्रबंधन कठिन होता जा रहा है। बिजली का बिल सालाना एक से डेढ़ लाख रुपये आता है जिसे भरना मुश्किल होता है। हमने सरकार से फंड बढ़ाने का अनुरोध किया है।

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