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Sunday, September 20, 2020

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO और 2 शिक्षक सस्पेंड किए

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO समेत 2 शिक्षक सस्पेंड किए


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड किया.


आगरा. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने शनिवार को आगरा मंडल समीक्षा बैठक में बीईओ सहित तीन को सस्पेंड कर दिया. शनिवार को हुई इस मीटिंग में जनप्रतिनिधि और अन्य लोगों की शिकायत करने पर बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने इस मामले की जांच करने के आदेश दिए.


आगरा के सर्किट हाउस में हुई इस मीटिंग में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने आगरा मंडल के सभी जनपदों में यूनिफॉर्म वितरण और दूसरी योजनाओं की समीक्षा की. इस मीटिंग में लोगों की शिकायत करने पर खंड शिक्षाधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव और दो शिक्षकों को संस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव के खिलाफ जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की थी. अकोला ओमप्रकाश यादव पर बरौली अहीर का भी अतिरिक्त आभार था.


सतीश द्विवेदी ने कहा कि बरौली अहीर में तैनात दो शिक्षक उमेश यादव और प्रदीप यादव के खिलाफ भी लोगों ने शिकायत की. इन पर शिक्षकों के साथ अभद्रता करने और काम के लिए पैसे मांगने के आरोप थे. तीनों को तत्काल प्रभाव के साथ सस्पेंड कर दिया गया है और मामले की जांच की भी जाएगी.


इस समीक्षा बैठक में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने ऑपरेशन कायाकल्प को आगे बढ़ाने, रिटायर्ड शिक्षकों को समय पर जीपीएफ और पेंशन का भुगतान करने, फर्जी शिक्षकों के खिलाफ जांच और यूनीफॉर्म-किताब वितरण को समय से पूरा करने के निर्देश दिए. इस मीटिंग में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी के बेसिक शिक्षा अधिकारी, लेखा अधिकारी, आगरा मंडल के एडी बेसिक और डाइट प्राचार्य भी मौजूद रहे.

Tuesday, August 4, 2020

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से  घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

 
आगरा: कोरोना काल में काम-धंधे प्रभावित होने से अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और लगातार स्कूलों से फीस माफ कर राहत देने की मांग कर रहे हैं। उनकी यह परेशानी यूं ही नहीं। स्कूल बंद होने से बच्चे घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ जरुर रहे हैं, लेकिन यह पढ़ाई क्लास रूम से भी महंगी पड़ रही है, जिससे अब घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति बनने लगी है।


समस्या सबसे ज्यादा उन परिवारों में है, जहां एक से ज्यादा बच्चे हैं, जो अलग कक्षाओं में हैं। लिहाजा ऑनलाइन कक्षाओं का समय एक ही होने से दो स्मार्ट फोन या लैपटॉप परिवार की जरुरत बन गए हैं क्योंकि ऑफिस और बिजनेस की शुरूआत होने से अभिभावक भी अपने कामों में व्यस्त हैं। हालांकि उन घरों में अभी थोड़ी राहत है, जहां मां गृहणी हैं और स्मार्ट फोन भी रखती हैं।


ऐसे बढ़ गया खर्च: कम से कम एक स्मार्ट फोन या लैपटॉप भी लेना पड़े, तो 10 से 30 हजार रुपये का अतिरिक्त करना पड़ रहा है। साथ में इंटरनेट ब्रॉडबैंड डाटा कनेक्शन या पैक लेना भी जरुरी है, जिसकी कीमत 200 से सात सौ रुपये महीना के बीच है। सिर्फ इतना भर होता तो गनीमत थी। स्कूलों फीस और किताबों का खर्च 25 से 40 हजार के बीच चुकाया है या चुकाना बाकि है, लिहाजा 30 से 40 हजार का अतिरिक्त खर्च सिर पर पड़ने से अभिभावक परेशान हैं।


स्कूल नहीं समझ रहे पीड़ा: अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुले थे, तो उन्होंने बच्चों के भविष्य की खातिर मनमानी फीस देने में कभी आनाकानी नहीं की। हर साल ड्रेस, किताबों, बैग आदि का खर्च अलग करते थे। सालभर में 60 से 80 हजार और एक लाख रुपये तक खर्च करते थे, लेकिन अब कोरोना काल में स्कूल बंद होने और आय प्रभावित होने पर स्कूलों को भी हमारी परेशानी समझनी चाहिए।


केस वन
माईथान निवासी मनोज वर्मा के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 12वीं और बेटा 10वीं है। सिंगल पेरेंट होने के कारण खुद की नौकरी भी देखनी है। स्कूल बंद हुआ, तो ऑनलाइन स्टडी के लिए दोनों बच्चों को लैपटॉप भी दिलाना पड़ा, जिनकी कीमत 60 हजार के करीब थी।


केस टू
दयालबाग निवासी तरुण यादव के दो बेटे हैं, दोनों कॉन्वेंट स्कूल के छात्र हैं, लिहाजा उनकी पढ़ाई के लिए लैपटॉप लेना पड़ा क्योंकि फोन से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता था। साथ ही उन्हें अपने काम पर जाना था। लिहाजा इस तरह 80 हजार खर्चने पड़े, क्योंकि दोनों बेटे की क्लास की टाइमिंग एक ही है।

राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

 
आगरा : राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन करने की मंगलवार को अंतिम तिथि है, लिहाजा आवेदन के इच्छुक शिक्षक चार अगस्त को रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि इसकी अंतिम तिथि पहले 30 जुलाई तय की गई थी, लेकिन आवेदन बेहद कम रहने पर शासन ने इसे बढ़ा दिया था।


डीआइओएस रवींद्र सिंह ने बताया कि राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए जिले के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षकों के पास अब भी आखिरी मौका है, वह मंगलवार रात 12 बजे तक सभी प्रपत्रों और औपचारिकताएं पूरी कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल की बात की जाए, तो जिले में अब तक राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 30 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 18 शिक्षकों ने आवेदन किए हैं।

यह होगी प्रक्रिया

अंतिम तिथि पूरी होने के बाद पांच अगस्त को जिला समिति आवेदनों का परीक्षण व स्थलीय सत्यापन कर पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और मंडलीय समिति को प्रस्ताव भेजेगी। मंडलीय समिति अध्यापक पुरस्कार के लिए 14 से 20 अगस्त के बीच, जबकि मुख्यमंत्री पुरस्कार के लिए पांच से 17 अगस्त के बीच पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और राज्य चयन समिति के सदस्य सचिव व शिक्षा निदेशक को प्रस्ताव उपलब्ध कराएगी। इसके बाद शासन स्तर से उनकी घोषणा की जाएगी।

Monday, August 3, 2020

फंदे पर लटकता मिला शिक्षामित्र का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

फंदे पर लटकता मिला शिक्षामित्र का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच में जुटी पुलिस
 

आगरा : बाह क्षेत्र में चित्राहाट के नगला सुरई गांव में रविवार की सुबह शिक्षामित्र सत्यवान सिंह (42) का शव घर के कमरे में फंदे से लटकता मिला। कमरे का दरवाजा खुला था। साथियों का मानना है कि शिक्षक पद से समायोजन निरस्त होने के अवसाद में यह आत्मघाती कदम उठाया है। हालांकि परिजनों ने हत्या का अंदेशा भी जताया है। शिक्षामित्र संघ से जुड़े लोगों ने सरकार से परिवार की आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। 


चित्राहाट के नगला सुरई गांव निवासी सत्यवान पुत्र साहब सिंह पारना गांव के प्राइमरी स्कूल में शिक्षामित्र थे। साथी शिक्षामित्रों और परिजनों ने बताया कि सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने के बाद से सत्यवान गुमशुम रहने लगे थे।
शनिवार की रात खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने चले गए थे। रविवार की सुबह फंदे पर शव लटका मिला। कमरे का दरवाजा खुला देख घरवाले हत्या की आशंका जता रहे हैं। सूचना पर पहुंची चित्राहाट पुलिस ने छानबीन करने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।   


एसओ चित्राहाट ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार कार्रवाई की जाएगी। वहीं शिक्षामित्र संगठन के अजय भदौरिया, शैलेंद्र भदौरिया, अनिल शर्मा, पंकज बौहरे , पीतम गुर्जर, नेवर सिंह आदि ने सरकार से परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की गुहार लगाई है।


पत्नी भी है शिक्षामित्र, मायके गई थी 
मृतक शिक्षामित्र सत्यवान की पत्नी ऊषा देवी भी नगला सुरई के प्राइमरी स्कूल में शिक्षामित्र है। उनके दो बच्चे अभिनव (12), गीतांजलि (7) वर्ष हैं। दो दिन पहले ही सत्यवान ऊषा देवी को रक्षाबंधन पर मायके इटावा गई थी। सत्यवान खुद छोड़ने गए थे। मौत की खबर लगते ही वह रोते-बिलखते घर लौटी।  

Sunday, August 2, 2020

नवोदय में प्रवेश के लिए हुआ फर्जीवाड़ा, जांच में खुला सारा खेल

Fraud in Entrance: नवोदय में प्रवेश के लिए हुआ फर्जीवाड़ा, जांच में खुला सारा खेल


 विद्यालय की जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल। प्रवेश निरस्त करने के लिए मांगी बीएसए से अनुमति। ...


आगरा । जवाहर नवोदय विद्यालय कौलारा कलां में कक्षा छह के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में सेंधमारी हुई है। स्कूली शिक्षकों की जांच कमेटी ने ऐसे 10 अभ्यर्थियों को चिन्हित किया है, जो पिछले साल भी इसी कक्षा के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन सफल नहीं हो पाए। इस साल सफल होने उन्हें प्रवेश मिल गया, लेकिन डाटा वैरिफाई में रिकॉर्ड पकड़ा गया। स्कूल ने मामले में बीएसए से प्रवेश निरस्त करने की अनुमति मांगी है।


दरअसल 20 जून को सीबीएसई बोर्ड ने 80 चयनीत अभ्यर्थियों की सूची भेजी, विद्यालय प्रबंध कमेटी और एसडीएम फतेहाबाद को भेजी, सभी अभ्यर्थियों को प्रवेश के लिए सूचित किया गया। चयनित अभ्यर्थियों के प्रपत्रों की जांच के लिए विद्यालय स्तर पर एक पांच सदस्यीय कमेटी उप प्राचार्य की अध्यक्षता में गठित हुई। आवेदन पत्रों की जांच हुई, तो पता चला कि 10 अभ्यर्थियों ने दूसरी बार इस प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया है, जबकि नवोदय विद्यालय समिति के नियमानुसार इसमें एक ही बार शामिल हो सकते हैं। कक्षा पांचवीं में भी उन्होंने फर्जी तरीके से दो बार प्रवेश लेकर पढ़ाई की। लिहाजा सभी दस अभ्यर्थियों को स्कूल कमेटी ने अपात्र घोषित करते हुए बीएसए से मामले में कार्यवाही की अनुमित मांगी है।


कोचिंग माफिया पर शक
मामले के पीछे दबी जुवां में स्कूल में प्रवेश का दम भरने वाली कोङ्क्षचग माफिया का हाथ होने की आशंका लग रही है, क्योंकि अभिभावकों को इसके नियमों की ज्यादा जानकारी नहीं, लिहाजा इस दिशा में भी जांच किए जाने की जरुरत है। इसके लिए पर्याप्त साक्ष्य भी हैं, सिर्फ चिन्हित अभ्यर्थियों ने जहां से दोनों बार पांचवीं की है, उनकी जांच करने की जरुरत है कि उन्होंने बिना जानकारी एक ही कक्षा में दूसरी बार प्रवेश कैसे दे दिया।


यह नाम मिले संदिग्ध
- सुमित सौलंकी
- रौनक
- कृष्णा चौहान
- रोहित गुर्जर
- समीर खान
- सचिन कुमार
- पूजा चरग
- नेहालिका धनगर
- अरुण
- अजय

(उक्त अभ्यर्थी वर्ष 2019 और 2020 दोनों साल अछनेरा, शमसाबाद, बिचपुरी, जगनेर, फतेहपुरसीकरी, बरौली अहीर, फतेहाबाद, जैतपुर कलां और नगर क्षेत्र को ब्लॉक दिखाकर भरे गए। कुछ ने दोनों साल अलग-अलग ब्लॉक भी दिखाए।


बीएसए ने बीईओ को सौंपी जांच
बीएसए राजीव कुमार यादव का कहना है कि मामले की जांच खंड शिक्षाधिकारी को सौंपी गई है। वह जांच कर जल्द ही मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।


Thursday, July 30, 2020

आगरा : आगरा विवि के फर्जी घोषित करने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र वाले 171 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ

आगरा : आगरा विवि के फर्जी घोषित करने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र वाले 171 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ 


आगरा। जिले के परिषदीय प्राथमिक और उप प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत और एसआईटी की सूची में शामिल 171 और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से अपना पक्ष रखने वाले 12 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किए जाने से बेसिक शिक्षा विभाग का काम आसान हो गया है। अब सूची प्राप्त होने का इंतजार है। बेसिक शिक्षा विभाग ने विवि के बीएड सत्र 2004-05 को एसआईटी की ओर से तैयार फर्जी एवं टेम्पर्ड प्रमाण पत्रों की सूची से जिले में 249 शिक्षकों को चिह्नित किया था।


इसमें से 195 का नाम फर्जी प्रमाणपत्र और फर्जी घोषित किए सूची में शामिल गए 812 अभ्यर्थियों की सूची में नाम प्रशासन ने सात होने की उम्मीद 54 का नाम टेपर्ड प्रमाणपत्रों की फरवरी 2020 को एसआईटी की सूची में शामिल 2823 अभ्यर्थियों को फलों घोषित कर दिया इन अभ्यर्थियों में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ललित 195 में से 24 शिक्षकों के नाम थे। इनको बर्खास्त कर दिया गया है। का 171 अभ्यर्थियों का वेतन रोका गया है। इनके खिलाफ खस्तगी की कार्रवाई के लिए विवि में अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों पर निर्णय लिए जाने का इंतजार किया जा रहा था। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव ने सूची के लिए विवि के अधिकारियों से संपर्क भी किया था। इनका कहना है कि सूची मिलने के साथ बाकी चिन्हित शिक्षकों के नाम से मिलान करने के बाद बास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।

आगरा : वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक गिरफ्तारी देने के बाद मिला वेतन

आगरा : वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन,  सार्वजनिक गिरफ्तारी देने के बाद मिला वेतन।

आगरा : : शिक्षकों के वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में बुधवार को शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर तालाबंदी कर सामाजिक गिरफ्तारी भी दी। हालांकि गिरफ्तारी के बाद शिक्षकों का वेतन और शिक्षामित्रों का मानदेय जारी कर दिया गया।



राष्ट्रवादी शिक्षक महासंघ के बैनर तले प्रदेश संयोजक मुकेश डागुर व वीरेन्द्र छौंकर के नेतृत्व में बुधवार को दोपहर में ने एसडीएम महेंद्र कुमार व क्षेत्राधिकारी नम्रता श्रीवास्तव का सामाजिक गिरफ्तारी दी। शिक्षकों ने सीएम महेंद्र कुमार को बेसिक शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।


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Friday, July 24, 2020

अध्यापक से घूस लेते गिरफ्तार तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, जांच में सही मिले रिश्वत के आरोप


रिश्वत लेते गिरफ्तार तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

सीबीसीआईडी की जांच में सही मिले रिश्वत के आरोप, सहायक अध्यापक से ली थी घूस

● सीबीसीआईडी कर रही थी जांच
● लखनऊ विजिलेंस ने वर्ष 2017 में रंग हाथ पकड़ा था
 

आगरा में वर्ष 2017 में सहायक अध्यापक से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गए बेसिक शिक्षाधिकारी के तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी कन्हैया लाल सारस्वत के खिलाफ सीबीसीआईडी ने चार्जशीट लगा दी है। उन पर लगे आरोप सही पाए गए।  


मूलरूप से हाथरस के चंदपा निवासी तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी कन्हैया लाल सारस्वत बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में तैनात थे। दो मई 2017 को लखनऊ की विजिलेंस टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। थाना शाहगंज में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में खेरागढ़ ब्लाक के सरेंडा में तैनात सहायक अध्यापक दिनेश सिंह चाहर ने शिकायत की थी। 


आरोप था कि उनका निलंबन अवधि के जीवन निर्वहन भत्ता का 1.5 लाख रुपये रुके हुए थे। उसका बिल पास करने के बदले कन्हैया ने उससे रिश्वत में 50 हजार रुपये मांगी थी। सहायक अध्यापक के रिश्वत नहीं देने पर वेतन पास नहीं किया था। इस मामले में लखनऊ विजिलेंस ने जांच की। 


इसके बाद अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया था। आरोपी ने अपनी गिरफ्तारी के पीछे शिक्षा माफिया और विजिलेंस की मिलीभगत का आरोप लगाया था। जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की। इस पर दिसंबर 2018 में जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। जांच में वित्त एवं लेखाधिकारी पर लगे आरोप सही पाए गए।

Wednesday, July 1, 2020

आगरा : दो शिक्षकों की दो-दो जिलों में तैनाती, जांच के आदेश

आगरा : दो शिक्षकों की दो-दो जिलों में तैनाती, जांच के आदेश


आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग में आगरा में दो ऐसे शिक्षक तैनात मिले हैं जिनकी तैनाती दूसरे जिलों में भी है। जांच में पता चला है कि इनमें से एक मनोज कुमार की तैनाती कासगंज में भी है। संतोष कुमारी की तैनाती कन्नौज में भी है। अनामिका शुक्ला जैसे इस फर्जीवाड़े का पता चलते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव ने जांच के आदेश दिए हैं। 


वित्त एवं लेखाधिकारी पंकज कुमार सिंह ने इन शिक्षकों के बारे में रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी है। प्रारंभिक तौर पर की गई जांच पड़ताल में मनोज कुमार की तैनाती सैंया ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय, जाजऊ के सहायक अध्यापक के पद पर होने के साथ कासगंज में भी है। दोनों जगह पर्सनल अकाउंट नंबर (पैन) एक ही दिया गया है हालांकि जन्मतिथि, आधार संख्या, नियुक्ति तिथि और खाता संख्या अलग-अलग हैं। 

आगरा : एसआईटी जांच में फंसे 24 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, होगी वेतन रिकवरी

आगरा : एसआईटी जांच में फंसे 24 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, होगी वेतन रिकवरी।

आगरा : आगरा में 24 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शाहगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमे में आठ महिला शिक्षिका भी नामजद हैं। सभी के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य हैं। एसआईटी ने अपनी जांच में खेल पकड़ा था। इन लोगों की नौकरी फर्जी दस्तावेज पर लगी थी। सभी आरोपित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के वर्ष 2004-05 सत्र के बीएड परीक्षा चार्ट में हेराफेरी करके नौकरी के लिए पात्र बने थे। अब कानूनी शिकंजे में फंसे हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार ने यह मुकदमा शाहगंज थाने में दर्ज कराया है। दर्ज मुकदमे के अनुसार एक्जीक्यूटिव काउंसिल ने 28 जून 2019 को 3637 फर्जी अभ्यर्थी, 1084 टेंपर्ड अभ्यर्थी, 45 डुप्लीकेट अभ्यर्थियों की सूची विवि की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की थी। अखबारों में नोटिस देते हुए इन अभ्यर्थियों से 15 दिन में ऑनलाइन रजिस्टर्ड डाक से उनका पक्ष मांगा था। इनमे सिर्फ 814 ने ही अपना पक्ष भेजा। बाकी 2823 अभ्यर्थियों ने अपना पक्ष नहीं भेजा था। ऐसे अभ्यर्थियों को जिन्होंने जवाब नहीं दिया, विवि फर्जी घोषित कर दिया था। इनमें 24 अभ्यर्थी आगरा के थे। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में एसआईटी ने बीएड में फर्जीवाड़े की जांच की थी। जनवरी 2020 में एसआईटी की जांच में फर्जी पाए गए शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कहा गया था। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने विवि द्वारा उपलब्ध कराई गई हार्ड और सॉफ्ट कापी बेसिक शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराकर आरोपित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को लिखा था। इन फर्जीवाड़ा करने वाले 24 अभ्यर्थियों की 15 मई 2020 में सेवा समाप्त कर दी गयी थीं।





आरोपित शिक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर एक-एक करके सभी को गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा। जो धाराएं हैं उनमें सात साल से अधिक सजा का प्रावधान है। गिरफ्तारी जरूरी है। - बोत्रे रोहन प्रमोद, एसपी सिटी

15 मई को शासन से एफआईआर का आदेश हुआ था। इसके बाद संबंधित ब्लॉक के बीएसए को जिम्मेदारी दी गई थी। किन्हीं कारणवश एफआईआर नहीं हो सकी। जिम्मेदारी बाबुओं को दी, लेकिन फिर भी सभी ब्लॉकों से एफआईआर नहीं हुई। मंगलवार को अपने स्तर से एफआईआर कराई है। जल्द ही रिकवरी की जाएगी। - राजीव कुमार यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी


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Thursday, June 25, 2020

आगरा : स्कूलों में आकर डाटा फीड करने का शिक्षकों ने किया विरोध, शिक्षकों ने कहा- फीडिंग का कार्य विभाग का

आगरा : स्कूलों में आकर डाटा फीड करने का शिक्षकों ने किया विरोध, शिक्षकों ने कहा- फीडिंग का कार्य विभाग का।


स्कूलों में आकर डाटा फीडिंग काम का विरोध


आगरा : स्कूलों में डाटा फीडिंग कर कंप्यूटर ऑपरेटर की जगह काम करने का शिक्षक विरोध कर रहे हैं। शासन का एक जुलाई से परिषदीय विद्यालय खोलने का आदेश आ चुका है। शिक्षकों का कहना है कि उनसे सिर्फ शिक्षक का ही कार्य लिया जाए, अन्य कार्य नहीं।








शिक्षकों से एमडीएम की लिस्ट और सीडी बनवाकर विभिन्न बैंकों में भेजना, मानव संपदा पोर्टल के लिए अपनी ही सर्विस बुक को सही कराने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर के पास जाकर फीडिंग कराना नियम विरुद्ध है। शिक्षक अपनी सर्विस बुक को सही कैसे कर सकता है, जबकि सर्विस बुक फीडिंग का कार्य विभाग का है। शिक्षकों का कहना है कि ये सभी कार्य शिक्षा के नहीं हैं, इन कार्यों के लिए विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति की गई है। इसलिए सभी कार्य कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा कराए जाएं। प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राठौर, राजीव वर्मा, केशव दीक्षित, ब्रजेश दीक्षित आदि ने विरोध जताया है।



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Friday, June 19, 2020

निर्णय : अभिभावक कहेंगे, सरकार समस्या समझेगी तभी खुलेंगे स्कूल, आगरा में निजी कान्वेंट स्कूलों ने फीस न मिलने तक बन्द की पढ़ाई

निर्णय : अभिभावक कहेंगे, सरकार समस्या समझेगी तभी खुलेंगे स्कूल, आगरा में निजी कान्वेंट स्कूलों ने फीस न मिलने तक बन्द की पढ़ाई


19 Jun 2020

समस्या
ताजनगरी के कॉन्वेंट स्कूल अब अभिभावकों की सहमति पर ही खुलेंगे। साथ ही स्कूलों की समस्याओं को जब तक सरकार नहीं समझेगी। तब तक भी स्कूलों में पढ़ाई शुरू नहीं कराई जाएगी। शहर के प्रमुख सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूलों के संगठन एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल ऑफ आगरा (अप्सा) ने यह फैसला लिया है। साथ ही स्कूल खुलने के बाद सेनेटाइजेशन का जिम्मा भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लेना होगा। अप्सा ने सरकार द्वारा ‘पात्र-सक्षम माता-पिता' की परिभाषा को परिभाषित करने की मांग भी की है, ताकि उस श्रेणी में आने वाले अभिभावकों से फीस मिल सके।


अप्सा अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता के अनुसार देशभर में लगभग 2 करोड़ शिक्षक 5 लाख निजी स्कूलों में कार्यरत हैं। इन शिक्षकों ने लॉकडाउन के दौरान अपनी जिम्मेदारी समझी। छात्रों के शिक्षण की निरंतरता बनी रहे एवं उनकी पढ़ाई की प्रक्रिया बाधित न हो, इसके लिए ऑनलाइन व लाइव कक्षाएं लीं। साथ ही विषय संबंधित असाइनमेंट, वर्कशीट, नोट्स आदि भी ऑंनलाइन भेजे। विद्यार्थियों को घर से ही ऑनलाइन टेस्ट, हॉली-डे होमवर्क, समरकैंप आदि गतिविधियों से जोड़े रखा। डॉ. गुप्ता के अनुसार केंद्र व राज्य शासित कार्यालयों के सभी कर्मचारियों, सरकारी शिक्षकों, विधायकों, सांसदों को पूरा वेतन मिला है। इनमें से ज्यादातर के बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। अगर सभी को वेतन पूरा मिला है, तो स्कूलों को फीस देने में क्या समस्या है। फीस मांगने पर स्कूल प्रबंधन के प्रति उत्पीड़न का आरोप लगाते हैं। क्या यह उचित है?


मांग
● सरकार अभिभावकों को फीस का भुगतान करने के दे निर्देश
● फीस ना मिलने पर ऑनलाइन-ऑंफलाइन पढ़ाई नहीं संभव

Friday, May 22, 2020

आगरा : फर्जी शिक्षक बर्खास्तगी में फिर खेल, सूची में एक ही नाम दो-दो बार दिखाकर दागियों को बचाया जा रहा

बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षकों को बचाने के लिए तरह-तरह की जुगत लगाई जा रही है। सूची में एक ही नाम को दो-दो बार दिखाकर दागियों को बचाया जा रहा है। डॉ. बीआरए विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2005 की फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर नौकरी पाए अध्यापक बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ लोगों के लिए दुधारू गाय सिद्ध हो गए। पुष्ट सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की सूची में से जनपद में कार्यरत अध्यापकों के वेतन के डेटा से मिलान शिक्षकों के दौरान 300 से अधिक फर्जी डिग्रीधारक अध्यापक जनपद में चिन्हित किए गए थे। लेकिन विभाग के जिम्मेदार लोगों ने ही इसमें से दर्जनों अध्यापकों से सेटिंग कर उनके नाम कार्यवाही की सूची से हटाने का आश्वासन दिया। शिक्षा निदेशक ने कई बार अध्यापकों को चिन्हित कर कार्यवाही करने के लिए कहा, लेकिन तीन साल में सिर्फ नोटिस ही दिए गए। वे भी सिर्फ उन्हीं 249 को जिनसे सेटिंग नहीं हो सकी। 2823 में से मात्र मात्र 24 अध्यापकों को चिन्हित कर उनकी बर्खास्तगी की गई है। वहीं अन्य का वेतन रोकने के आदेश बीएसए राजीव यादव ने किए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव का कहना है कि जिन 24 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिन्होंने यूनिवर्सिटी में अपना कोई पक्ष नहीं रखा, इन्हें बर्खास्त किया गया है। वहीं 814 ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने अपने पक्ष को रखा है। न्यायालय की ओर से इन्हें तीन महीने का समय दिया गया है।

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Friday, May 8, 2020

आगरा : खबर के बाद फर्जी शिक्षकों की सूचियों में गलतियां हुई ठीक, सोशल मीडिया पर वायरल होने पर मांगा स्पष्टीकरण

आगरा : खबर के बाद फर्जी शिक्षकों की सूचियों में गलतियां हुई ठीक, सोशल मीडिया पर वायरल होने पर मांगा
स्पष्टीकरण।


बीएसए ने सूची ठीक कराई शिक्षक से मांगा स्पष्टीकरण

आगरा : बेसिक शिक्षा से जारी फर्जी शिक्षकों की सूची में फर्जीवाड़े के खुलासे से विभाग में हड़कंप मच गया है। इसमें दो-दो क्रमांकों पर एक-एक शिक्षक का नाम है। मामले को बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव ने संबंधित बाबू से लिस्ट की जांच कराई है।

अखबार ने फर्जी शिक्षकों की सूची में फर्जीवाड़ा होने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच कराई तो 64 और 194 क्रमांक पर आधार संख्या एक ही हो मिली। एक क्रमांक में नाम ही एक मिला। इस लिस्ट को सही कराया है। संबंधित खंडशिक्षाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। रीना और रेनु के चक्कर में अभी भी विभाग में ऐसे फर्जी शिक्षक छिपे हैं, जिनका नाम फर्जी शिक्षकों में था। लेकिन विभाग ने उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि ऐसी कोई शिकायत उनके पास नहीं पहुंची हैं।






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Wednesday, March 4, 2020

आगरा : प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में परिषदीय शिक्षकों को एक उपार्जित अवकाश देय होने एवं मानव सम्पदा पोर्टल पर अपडेट करने सम्बन्धी आदेश जारी, देखें


Friday, February 28, 2020

आगरा : परिषदीय शिक्षकों में हड़कंप, बोर्ड परीक्षा ड्यूटी न करने वाले शिक्षकों का कटेगा वेेतन


आगरा : परिषदीय शिक्षकों में हड़कंप, बोर्ड परीक्षा ड्यूटी न करने वाले शिक्षकों का कटेगा वेेतन

किताबें ही नही, बच्चों की ड्रेस में भी हुआ है घोटाला, जूते-मोजे के टेंडर में भी बड़ा खेल

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Saturday, February 22, 2020

अब सरकारी स्कूलों में तैनात होंगे चौकीदार, विद्यालय प्रबंध समिति स्तर से होगा आवेदन

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Monday, January 27, 2020

आगरा : बीईओ कार्यालय का बाबू वेतन एरियर के एवज में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार, एन्टी करप्शन ब्यूरो द्वारा जारी विज्ञप्ति देखें

आगरा : बीईओ कार्यालय का बाबू वेतन एरियर के एवज में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार, एन्टी करप्शन ब्यूरो द्वारा जारी विज्ञप्ति देखें।

आगरा : बेसिक शिक्षा विभाग का बाबू रिश्वत लेते गिरफ्तार

Saturday, December 28, 2019

आगरा : आज नर्सरी से 12वीं तक के विद्यालय बंद

आगरा : आज नर्सरी से 12वीं तक के विद्यालय बंद