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Sunday, September 20, 2020

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO और 2 शिक्षक सस्पेंड किए

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO समेत 2 शिक्षक सस्पेंड किए


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड किया.


आगरा. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने शनिवार को आगरा मंडल समीक्षा बैठक में बीईओ सहित तीन को सस्पेंड कर दिया. शनिवार को हुई इस मीटिंग में जनप्रतिनिधि और अन्य लोगों की शिकायत करने पर बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने इस मामले की जांच करने के आदेश दिए.


आगरा के सर्किट हाउस में हुई इस मीटिंग में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने आगरा मंडल के सभी जनपदों में यूनिफॉर्म वितरण और दूसरी योजनाओं की समीक्षा की. इस मीटिंग में लोगों की शिकायत करने पर खंड शिक्षाधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव और दो शिक्षकों को संस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव के खिलाफ जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की थी. अकोला ओमप्रकाश यादव पर बरौली अहीर का भी अतिरिक्त आभार था.


सतीश द्विवेदी ने कहा कि बरौली अहीर में तैनात दो शिक्षक उमेश यादव और प्रदीप यादव के खिलाफ भी लोगों ने शिकायत की. इन पर शिक्षकों के साथ अभद्रता करने और काम के लिए पैसे मांगने के आरोप थे. तीनों को तत्काल प्रभाव के साथ सस्पेंड कर दिया गया है और मामले की जांच की भी जाएगी.


इस समीक्षा बैठक में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने ऑपरेशन कायाकल्प को आगे बढ़ाने, रिटायर्ड शिक्षकों को समय पर जीपीएफ और पेंशन का भुगतान करने, फर्जी शिक्षकों के खिलाफ जांच और यूनीफॉर्म-किताब वितरण को समय से पूरा करने के निर्देश दिए. इस मीटिंग में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी के बेसिक शिक्षा अधिकारी, लेखा अधिकारी, आगरा मंडल के एडी बेसिक और डाइट प्राचार्य भी मौजूद रहे.

Tuesday, August 4, 2020

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से  घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

 
आगरा: कोरोना काल में काम-धंधे प्रभावित होने से अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और लगातार स्कूलों से फीस माफ कर राहत देने की मांग कर रहे हैं। उनकी यह परेशानी यूं ही नहीं। स्कूल बंद होने से बच्चे घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ जरुर रहे हैं, लेकिन यह पढ़ाई क्लास रूम से भी महंगी पड़ रही है, जिससे अब घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति बनने लगी है।


समस्या सबसे ज्यादा उन परिवारों में है, जहां एक से ज्यादा बच्चे हैं, जो अलग कक्षाओं में हैं। लिहाजा ऑनलाइन कक्षाओं का समय एक ही होने से दो स्मार्ट फोन या लैपटॉप परिवार की जरुरत बन गए हैं क्योंकि ऑफिस और बिजनेस की शुरूआत होने से अभिभावक भी अपने कामों में व्यस्त हैं। हालांकि उन घरों में अभी थोड़ी राहत है, जहां मां गृहणी हैं और स्मार्ट फोन भी रखती हैं।


ऐसे बढ़ गया खर्च: कम से कम एक स्मार्ट फोन या लैपटॉप भी लेना पड़े, तो 10 से 30 हजार रुपये का अतिरिक्त करना पड़ रहा है। साथ में इंटरनेट ब्रॉडबैंड डाटा कनेक्शन या पैक लेना भी जरुरी है, जिसकी कीमत 200 से सात सौ रुपये महीना के बीच है। सिर्फ इतना भर होता तो गनीमत थी। स्कूलों फीस और किताबों का खर्च 25 से 40 हजार के बीच चुकाया है या चुकाना बाकि है, लिहाजा 30 से 40 हजार का अतिरिक्त खर्च सिर पर पड़ने से अभिभावक परेशान हैं।


स्कूल नहीं समझ रहे पीड़ा: अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुले थे, तो उन्होंने बच्चों के भविष्य की खातिर मनमानी फीस देने में कभी आनाकानी नहीं की। हर साल ड्रेस, किताबों, बैग आदि का खर्च अलग करते थे। सालभर में 60 से 80 हजार और एक लाख रुपये तक खर्च करते थे, लेकिन अब कोरोना काल में स्कूल बंद होने और आय प्रभावित होने पर स्कूलों को भी हमारी परेशानी समझनी चाहिए।


केस वन
माईथान निवासी मनोज वर्मा के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 12वीं और बेटा 10वीं है। सिंगल पेरेंट होने के कारण खुद की नौकरी भी देखनी है। स्कूल बंद हुआ, तो ऑनलाइन स्टडी के लिए दोनों बच्चों को लैपटॉप भी दिलाना पड़ा, जिनकी कीमत 60 हजार के करीब थी।


केस टू
दयालबाग निवासी तरुण यादव के दो बेटे हैं, दोनों कॉन्वेंट स्कूल के छात्र हैं, लिहाजा उनकी पढ़ाई के लिए लैपटॉप लेना पड़ा क्योंकि फोन से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता था। साथ ही उन्हें अपने काम पर जाना था। लिहाजा इस तरह 80 हजार खर्चने पड़े, क्योंकि दोनों बेटे की क्लास की टाइमिंग एक ही है।

राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

 
आगरा : राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन करने की मंगलवार को अंतिम तिथि है, लिहाजा आवेदन के इच्छुक शिक्षक चार अगस्त को रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि इसकी अंतिम तिथि पहले 30 जुलाई तय की गई थी, लेकिन आवेदन बेहद कम रहने पर शासन ने इसे बढ़ा दिया था।


डीआइओएस रवींद्र सिंह ने बताया कि राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए जिले के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षकों के पास अब भी आखिरी मौका है, वह मंगलवार रात 12 बजे तक सभी प्रपत्रों और औपचारिकताएं पूरी कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल की बात की जाए, तो जिले में अब तक राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 30 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 18 शिक्षकों ने आवेदन किए हैं।

यह होगी प्रक्रिया

अंतिम तिथि पूरी होने के बाद पांच अगस्त को जिला समिति आवेदनों का परीक्षण व स्थलीय सत्यापन कर पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और मंडलीय समिति को प्रस्ताव भेजेगी। मंडलीय समिति अध्यापक पुरस्कार के लिए 14 से 20 अगस्त के बीच, जबकि मुख्यमंत्री पुरस्कार के लिए पांच से 17 अगस्त के बीच पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और राज्य चयन समिति के सदस्य सचिव व शिक्षा निदेशक को प्रस्ताव उपलब्ध कराएगी। इसके बाद शासन स्तर से उनकी घोषणा की जाएगी।

Monday, August 3, 2020

फंदे पर लटकता मिला शिक्षामित्र का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

फंदे पर लटकता मिला शिक्षामित्र का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच में जुटी पुलिस
 

आगरा : बाह क्षेत्र में चित्राहाट के नगला सुरई गांव में रविवार की सुबह शिक्षामित्र सत्यवान सिंह (42) का शव घर के कमरे में फंदे से लटकता मिला। कमरे का दरवाजा खुला था। साथियों का मानना है कि शिक्षक पद से समायोजन निरस्त होने के अवसाद में यह आत्मघाती कदम उठाया है। हालांकि परिजनों ने हत्या का अंदेशा भी जताया है। शिक्षामित्र संघ से जुड़े लोगों ने सरकार से परिवार की आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। 


चित्राहाट के नगला सुरई गांव निवासी सत्यवान पुत्र साहब सिंह पारना गांव के प्राइमरी स्कूल में शिक्षामित्र थे। साथी शिक्षामित्रों और परिजनों ने बताया कि सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने के बाद से सत्यवान गुमशुम रहने लगे थे।
शनिवार की रात खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने चले गए थे। रविवार की सुबह फंदे पर शव लटका मिला। कमरे का दरवाजा खुला देख घरवाले हत्या की आशंका जता रहे हैं। सूचना पर पहुंची चित्राहाट पुलिस ने छानबीन करने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।   


एसओ चित्राहाट ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार कार्रवाई की जाएगी। वहीं शिक्षामित्र संगठन के अजय भदौरिया, शैलेंद्र भदौरिया, अनिल शर्मा, पंकज बौहरे , पीतम गुर्जर, नेवर सिंह आदि ने सरकार से परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की गुहार लगाई है।


पत्नी भी है शिक्षामित्र, मायके गई थी 
मृतक शिक्षामित्र सत्यवान की पत्नी ऊषा देवी भी नगला सुरई के प्राइमरी स्कूल में शिक्षामित्र है। उनके दो बच्चे अभिनव (12), गीतांजलि (7) वर्ष हैं। दो दिन पहले ही सत्यवान ऊषा देवी को रक्षाबंधन पर मायके इटावा गई थी। सत्यवान खुद छोड़ने गए थे। मौत की खबर लगते ही वह रोते-बिलखते घर लौटी।  

Sunday, August 2, 2020

नवोदय में प्रवेश के लिए हुआ फर्जीवाड़ा, जांच में खुला सारा खेल

Fraud in Entrance: नवोदय में प्रवेश के लिए हुआ फर्जीवाड़ा, जांच में खुला सारा खेल


 विद्यालय की जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल। प्रवेश निरस्त करने के लिए मांगी बीएसए से अनुमति। ...


आगरा । जवाहर नवोदय विद्यालय कौलारा कलां में कक्षा छह के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में सेंधमारी हुई है। स्कूली शिक्षकों की जांच कमेटी ने ऐसे 10 अभ्यर्थियों को चिन्हित किया है, जो पिछले साल भी इसी कक्षा के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन सफल नहीं हो पाए। इस साल सफल होने उन्हें प्रवेश मिल गया, लेकिन डाटा वैरिफाई में रिकॉर्ड पकड़ा गया। स्कूल ने मामले में बीएसए से प्रवेश निरस्त करने की अनुमति मांगी है।


दरअसल 20 जून को सीबीएसई बोर्ड ने 80 चयनीत अभ्यर्थियों की सूची भेजी, विद्यालय प्रबंध कमेटी और एसडीएम फतेहाबाद को भेजी, सभी अभ्यर्थियों को प्रवेश के लिए सूचित किया गया। चयनित अभ्यर्थियों के प्रपत्रों की जांच के लिए विद्यालय स्तर पर एक पांच सदस्यीय कमेटी उप प्राचार्य की अध्यक्षता में गठित हुई। आवेदन पत्रों की जांच हुई, तो पता चला कि 10 अभ्यर्थियों ने दूसरी बार इस प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया है, जबकि नवोदय विद्यालय समिति के नियमानुसार इसमें एक ही बार शामिल हो सकते हैं। कक्षा पांचवीं में भी उन्होंने फर्जी तरीके से दो बार प्रवेश लेकर पढ़ाई की। लिहाजा सभी दस अभ्यर्थियों को स्कूल कमेटी ने अपात्र घोषित करते हुए बीएसए से मामले में कार्यवाही की अनुमित मांगी है।


कोचिंग माफिया पर शक
मामले के पीछे दबी जुवां में स्कूल में प्रवेश का दम भरने वाली कोङ्क्षचग माफिया का हाथ होने की आशंका लग रही है, क्योंकि अभिभावकों को इसके नियमों की ज्यादा जानकारी नहीं, लिहाजा इस दिशा में भी जांच किए जाने की जरुरत है। इसके लिए पर्याप्त साक्ष्य भी हैं, सिर्फ चिन्हित अभ्यर्थियों ने जहां से दोनों बार पांचवीं की है, उनकी जांच करने की जरुरत है कि उन्होंने बिना जानकारी एक ही कक्षा में दूसरी बार प्रवेश कैसे दे दिया।


यह नाम मिले संदिग्ध
- सुमित सौलंकी
- रौनक
- कृष्णा चौहान
- रोहित गुर्जर
- समीर खान
- सचिन कुमार
- पूजा चरग
- नेहालिका धनगर
- अरुण
- अजय

(उक्त अभ्यर्थी वर्ष 2019 और 2020 दोनों साल अछनेरा, शमसाबाद, बिचपुरी, जगनेर, फतेहपुरसीकरी, बरौली अहीर, फतेहाबाद, जैतपुर कलां और नगर क्षेत्र को ब्लॉक दिखाकर भरे गए। कुछ ने दोनों साल अलग-अलग ब्लॉक भी दिखाए।


बीएसए ने बीईओ को सौंपी जांच
बीएसए राजीव कुमार यादव का कहना है कि मामले की जांच खंड शिक्षाधिकारी को सौंपी गई है। वह जांच कर जल्द ही मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।


Thursday, July 30, 2020

आगरा : आगरा विवि के फर्जी घोषित करने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र वाले 171 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ

आगरा : आगरा विवि के फर्जी घोषित करने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र वाले 171 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ 


आगरा। जिले के परिषदीय प्राथमिक और उप प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत और एसआईटी की सूची में शामिल 171 और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से अपना पक्ष रखने वाले 12 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किए जाने से बेसिक शिक्षा विभाग का काम आसान हो गया है। अब सूची प्राप्त होने का इंतजार है। बेसिक शिक्षा विभाग ने विवि के बीएड सत्र 2004-05 को एसआईटी की ओर से तैयार फर्जी एवं टेम्पर्ड प्रमाण पत्रों की सूची से जिले में 249 शिक्षकों को चिह्नित किया था।


इसमें से 195 का नाम फर्जी प्रमाणपत्र और फर्जी घोषित किए सूची में शामिल गए 812 अभ्यर्थियों की सूची में नाम प्रशासन ने सात होने की उम्मीद 54 का नाम टेपर्ड प्रमाणपत्रों की फरवरी 2020 को एसआईटी की सूची में शामिल 2823 अभ्यर्थियों को फलों घोषित कर दिया इन अभ्यर्थियों में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ललित 195 में से 24 शिक्षकों के नाम थे। इनको बर्खास्त कर दिया गया है। का 171 अभ्यर्थियों का वेतन रोका गया है। इनके खिलाफ खस्तगी की कार्रवाई के लिए विवि में अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों पर निर्णय लिए जाने का इंतजार किया जा रहा था। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव ने सूची के लिए विवि के अधिकारियों से संपर्क भी किया था। इनका कहना है कि सूची मिलने के साथ बाकी चिन्हित शिक्षकों के नाम से मिलान करने के बाद बास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।