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Tuesday, September 22, 2020

UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश, 1 नवंबर से शुरू करें फर्स्ट ईयर की कक्षाएं और 30 नवंबर तक पूरी करें प्रवेश प्रक्रिया

विश्वविद्यालयों में एक नवम्बर से होगी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, सभी छुट्टियों में होगी कटौती।

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के चलते बंद पड़े विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2020-21 के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत एक नवंबर से होगी। स्नातक व स्नातकोत्तर के पहले वर्ष में 31 अक्टूबर तक दाखिले होंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपने दिशा-निर्देश में कहा है कि पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए इस साल की सर्दियों और अगले साल की गर्मी की छुट्टियों और अन्य अवकाश में कटौती की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट किया, पढ़ाई पूरी करने के लिए सप्ताह में छह दिन कक्षाएं चलाने को भी कहा गया है। नया सत्र ऑनलाइन, फेस-टू-फेस क्लासरूम और मिश्रित मोड से चलाया जाएगा। यह कैलेंडर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के तकनीकी कॉलेजों पर भी लागू होगा।


UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश, 1 नवंबर से शुरू करें फर्स्ट ईयर की कक्षाएं और 30 नवंबर तक पूरी करें प्रवेश प्रक्रिया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की शुरुआत करने के लिए निर्देश दिए हैं।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की शुरुआत करने के लिए निर्देश दिए हैं। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि 1 नवंबर से नए सत्र की कक्षाएं शुरू कर दी जाएं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी 30 नवंबर तक प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर लें। बता दें कि यूजीसी द्वारा 29 अप्रैल को जारी वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया था। इसके तहत फर्स्ट ईयर के छात्रों की कक्षाएं 1 सितंबर से शुरू होनी थी और अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित की जानी चाहिए। लेकिन फिर कोविड-19 महामारी के मामले कम नहीं होने की वजह से कैलेंडर को संशोधित करना पड़ा। इसके बाद फिर उच्च शिक्षा नियामक ने सितंबर के अंत तक अंतिम वर्ष की परीक्षा या टर्मिनल सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया।


लेकिन अब संशोधित दिशा निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2020-21 प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए 1 नवंबर से शुरू हो सकता है। हालांकि अगर फर्स्ट ईयर के लिए आयोजित होने वाले एंट्रेंस एग्जाम में देरी होती है तो यह भी संभव है कि फिर नए सत्र की कक्षाएं शुरू करने में देरी हो जाए। मीडिया रिपोट के मुताबिक फिर यह परीक्षाएं 18 नवंबर को शुरू हो सकती हैं। हालांकि अभी इस बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं हैं।

स्टूडेंट्स ध्यान दें कि आयोग ने संशोधित कैलेंडर में आगे यह भी कहा है कि 30 नवंबर तक छात्रों के प्रवेश को रद्द करने पर पूरी फीस वापसी की जाएगी। इसके अलावा आयोग ने प्रवेश प्रक्रिया के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक यूजी और पीजी छात्रों के लिए मेरिट या प्रवेश आधारित प्रवेश अक्टूबर अंत तक पूरा हो जाना चाहिए और शेष खाली सीटों को 30 नवंबर तक भरा जाना चाहिए। बता दें कि इस बार कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से नए सत्र की शुरुआत में देरी हो रही है।

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं8 मार्च से 26 मार्च 2021 तक परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है।


नई दिल्ली :  University Session 2020-21: शिक्षा मंत्री ने देश भर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वायत्तशासी महाविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्री द्वारा अब से कुछ ही देर पहले दी गयी जानकारी के अनुसार, “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कोविड-19 महामारी को देखते हुए वर्ष 2020-21 के लिए अंडर-ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट (कोर्सेस) के छात्रों के लिए एकेडेमिक कैलेंडर के लिए यूजीसी गाइडलाइंस के लिए बनी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए इसे मान्यता दे दी है।“ शिक्षा मंत्री द्वारा साझा किये गये यूजीसी यूजी/पीजी कैलेंडर के अनुसार सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2020 तक पूरी कर लेनी है और पहले सेमेस्टर के फ्रेश बैच के लिए पहले कक्षाओं का आरंभ 1 दिसंबर 2020 से किया जाना है। वहीं, 1 मार्च से 7 मार्च तक एक सप्ताह का प्रिपेरेशन ब्रेक दिया जाएगा और 8 मार्च से 26 मार्च 2021 तक परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है।


यूजीसी यूजी/पीजी एकेडेमिक कैलेंडर 2020-21

दाखिला प्रक्रिया पूरी करने की तिथि – 31 अक्टूबर 2020

पहले सेमेस्टर के फ्रेश बैच के लिए कक्षाओं के आरंभ होने की तिथि - 1 दिसंबर 2020

परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रेक – 1 मार्च 2021 से 7 मार्च 2021

परीक्षाओं के आयोजन की अवधि - 8 मार्च 2021 से 26 मार्च 2021

सेमेस्टर ब्रेक – 27 मार्च से 4 अप्रैल 2021

ईवन सेमेस्टर की कक्षाओं का आरंभ – 5 अप्रैल 2021

परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रेक – 1 अगस्त 2021 से 8 अगस्त 2021

परीक्षाओं के आयोजन की अवधि – 9 अगस्त 2021 से 21 अगस्त 2021

सेमेस्टर ब्रेक – 22 अगस्त 2021 से 29 अगस्त 2021

इस बैच के लिए अगले एकेडेमिक सेशन आरंभ होने की तिथि – 30 अगस्त 2021

एडमिशन कैंसिल कराने या माइग्रेशन में पूरी फीस होगी वापस

शिक्षा मंत्री ने नये शैक्षणिक सत्र के लिए एकेडेमिक कैंलेडर जारी करने के साथ ही साथ कहा, “लॉकडाउन और सम्बन्धित समस्याओं के कारण पैरेंट्स को हुई आर्थिक दिक्कतों को देखते हुए इस सेशन के लिए 30 नवंबर 2020 तक लिए गए दाखिले को रद्द कराने या माइग्रेशन की स्थिति में छात्रों को पूरी फीस वापस की जाएगी।“

शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज

सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज।


राज्य मुख्यालय  : प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराने के आदेश से नया विवाद छिड़ गया है। इस प्रक्रिया से एक तरफ शिक्षकों की जांच लटक गई है तो दूसरी तरफ सत्यापन के लिए जमा होने वाले शुल्क को लेकर फैसला नहीं हो पा रहा है। शिक्षक संगठनों ने यह शुल्क शिक्षकों से ही लिए जाने पर नाराजगी जताई है। शासन ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों तथा राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों से कहा है कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन उन बोर्डों या विश्वविद्यालयों से करा लें, जहां से वे जारी किए गए हैं। 

इससे पहले जिलावार गठित जांच कमेटी ने शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने के साथ-साथ उनके सेवा संबंधी अभिलेखों एवं शैक्षिक अभिलेखों की जांच की थी। अब एक नया विवाद यह शुरू हो गया है कि सत्यापन के लिए शुल्क कौन अदा करेगा? कई विश्वविद्यालय अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए पहले ही शुल्क जमा करा लेते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है कि कुछ महाविद्यालय यह शुल्क शिक्षकों से ही वसूल रहे हैं। संगठन ने लखनऊ के ही एक महाविद्यालय का उदाहरण भी दिया है, जिसने सत्यापन कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर ही डाल दी है। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार यह जांच 31 जुलाई तक पूरी होनी थी लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में यह जांच अब स्थगित कर दी जानी चाहिए।

Friday, September 18, 2020

और आखिर में शिक्षा निदेशालय में नहीं बदले जा सके कर्मियों के पटल

और आखिर में शिक्षा निदेशालय में नहीं बदले जा सके कर्मियों के पटल

 
प्रयागराज : पारदर्शी व निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर शासन का विशेष जोर है। लेकिन, उच्च शिक्षा निदेशालय में शासन के निर्देश लागू नहीं हो पा रहे हैं। यहां के अधिकारी व कर्मचारी अपनी सुविधा के मुताबिक सारा काम करते हैं। पटलों का परिवर्तन न करना उसका प्रमाण है। शासन ने 15 सितंबर 2019 तक सारे पटलों का नए सिरे से गठन करने का निर्देश दिया था। लेकिन, साल भर बाद भी पटल नहीं बदला गया। सारा काम पुराने ढर्रे पर चल रहा है।


● सितंबर 2019 तक हर पटल पर नए की तैनाती का था निर्देश

● डिप्टी सीएम को विधायक ने लिखा था पत्र


उच्च शिक्षा निदेशालय में पेंशन, बजट, पदोन्नति व नियुक्ति सहित 13 पटल हैं। कई पटलों कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक व प्रशासनिक अधिकारी सालों से काम कर रहे हैं। अधिकारियों के करीबी लिपिक भी उनके साथ आठ-10 साल से एक ही जगह पर कार्यरत हैं। इसकी शिकायत निदेशालय में कार्यरत सहायकों ने शासन से किया था। शिकायत में विभिन्न पटलों में धन उगाही होने की शिकायत प्रमुखता से कही गई। इसके बाद शासन ने हर पटल पर काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों का ब्योरा मांग लिया। साथ ही सारे पटल को नए सिरे से गठित करने का निर्देश दिया। लेकिन, उसके अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा का कहना है कि पटल परिवर्तन की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। एक व्यक्ति सारा काम न देखे उसके मद्देनजर बदलाव किए हैं।


उच्च शिक्षा निदेशालय के पटलों की अनियमितता को लेकर सदर बांदा के विधायक प्रकाश द्विवेदी ने उच्च शिक्षा मंत्रलय देख रहे डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की थी। 18 अगस्त को पत्र लिखने के बावजूद उस दिशा में कोई कदम नहीं उठा।

Saturday, September 12, 2020

उच्च शिक्षा : ज्यादा ई-कंटेंट अपलोड पर शिक्षक होंगे पुरस्कृत, विद्यादान के रूप में मनाया जाएगा सितम्बर व अक्टूबर माह

उच्च शिक्षा : ज्यादा ई-कंटेंट अपलोड पर शिक्षक होंगे पुरस्कृत, विद्यादान के रूप में मनाया जाएगा सितम्बर व अक्टूबर माह।

डिजिटल लाइब्रेरी : • पांच सितंबर से पोर्टल क्रियाशील, डिजिटल लाइब्रेरी दिया गया नाम।

ई-कंटेंट पोर्टल पर विवि व कॉलेजों के शिक्षक अपलोड कर रहे


लखनऊ : अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने बताया कि सितंबर व अक्तूबर माह को 'विद्यादान माह' के रूप में मनाए जाने का फैसला किया गया है। इस माह के दौरान उच्च शिक्षा की डिजिटल लाइब्रेरी में अधिक से अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले शिक्षकों और उनकी शिक्षण संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा यह पुरस्कार 6 श्रेणियों में दिया जाएगा।



उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के मार्गदर्शन में नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन का कार्य प्रगति पर है। विभाग ने एनआईसी के सहयोग से रिकार्ड समय (दो माह) में ई-कंटेंट पोर्टल विकसित किया है। इसमें पर सभी राज्य व निजीविश्वविद्यालयों तथा राजकीय, सहायता प्राप्त व निजी महाविद्यालयों के शिक्षकों ने स्वेच्छा से गुणवत्तापरक ई-कन्टेन्ट अपलोड कर रहे हैं। यह पार्ट 5 सितंबर से प्रयोगात्मक रूप से क्रियाशील हो गया है, जो यूपी उच्च शिक्षा डिजिटल लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता है।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा ने बताया कि अधिक से अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित करने को 6 श्रेणियों में शिक्षण संस्थाओं एवं शिक्षक को पुरस्कृत किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस श्रेणी में राज्य और निजी विश्वविद्यालय की कैटेगरी के तहत सबसे अधिक ई कन्टेट अपलोड करने वाले तीन राज्य व निजी विवि, राज्य विवि की कैटेगरी में अपने से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के शिक्षकों को प्रेरित करते हुए उनसे अधिक से अधिक ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले तीन राज्य विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों की कैटेगरी में राजकीय महाविद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में से सबसे अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले 7 महाविद्यालयों तथा नोडल विवि की कैटेगरी में ई-कन्टेन्ट विकसित करने के लिए विषयवार चयनित नोडल विवि में से तीन को पुरस्कृत किया जाएगा। विषयवार कैटेगरी में प्रत्येक विषय में सबसे अधिक-कंटेंट अपलोड करने वाले 2 शिक्षक तथा सभी विषयों की कैटेगरी में पूरे प्रदेश में 10 शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाएगा।


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Friday, September 11, 2020

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

ऑनलाइन पढ़ाई में नहीं होगा खिलवाड़, ई-कंटेंट पोर्टल पर 30 सितंबर तक अपलोड होगा कंटेंट

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

 
लखनऊ : कोरोना महामारी के कारण बंद चल रहे शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को घर बैठे बेहतर ई-कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की है। ई-कंटेंट पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों को घर बैठे हर विषय की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होनी शुरू भी हो गई है।


उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर सितंबर और अक्टूबर महीने में विद्यादान माह मनाया जाएगा। इन दो महीनों में शिक्षकों को विशेष तौर पर अधिक से अधिक ई-कंटेंट उपलब्ध करवने के लिए प्रेरित किया जाएगा। ज्यादा ई-कंटेंट उपलब्ध कराने वाले 10 शिक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग के मुताबिक बीती पांच सितंबर से ई-कंटेंट पोर्टल पर पाठ्य सामग्री उपलब्ध होने लगी है।


विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों के स्नातक व परास्नातक के विद्यार्थी पोर्टल पर क्लिक कर आसानी से किसी भी विषय का ई-कंटेंट हासिल कर सकेंगे। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार किए जा चुके हैं और अब इसे तेजी से अपलोड किया जा रहा है।


लखनऊ : यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई में अब खिलवाड़ नहीं हो पाएगा। कोरोना संक्रमण के चलते बीते मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद शुरू की गई ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आईं थीं। कई शिक्षकों ने ई-कंटेंट के मैटीरियल के तौर विषय की किताब स्कैन कर डाल दी थी, लेकिन अब ई-कंटेंट पोर्टल तैयार किया गया है और स्क्रीनिंग के बाद ही इस पर ई-कंटेंट अपलोड किया जा रहा है। बौद्धिक संपदा अधिकार व कॉपीराइट अधिनियम का पालन करने के लिए शिक्षकों से एक प्रपत्र भी भरवाया जा रहा है। विश्वविद्यालय व कॉलेज स्तर से लेकर उच्च शिक्षा विभाग तक इसकी निगरानी की जा रही है।


उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए ई-कंटेंट पोर्टल  पर स्नातक व परास्नातक कक्षाओं के विषयवार कंटेंट अपलोड करने का काम शुरू हो गया है। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार भी किए जा चुके हैं। स्क्रीनिंग के बाद इन्हें ऑनलाइन किया जा रहा है। 30 सितंबर तक सभी विषयों के ई-कंटेंट को अपलोड करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर साइंस, कॉमर्स व आर्ट्स के अलग-अलग विषयों के ई-कंटेंट तैयार करने के लिए राज्य विश्वविद्यालयों को नोडल विश्वविद्यालय के रूप में चयनित किया गया है। 


विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ व लखनऊ विश्वविद्यालय को ई-कंटेंट तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। इसी तरह कॉमर्स का ई-कंटेंट लखनऊ विश्वविद्यालय व आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय को और मैनेजमेंट के ई-कंटेंट का जिम्मा झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय व बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय को सौंपा गया है।