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Wednesday, November 25, 2020

यूपी : राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण

UP : विश्वविद्यालय व एडेड कॉलेज को इकाई मानकर लागू होगा आरक्षण, अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी


राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण लागू किया जाएगा।


लखनऊ । उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण लागू किया जाएगा। वहीं राजकीय डिग्री कॉलेजों में इसे सभी संस्थाओं को मिलाकर एक इकाई मानकर आरक्षण लागू होगा। अभी तक विभाग स्तर पर शिक्षक के खाली पदों पर आरक्षण लागू होने पर पांच से कम पद होने पर एससी कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए सीट नहीं आरक्षित हो पा रही थी और उन्हें नुकसान हो रहा था। अब ऐसा नहीं होगा।


केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण व्यवस्था में किए गए बदलाव की तर्ज पर प्रदेश में भी इसे लागू किया जा रहा है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के लोगों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में उप्र शैक्षिक संस्थान (शैक्षिक संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश 2020 को मंजूरी दे दी गई। अब राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह लागू हो जाएगा।


वहीं विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में इसके विधेयक को पेशकर इसे मंजूरी दिलाई जाएगी। फिलहाल अब विश्वविद्यालय व एडेड कॉलेज में विभिन्न विभागों में शिक्षकों के जितने पद होंगे उन्हें मिलाकर संस्था स्तर पर कुल पदों पर एक साथ आरक्षण लागू किया जाएगा। फिलहाल यह बदलाव अल्पसंख्यक संस्थाओं, उत्कृष्ट संस्थाओं, अनुसंधान संस्थाओं और राष्ट्रीय व सामरिक महत्व की संस्थाओं में लागू नहीं होगा।


उधर राज्य विश्वविद्यालय सहारनपुर को राजकीय महाविद्यालय पुंवारका की 5.91 एकड़ जमीन, भवन एवं परिसम्पत्तियां देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब इस कॉलेज के शिक्षकों को दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित किया जाएगा। वर्तमान में विभिन्न कोर्सेज में पढ़ रहे विद्यार्थी पूर्व की तरह की अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और उन्हें चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ की ही डिग्री दी जाएगी। नए शैक्षिक सत्र 2021-22 से इस कॉलेज में नए दाखिले नहीं लिए जाएंगे।

Monday, November 23, 2020

विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में आज से लगेंगी कक्षाएं

विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में आज से लगेंगी कक्षाएं


लखनऊ : यूपी के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में सोमवार से कक्षाएं लगेंगी। अभी कक्षाओं में 50 प्रतिशत विद्यार्थी ही बुलाए जाएंगे। ऑनलाइन कक्षाओं का भी विकल्प विद्यार्थियों को दिया जाएगा। अभी तक कैंपस में सिर्फ पीएचडी व परास्नातक (पीजी) साइंस के विद्यार्थियों को ही आने की छूट थी। अब स्नातक (यूजी) के विद्यार्थियों के साथ-साथ पीजी के अन्य संकाय के विद्यार्थियों की भी कक्षाएं शुरू होंगी। उप्र विश्वविद्यालय-महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) ने कोरोना की दूसरी वेब के बीच विश्वविद्यालय व कॉलेज कैंपस खोले जाने का विरोध किया है।



फुपुक्टा के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि शादी समारोह में 200 की बजाए 100 लोगों की सीमा तय की जा रही है। विवि कैंपस में भीड़भाड़ बढ़ाकर कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए दावत दी जा रही है। अगर संक्रमण बढ़ा और कोई हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। जब ज्यादा सावधानी बरतने का समय है तो लापरवाही बरती जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से बीती 17 नवंबर को ही विश्वविद्यालय व कॉलेज कैंपस में कक्षाएं शुरू करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई थी। कैंपस में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा और कोई भी विद्यार्थी अगर कैंपस में थूकते हुए पकड़ा गया तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

Sunday, November 22, 2020

एक से अधिक संस्थानों में काम नहीं कर सकते शिक्षक : AICTE

एक से अधिक संस्थानों में काम नहीं कर सकते शिक्षक : AICTE


नई दिल्ली। उच्च शिक्षण संस्थान अपने किसी शिक्षक से एक से अधिक संस्थानों में सेवा नहीं ले सकता। यदि कोई संस्थान ऐसा करता पाया जाता है तो फिर उसकी मान्यता रद्द करने से लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने राज्यों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों को नियमों का उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सभी राज्य सरकारों, तकनीकी विश्वविद्यालय, राज्यपाल को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। 

राज्यों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्र, उल्लंघन पर मान्यता रद्द व अनुशासनात्मक कार्रवाई


एआईसीटीई का मानना है कि तकनीकी उच्च शिक्षण संस्थान पैसा बचाने के मकसद से शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता कर रहे है। कई संस्थान एक शिक्षक से अपने दो से अधिक कैंपस में सेवाएं ले रहे हैं । जबकि एक शिक्षक सिर्फ एक कैंपस में सेवाएं दे सकता है। छात्रों और शिक्षकों से ऐसी जानकारी मिलने पर लिखित शिकायत भेजने का आग्रह किया है। आईसीटीई भी तकनीकी संस्थानों में औचक निरीक्षण करेगा।

Friday, November 20, 2020

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी


उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को परखने के लिए आने वाले दिनों में अब क्यूएस (क्वाकरेल्ली सायमोंड्स) और टाइम्स जैसी रैकिंग का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। देश में इसी तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों के विश्वस्तरीय रैकिंग की एक नई और भरोसेमंद व्यवस्था बनेगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि, इसके आकलन का फामरूला भारतीय शिक्षा पद्धति के मापदंडों के अनुरूप होगा। वैसे भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक रैकिंग के लिए क्यूएस और टाइम्स जैसी दो ही एजेंसियां हैं। दोनों ही बिटिश मूल की हैं।


क्यूएस और टाइम्स जैसी रैकिंग करने वाली एजेंसियों पर ‘धारणा’ के आधार पर भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों का आकलन करने का आरोप लगाया गया था। ये आरोप कोई और नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्रलय और उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर से लगाए गए थे। यही वजह थी कि 2020 की टाइम्स रैकिंग में आइआइटी बांबे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर और खड़गपुर जैसे देश के सात प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों ने विरोध स्वरूप इस रैकिंग में शामिल होने से इन्कार कर दिया।



जेएनयू में चार वर्ष का होगा स्नातक पाठ्यक्रम!

नई दिल्ली : जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय स्नातक पाठयक्रम की समयावधि चार वर्ष करने पर बढ़ रहा है। गुरुवार को विवि की अकादमिक परिषद की बैठक में चर्चा हुई। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए कमेटी गठित करने व स्नातकोत्तर की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराने पर मंथन हुआ।

Thursday, November 19, 2020

डिग्री कॉलेजों को ऑनलाइन संबद्धता 15 अप्रैल तक, नए सत्र की समय-सारिणी जारी

डिग्री कॉलेजों को ऑनलाइन संबद्धता 15 अप्रैल तक, नए सत्र की समय-सारिणी जारी
 

सूबे के डिग्री कॉलेजों को नए शैक्षिक सत्र 2021-22 में ऑनलाइन संबद्धता दी जाएगी। यह पहला मौका है जब नए डिग्री कॉलेज खोलने, स्नातक व परास्नातक के नए कोर्स शुरू करने और कोर्सेज की सीट बढ़ाने के लिए ऑनलाइन संबद्धता दी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने बुधवार को नए सत्र में संबद्धता के लिए समय-सारिणी घोषित कर दी है।


उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग के अनुसार एनआइसी द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर की मदद से ऑनलाइन संबद्धता की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नए कोर्स शुरू करने की एनओसी हासिल करने के लिए डिग्री कॉलेज 31 दिसंबर तक विश्वविद्यालय के समक्ष आवेदन कर सकेंगे। ऐसे कॉलेज जो सारी अर्हताएं पूरी करते हैं, वे एनओसी व संबद्धता के लिए एक साथ आवेदन कर सकेंगे। जमा भूमि के अभिलेखों की राजस्व विभाग द्वारा 31 जनवरी तक जांच होगी। 

अभिलेख सही होने पर ऑनलाइन एनओसी जारी होगी। फिर संस्थान 25 फरवरी तक संबद्धता के लिए निरीक्षण मंडल गठित करने के लिए आवेदन करेंगे। विश्वविद्यालय पांच मार्च तक निरीक्षण मंडल का गठन करेंगे। निरीक्षण मंडल 30 मार्च तक अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को देंगे। विवि रिपोर्ट के आधार पर 15 अप्रैल तक विवि डिग्री कॉलेजों को ऑनलाइन संबद्धता दे सकेंगे।

Wednesday, November 18, 2020

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF - National Research Foundation) के गठन की तैयारी पूरी, उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध में हाथ बंटाना होगा जरूरी

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF - National Research Foundation) के गठन की तैयारी पूरी,  उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध में हाथ बंटाना होगा जरूरी


नई दिल्ली : शोध को बढ़ावा देने के साथ उसकी गुणवत्ता को भी बेहतर रखने के लिए प्रस्तावित नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) के गठन की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। नीति आयोग सहित शोध से जुड़े सभी मंत्रलयों, उच्च शिक्षण संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ लंबी चर्चा के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय ने इससे जुड़े मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है। ऐसे में इसे अब कभी भी कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए अब शोध कार्यो में हाथ बंटाना जरूरी होगा। इनमें सरकारी और निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालय भी शामिल होंगे।


मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक यह स्वतंत्र संस्था होगी। जिसके पास आयोग जैसा अधिकार होगा। साथ ही इसका संचालन एक बोर्ड आफ गवर्नर्स करेगा। जिसका कार्यकाल तय होगा। यह फाउंडेशन उद्योगों के साथ तालमेल भी रखेगा। उनकी जरूरतों को उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाएगा, ताकि शोध कार्यो को तेज कर सके। फाउंडेशन सभी शोध व उच्च शिक्षण संस्थानों में चल रहे शोधों पर भी नजर रखेगा। बेहतर और उपयोगी शोधों को और बढ़ाने को उन्हें वित्तीय मदद देगा। इसके तहत फाउंडेशन का एक अलग फंड होगा। एनआरएफ के गठन के स्वरूप पर काम कर रहे शिक्षा मंत्रलय के अधिकारियों के मुताबिक फाउंडेशन के स्वरूप को तैयार करने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सुझावों को भी ध्यान में रखा गया है। वैसे तो इस फाउंडेशन के गठन की घोषणा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में जुलाई 2019 में कर दी थी, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर चल रहे कार्यो को देखते हुए इसे ठंडे बस्ते में रखा गया था।