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Friday, July 3, 2020

उच्च शिक्षा : छात्रों की प्रोन्नति फॉर्मूले पर मंथन, अधिकारी कोई सर्वमान्य तरीका तलाशने में जुटे


लखनऊ| प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं निरस्त कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने के मामले में गुरुवार को कोई शासनादेश जारी नहीं हो का।वार्षिक और सेमेस्टर प्रणाली वाले पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को परीक्षाएं कराए बगैर अगली कक्षाओं और अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत करने का फॉर्मूला बनाने पर मंथन जारी है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई सर्वमान्य तरीका तलाशने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके सरकारी आवास पर हुई बैठक में ही परीक्षाएं निरस्त करने का फैसला ले लिया गया था। परीक्षाओं के संबंध में गठित चार कुलपतियों की कमेटी ने परीक्षाएं निरस्त कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने की सिफारिश की थी। बैठक में यह भी तय किया गया था कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइड लाइन देखने के बाद छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने का फॉर्मूला तय किया जाएगा। कुलपतियों की कमेटी ने वार्षिक व सेमेस्टर प्रणाली के तहत होने वाली परीक्षाओं के संबंध में अपनी स्पष्ट राय दी है।

ये हो सकता है फॉर्मूला

सूत्रों के अनुसार आंतरिक मूल्यांकन और पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर पदोन्नति करने का फैसला लिया जा सकता है। हालांकि एक पेच यह भी है कि कुछ राज्य विवि में कई प्रश्नपत्रों की परीक्षाएं हो चुकी हैं। ऐसे में एक प्रस्ताव यह भी है कि जिन प्रश्नपत्रों की परीक्षा हो चुकी है, उनका मूल्यांकन करा लिया जाए। फिर कोरोना को देखते हुए मूल्यांकन भी आसान नहीं है। खुद शिक्षक ही विरोध कर रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में केवल पिछली कक्षा या सेमेस्टर में प्राप्त अंकों के आधार पर ही अंक देकर अगली कक्षा या सेमेस्टर में प्रोन्नत करना होगा। अंतिम वर्ष के छात्रों को पिछले दो वर्षों की परीक्षा में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर अंक दिए जा सकते हैं।

Thursday, July 2, 2020

विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी


विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी

विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी, जानें क्‍या हो रहा है बदलाव

केंद्र सरकार ने चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है।...


नई दिल्ली। कोरोना संकट की चुनौतियों के बीच कुछ नई उम्मीदें भी जगी है। इनमें ही उच्च शिक्षा के लिए हर साल विदेशों को होने वाला पलायन भी है। जिसे पिछले कई सालों से चाहकर भी सरकार नहीं रोक पा रही है, लेकिन कोरोना काल ने इसकी राह आसान की है। सरकार भी इस मौके का फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई है। इसके तहत चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है। साथ ही इसे लेकर नए-नए कोर्स शुरू करने से लेकर आकर्षक पैकेज तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। 


चालू शैक्षणिक सत्र में करीब एक लाख छात्रों को रोकने का लक्ष्य
मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश से हर साल करीब सात लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में जाते है। जहां पढ़ाई पर हर साल वह करीब एक लाख करोड़ खर्च करते है। वहीं पढ़ाई के बाद इनमें से ज्यादा छात्र वहीं जॉब भी हासिल कर लेते है। ऐसे में उनकी प्रतिभा का पूरा फायदा दूसरे देश को मिलता है। इसके चलते देश को प्रतिभा और पैसे दोनों ही मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ता है। कोरोना संकटकाल में मंत्रालय के भीतर इन छात्रों को रोकने की कवायद तब जोर पकड़ी, जब विदेशों में पढ़ाई की योजना बनाए बैठे छात्रों और उनके अभिभावकों ने मंत्रालय से संपर्क कर देश में ही बेहतर पाठ्यक्रम और मौके उपलब्ध कराने की मांग की। 


नए पैकेज को घोषित कर सकती है सरकार 
सूत्रों की मानें तो मंत्रालय ने इसके बाद तुंरत ही सकारात्मक रूख दिखाते हुए जेईई मेंस और नीट जैसी परीक्षा के आवेदन की समयसीमा को बढाया था। जिसके बाद डेढ़ लाख से ज्यादा छात्रों के नए आवेदन आए हैं। माना जा रहा है कि यह सारे ऐसे ही छात्र है, जो विदेशों के बजाय अब देश में पढ़ना चाहते है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में सरकार विदेशों में पढ़ाई के लिए कराए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द कराने वाले छात्रों को लेकर कुछ और नए पैकेज भी घोषित कर सकती है।

उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक, समिति की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय

उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, आज मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय


कोरोना संक्रमण के चलते राज्य विश्वविद्यालयों में नहीं होंगी परीक्षाएं


लखनऊ। प्रदेश विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के विद्यार्थियों को उनके पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के औसत अंक के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के आयोजन के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी है। समिति की रिपोर्ट पर बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति लेकर निर्णय किया जाएगा। 


कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं होगी। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए गठित समिति ने स्नातक तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम और द्वितीय वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक, द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक देकर प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। इसी प्रकार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को इस वर्ष केवल प्रोन्नत करने का सुझाव हैं, उनके प्रथम वर्ष के अंकों का निर्धारण अगले वर्ष द्वितीय वर्ष की परीक्षा में मिले अंकों के औसत से किया जाए। 


समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन विषयों की अनुसार वास्तविक प्राप्तांक दिए परीक्षाएं लॉकडाउन से पहले हो गई थीं, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं जाएं। समिति ने अन्य प्रदेशों में औसत अंक देकर विद्यार्थियों को का मूल्यांकन हो गया तो विद्यार्थियों पदोन्नति देने का उदाहरण भी प्रस्तुत को उस विषय में उनकी मेहनत के किया है।


48 लाख विद्यार्थियों पर होगा असर 
समिति ने पूर्व में शासन को दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से करा पाना संभव नहीं है। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा रहेगा। समिति ने दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर यूपी में भी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं कराने और विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का फार्मूला भी दिया है। 


प्रदेश में 18 राज्य विश्वविद्यालय, 27 निजी विश्वविद्यालय, 169 राजकीय महाविद्यालय, 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालय, 6531 वित्तविहीन महाविद्यालयों में करीब 48 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस मामले में उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने समिति के अध्यक्ष प्रो. तनेजा से सभी विश्वविद्यालयों की स्थिति के अनुसार प्रोन्नत करने का सुझाव मांगा था।


MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम

MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम


नई दिल्ली। सरकार ने सभी शिक्षण संस्थान को 31 जुलाई तक बंद रखने का फैसला लिया है। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने अनलॉक-2 आदेश के तहत सभी राज्यों, यूजीसी, एआईसीटीई, एनटीए सहित सभी अधीनस्थ विभागों को पत्र लिखा है। इसके तहत इस अवधि में ऑनलाइन क्लास होगी। इसके अलावा शोधकर्ता, शिक्षक व कर्मी घर से काम करेंगे। 



घर से काम करने वाले एडहॉक शिक्षकों और अन्य कर्मियों को ड्यूटी पर माना जाएगा। अमित खरे ने लिखा है कि संस्थान बंद रहने के कारण स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय ऑनलाइन क्लास लेते रहेंगे। अन्य गाइडलाइन पूर्ववत रहेंगी। नियम का पालन करते हुए सभी छात्रों और शिक्षकों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना होगा

Tuesday, June 30, 2020

उच्च शिक्षा : विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में नहीं होंगी परीक्षाएं, प्रोन्नत होंगे छात्र, 48 लाख विद्यार्थी प्रमोट होंगे!

विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में नहीं होंगी परीक्षाएं, प्रोन्नत होंगे छात्र

नहीं होंगी विवि की परीक्षाएं 48 लाख विद्यार्थी प्रमोट होंगे!

7026 डिग्री कॉलेज हैं सरकारी और प्राइवेट मिलाकर

लखनऊ : प्रदेश के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में स्नातक व परास्नातक की परीक्षाएं नहीं होंगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने परीक्षाएं न कराने की संस्तुति की है। करीब 48 लाख से अधिक विद्याíथयों को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाएगा।


उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कमेटी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है। हालांकि औपचारिक घोषणा दो जुलाई को की जाएगी।




उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच परीक्षाएं कराना जोखिम भरा हो सकता है। मालूम हो कि मार्च में हुए लॉकडाउन के चलते कई विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं, कुछ में शुरू हुईं तो आधी परीक्षाएं हो पाईं। जुलाई में परीक्षाएं कराने के लिए परीक्षा कार्यक्रम घोषित किए गए तो विरोध शुरू हो गया। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की रिपोर्ट को देखते हुए अब प्रोन्नति पिछली कक्षा में मिले अंक के आधार पर दी जाए या सभी विषयों में मिले अंक में से जिस विषय में ज्यादा अंक मिले हैं उसे आधार मानकर रिजल्ट तैयार किया जाए, इन सब पर मंथन किया जा रहा है।

’ उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित कमेटी ने की संस्तुति

’ प्रोन्नति के फार्मूले पर मंथन, दो जुलाई को होगी औपचारिक घोषणा

राज्य विवि, एक मुक्त विवि, एक डीम्ड विवि और 27 निजी विवि हैं प्रदेश में

डॉ. दिनेश शर्मा ’ जागरण आर्काइव

सभी संभावनाओं को टटोला जा रहा है। कमेटी की रिपोर्ट पर भी मंथन किया जा रहा है। दो जुलाई को इस पर अंतिम निर्णय लेकर औपचारिक घोषणा की जाएगी।

डॉ. दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री




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Monday, June 29, 2020

उच्च शिक्षा : जांच कमेटी के विरोध में उतरे शिक्षक, आदेश अपमानजनक और संविधान विरोधीः लुआक्टा


लखनऊ।  प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों के भौतिक सत्यापन और उनके शैक्षणिक अभिलेखों की जांच के लिए कमेटी गठित करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षक इस आदेश को अपमानजनक मान रहे हैं। शिक्षक संगठन कानूनी लड़ाई लड़ने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। बहस का विषय बना है मुद्दा ः शासन ने सभी जिलों में जिलाधिकारी की तरफ से नामित अपर जिलाधिकारी (डीएम) को कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। इसी तरह स्थलीय जांच के लिए जिलों में गठित होने वाली दो अलग-अलग उप समितियां में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को अध्यक्ष बनाया गया है। शासन के उच्च शिक्षा विभाग का यह आदेश जारी होते ही शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त हो गई। विश्वविद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर बने शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में यह विषय बहस का मुद्दा बना हुआ है। उनका कहना है कि इस आदेश से तो कुलपतियों की भी जांच एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी, क्योंकि कुलपति भी किसी न किसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं। इसी तरह विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति, कोषाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष तक की जांच भी एसडीएम करेंगे। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि जांच का यह आदेश पूरी तरह अनुचित है। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. विनीत वर्मा ने भी कहा कि इस मुद्दे पर शिक्षकों में काफी नाराजगी है। शिक्षकों की भावनाओं के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।

आदेश अपमानजनक और संविधान विरोधी लुआक्टा :- लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने कहा कि यह आदेश अपमानजनक होने के साथ-साथ संविधान विरोधी भी है। संविधान के अनुच्छेद 311 (डॉक्ट्रिन आफ प्लेजर) में में प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति की जांच उससे नीचे की रैंक वाला अफसर नहीं कर सकता है। जांच कमेटी के अध्यक्ष व सदस्यों का वेतनमान प्रोफेसरों से कम है। शासन ने अपना आदेश संशोधित नहीं किया तो संगठन कानूनी लड़ाई लड़ेगा। शिक्षकों को जांच से कोई इनकार नहीं है लेकिन जांच प्रक्रिया संविधान सम्मत होनी चाहिए।