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Tuesday, August 11, 2020

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं तो डिग्री मान्य नहीं, UGC ने परीक्षाएं नहीं कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में बताया गलत

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं तो डिग्री मान्य नहीं, UGC ने परीक्षाएं नहीं कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में बताया गलत

 
नई दिल्ली : राज्य विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद करने के दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार के फैसले को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुप्रीम कोर्ट में गलत बताते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया है। साथ ही कहा है कि यदि छात्रों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं कराई गईं तो उनकी डिग्रियों को मान्यता नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी का पक्ष सुनने के बाद मामले की सुनवाई 14 अगस्त तक के लिए टाल दी।


यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट से यह जानकारी भी साझा की कि देश के ज्यादातर विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को तैयार हैं। साथ ही बताया कि बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं करा भी चुके हैं। ऐसे में यदि कोई राज्य परीक्षाएं नहीं कराता है तो इससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। यूजीसी ने कहा कि कोरोना संक्रमण की स्थिति के मद्देनजर विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर तुषार मेहता ने कहा कि यूजीसी के नियमों में राज्य बदलाव नहीं कर सकते क्योंकि डिग्री प्रदान करने के लिए नियम निर्धारित करने का अधिकार सिर्फ यूजीसी को है। शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के छह जुलाई के दिशानिर्देश को चुनौती दी गई है। तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को दिल्ली और महाराष्ट्र के फैसले की सूचना देते हुए कहा कि उनके हलफनामों पर यूजीसी अपना जवाब दाखिल करेगा। वहीं, कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने दावा किया कि छह जुलाई के दिशानिर्देश न तो कानूनी तौर पर और न ही संवैधानिक तौर पर वैध हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को उक्त याचिकाओं पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया था।

Saturday, August 1, 2020

कंपार्टमेंट परीक्षा पर सात दिन में फैसला ले सीबीएसई - सुप्रीम कोर्ट

कंपार्टमेंट परीक्षा पर सात दिन में फैसला ले सीबीएसई - सुप्रीम कोर्ट



सीबीएसई को 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर सात दिन के अंदर जवाब देना होगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर के आरएसपुरम निवासी अधिवक्ता शक्ति पांडय की जनहित याचिका पर सुनाया है।


कोर्ट ने कहा है कि रिप्रेजंटशन के माध्यम से अभिभावक अपनी समस्याएं विस्तार से बताएं, जिन पर सीबीएसई सात दिन के अंदर निर्णय ले। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शक्ति पांडेय ने बताया कि इस साल सीबीएसई बोर्ड में दो लाख 10 हजार परीक्षार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षा होनी है। चार हजार परीक्षार्थियों ने अपना समूह बनाकर इसका विरोध करने के साथ उनसे संपर्क किया। उन्होंने 28 जुलाई को जनहित याचिका दायर करके कोर्ट से यह निवेदन किया था कि जिन परीक्षार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षा होनी है, उन्हें अगली कक्षा में प्रोविजनल प्रवेश दे दिया जाए।

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षा पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

UGC ने छात्रों को मामला सुप्रीम कोर्ट में रहने के चलते मुगालते में न रहने की दी सलाह, परीक्षा के लिए रहें तैयार



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 30 सितंबर से पहले अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस मुद॒दे पर 10 अगस्त की सुनवाई से पहले पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। उधर, यूजीसी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि विद्यार्थी इस मुगालते में न रहें कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो परीक्षा नहीं होगी, वे अपनी पढ़ाई जारी रखें। 


जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने शुक्रवार को परीक्कीषा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। साथ हो, महाराष्ट्र सरकार के बकील को राज्य आपदा प्रबंधन समिति द्वारा पारित 19 जुन के आदेश को रिकॉर्ड पर लाने को कहा। महाराष्ट्र सरकार परीक्षा नहीं कराना चाहती है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने कहा, असम और बिहार में भयंकर बाढ़ है। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने के फैसले को रदूद करना चाहिए। 


यूजीसी ने बृहस्पतिवार को कोर्ट में अंतिम वर्ष को परीक्षा कराने के निर्णय को वाजिब बताते हुए कहा था कि तमाम पहलुओं पर गौर करने व उनके बीच संतुलन बनाते डर परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। इसलिए अंतिम वर्ष की परीक्षा के संबंध में छह जुलाई के दिशा-निर्देशों में बदलाव नहीं किया जाएगा।


कोरोना के बीच सितंबर में होने वाली अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षाओं पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया है। परीक्षाएं रद करने की मांग वाली याचिकाओं पर कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश देने से इन्कार करते हुए केंद्र से इस मुद्दे पर गृह मंत्रलय का रुख स्पष्ट करने को कहा है।


सुनवाई के दौरान यूजीसी ने शीर्ष अदालत से कहा कि किसी को यह नहीं मान लेना चाहिए कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर विचार कर रहा है, इसलिए अंतिम वर्ष/सेमेस्टर परीक्षा पर रोक रहेगी। जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने एक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में कहा कि वह इस मुद्दे पर कोई आदेश नहीं दे रही है। अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। इस पीठ में जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और एम.आर. शाह भी शामिल थे। केंद्र और यूजीसी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे गृह मंत्रलय के रुख के बारे में कोर्ट को अवगत कराएंगे।

Tuesday, July 28, 2020

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने पर यूजीसी से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने पर यूजीसी से मांगा जवाब
 

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों और कालेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यूजीसी से तीन दिन में जवाब मांगा है। कोर्ट मामले पर 31 जुलाई को फिर सुनवाई करेगा।


न्यायमूर्ति अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया कि वे याचिकाओं की प्रति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और यूजीसी के वकील को दें। कोर्ट ने यूजीसी को तीन दिन में याचिका का जवाब देने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता कोई प्रतिउत्तर दाखिल करना चाहते हैं तो अगली सुनवाई 31 जुलाई से पहले दाखिल कर दें। कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हैं जिसमें कालेजों और विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के 6 जुलाई के आदेश को चुनौती दी गई है। 


याचिका में कोरोना के अलावा बिहार व असम में बाढ़ के कारण छात्रों को होने वाली परेशानी का भी मुद्दा उठाया गया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि करीब 390 विश्वविद्यालय परीक्षाएं कराने की प्रक्रिया में हैं।

Friday, July 10, 2020

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब
   
याचिका में लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग कोर्ट से की गई थी.


नई दिल्ली: सुप्रीमकोर्ट (Supreme Court) ने लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस (School Fees) माफ करने और रेगुलेटरी तंत्र बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य की स्थिति अलग होती है. याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कोर्ट ने कहा है. 


बताते चलें कि 8 राज्यों के अभिभावकों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग की थी. शुक्रवार को कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है.  


अभिभावकों ने अपनी याचिका में फीस न देने के कारण बच्चों को स्कूल से न निकाला जाए जैसी मांग भी कोर्ट से की थी. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते हुए राष्ट्रव्यापी लाॉकडाउन जारी है. ऐसे में रोजगार बंद होने से बहुत से अभिभावक फीस देने में असमर्थ हो गए हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अनलॉक 2 की घोषणा करते हुए जारी बंदिशों में कुछ छूट दी है. लेकिन अभी-भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां कोरोना ने तांडव मचा रखा है. जिसके मद्देनजर राज्य सरकार को वापस लॉकडाउन की घोषणा की है.

Tuesday, June 23, 2020

परीक्षाओं को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंची गेंद, CBSE ने शीर्ष अदालत को भेजा जवाब


परीक्षाओं को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंची गेंद, CBSE ने शीर्ष अदालत को भेजा जवाब



सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की लंबित परीक्षाओं को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होनी है। ...


नई दिल्ली । सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की लंबित परीक्षाओं को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है... जहां मंगलवार को इसे लेकर सुनवाई होनी है। हालांकि, मंत्रालय के रूख से साफ है कि वह कोरोना संक्रमण की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षाएं कराने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है। बावजूद इसके वह परीक्षाओं को लेकर की गई तैयारियों से भी कोर्ट को अवगत कराना चाहता है। यही वजह है कि कोर्ट को भेजे जवाब में परीक्षाएं स्थगित करने सहित उसे कराने से जुड़ी तैयारियों का पूरा ब्यौरा भी शीर्ष अदालत को दिया है।


ट्वीटर पर नो एक्जाम ने किया ट्रेंड

इस ब्‍यौरे में सुरक्षा मानकों के तहत सेल्फ सेंटर सहित ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाने जैसी तैयारियां शामिल हैं। इस बीच पूरे दिन भर ट्वीटर पर नो एक्जाम इन कोविड हैसटैग पहले नंबर पर ट्रेंड करता रहा जिसमें बड़ी संख्या में लोग परीक्षाओं को न कराने की मांग कर रहे थे। हालांकि इस बीच मंत्रालय ने साफ किया है कि जो भी फैसला होगा वह छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही होगा। वहीं मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो परीक्षाएं अब नहीं होगी। सभी बच्चों को प्री-बोर्ड या फिर आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक देकर प्रमोट कर दिया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाली गेंद

हालांकि जो छात्र परीक्षाओं के होने पर इससे ज्यादा नंबर लाने की उम्मीद में है उन्हें बाद में अंक सुधार के तहत परीक्षा का मौका दिया जाएगा जिनकी तारीखों का ऐलान संक्रमण की स्थिति के सामान्य होने के बाद किया जाएगा। हालांकि मंत्रालय या सीबीएसई इस पर अपनी ओर से कोई निर्णय लेने के बजाय इस फैसले का ऐलान सुप्रीम कोर्ट के हवाले के कराना चाहती है। ताकि बाद में विवाद की कोई स्थिति ना बननी पाए। मालूम हो कि सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बची परीक्षाएं एक से 15 जुलाई के बीच प्रस्तावित होनी है। इनमें 10वीं की परीक्षाएं केवल दिल्ली के इलाकों में होनी हैं।


नीट और जेईई मेंस जैसी परीक्षाओं को लेकर अभी इंतजार

दंगे के चलते दिल्‍ली के कुछ इलाकों में 10वीं की परीक्षाएं नहीं हो पायी थीं। मंत्रालय इस बीच नीट और जेईई मेंस जैसी परीक्षाओं को लेकर थोड़ा और इंतजार करने के पक्ष में है। यही वजह है कि परीक्षाओं को लेकर 30 जून के आसपास एक बार फिर से समीक्षा की जाएगी। जिसके बाद उस समय की स्थिति को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा। वैसे भी जेईई मेंस की परीक्षाएं 18 से 23 जुलाई और नीट की परीक्षाएं 26 जुलाई को होनी है। ऐसे में इन परीक्षाओं को लेकर अभी समय है।