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Tuesday, January 12, 2021

फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम, एक दशक बाद भी कटौती पूरी तरह से नहीं हुई लागू

फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम,  एक दशक बाद भी कटौती पूरी तरह से नहीं हुई लागू


फतेहपुर : 1 अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए तमाम शिक्षकों की सेवा का करीब एक दशक बीत रहा है लेकिन फंड के नाम पर उनके खाते में टका नहीं है। एक वक्त अपने फंड व सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जानी जाने वाली सरकारी नौकरी परिषदीय शिक्षकों के लिए सिर्फ वेतन मिलने वाली नौकरी ही साबित हो रही है। 


परिषदीय स्कूलों में अप्रैल 2005 के बाद सेवा में आए शिक्षकों के वेतन से न्यू पेंशन स्कीम के तहत कटौती करने का फैसला जिले में अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है। सैकड़ों बेसिक शिक्षकों की कई साल की नौकरी के बाद भी एक पाई फंड नहीं जमा हो सका है। ओपीएस के समाप्त होने के बाद शासन ने एनपीएस की व्यवस्था दी तो वह भी कई सालों तक अव्यवस्था की शिकार रही। विभाग ने तर्क दिया था कि अब भी सैकड़ों शिक्षकों को प्रान आवंटित नहीं किया जा सका है जिस कारण समस्या आ रही है लेकिन विभाग के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि जिन शिक्षकों को प्रान आवंटित किया जा चुका है उनके वेतन से कटौतीक्यों नहीं की जा रही है। प्रान आवंटित होने के बाद कटौती नहीं बताते हैं कि जिले में ऐसे तमाम शिक्षक हैं जिन्हें प्रान आवंटन किया जा चुका है। पिछले वर्ष विभाग ने ब्लॉकों से प्रान आवंटित व गैर प्रान आवंटित शिक्षकों की सूची मंगाई थी।

Tuesday, December 29, 2020

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान


पुरानी पेंशन के स्थान पर शुरू हुई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की परेशानी और चिंता का सबब बन गई है। वेतन से उनका अंशदान तो कट रहा है। मगर सरकार का अंशदान नहीं जमा हो रहा है। पिछले 13 महीने से यह स्थिति बनी हुई। इसका कारण बजट की कमी बताया जा रहा है। सरकार के रवैये से शिक्षकों में नाराजगी है।


जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब सात हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से चार हजार पहली अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए हैं। उस समय नई पेशन व्यवस्था (न्यू पेंशन स्कीम) लागू हो गई थी। इसके तहत हर महीने शिक्षकों के वेतन का दस प्रतिशत अंशदान काट लिया जाता है। इसी के सापेक्ष सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी अंशदान देती है। 


शिक्षकों का कहना है कि उनके वेतन से हर महीने दस प्रतिशत काटा जा रहा है, लेकिन सरकार अपना 14 फीसदी अंशदान नहीं जमा कर रही है। शिक्षकों के मुताबिक हर शिक्षक का सरकार पर एक-एक लाख रुपये बकाया है। उनके अनुसार अकेले बनारस में चार अरब रुपए का अंशदान चाहिए। एनपीएस के नियम के मुताबिक जबतक सरकारी अंशदान नहीं जमा होगा, तब तक उनके वेतन से की गई कटौती भी ब्लॉक रहेगी।

भविष्य में होगा नुकसान

एनपीएस के अनुसार उनकी कटौती में सरकारी अंशदान न मिलाए जाने से मार्केट में निवेश नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान शिक्षकों को रिटायरमेंट के समय उठाना पड़ेगा। रिटायरमेंट के समय बाजार आधारित एनपीएस का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

हर महीने चाहिए 25 करोड़

एक अनुमान के मुताबिक वाराणसी में जितने शिक्षक एनपीएस से आच्छादित हैं, उनकी कटौती के अनुसार सरकारी अंशदान जमा करने के लिए प्रति महीने 25 करोड़ रुपए चाहिए। जब तक बजट में इतनी धनराशि की व्यवस्था नहीं होगी। सरकारी अंशदान नहीं जमा हो पाएगा।

माध्यमिक विद्यालयों में भी यही समस्या

प्राथमिक के साथ माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहां सोलह महीने से अंशदान न जमा होने की शिकायत है। पिछले दिनों माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने इस मुद्दे पर बात की थी। डीआईओएस ने भी बजट न होने की समस्या बताई थी।


'इस वित्तीय वर्ष में एनपीएस में अंशदान जमा करने के लिए बजट नहीं आया। इस बारे में शासन और शिक्षकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा। एनपीएस में सरकारी अंशदान जमा जाएगा।' - अनूप मिश्र, वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा)


'सरकार शिक्षकों का बकाया एनपीएस नहीं देगी तो शिक्षक आंदोलन कर सकते हैं। एनपीएस की अपनी कटौती रोकवाने के लिए न्यायालय की शरण में जा सकते हैं। नई पेंशन योजना शिक्षकों को नुकसान पहुंचा रही है।' - शशांक कुमार पांडेय, जिला संयोजक, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग

Monday, December 7, 2020

परिषदीय शिक्षकों की NPS योजना में सरकारी अंशदान समय से जमा न होने संबंधी अनियमितताओं के चलते हुए नुकसान की भरपाई कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने हेतु PSPSA का पत्र

परिषदीय शिक्षकों की NPS योजना में सरकारी अंशदान समय से जमा न होने संबंधी अनियमितताओं के चलते हुए नुकसान की भरपाई कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने हेतु PSPSA का पत्र





Tuesday, August 4, 2020

फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम, विभाग मनमर्जी से कर रहा है NPS कटौती

फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम, विभाग मनमर्जी से कर रहा है NPS कटौती


फतेहपुर : एक अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए तमाम शिक्षकों की सेवा का करीब एक दशक बीत रहा है लेकिन फंड के नाम पर उनके खाते में टका नहीं है। एक वक्त अपने फंड सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जानी जाने वाली सरकारी नौकरी परिषदीय शिक्षकों के लिए सिर्फ वेतन मिलने वाली नौकरी ही साबित हो रही है। परिषदीय स्कूलों में अप्रैल 2005 के बाद सेवा में आए शिक्षकों के वेतन से न्यू पेंशन स्कीम के तहत कटौती करने का फैसला जिले में अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।

सैकड़ों बेसिक शिक्षकों की कई साल की नौकरी के बाद भी एक पाई फंड नहीं जमा हो सका है। आईपीएस के समाप्त होने के बाद शासन ने एनपीएस की व्यवस्था दी तो वह भी कई सालों तक व्यवस्था की सरकार रही। पिछले वर्ष एओ ने एनपीएस कटौती के लिए रूचि दिखाई लेकिन दायरे में आने वाले शिक्षकों के वेतन से एनपीएस के अंश की कटौती नहीं हो सकी। विभाग का तर्क था कि अब भी सैकड़ों शिक्षकों को प्रान आवंटित नहीं किया जा सका जिस कारण समस्या आ रही है लेकिन विभाग के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि जिन शिक्षकों को प्रान आवंटित किया जा चुका है उनके वेतन से कटौती क्यों नहीं की जा रही है। इस समय काफी कम संख्या में शिक्षकों के वेतन से एनपीएस की कटौती की जा रही है। जिसके चलते शिक्षकों के पास एक पैसे का फंड नहीं है।





दुश्वारी : विभाग मनमानी से कर रहा है एनपीएस कटौती, शासन व वित्त नियंत्रक दे चुके है कटौती के निर्देश।

अब तक कटौती नही : जिले में ऐसे तमाम शिक्षक हैं जिन्हें प्रान आवंटन किया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद कटौती नहीं की जा रही है। पिछले वर्ष विभाग ने ब्लॉकों से प्रान आवंटन व गैर प्रान आवंटित शिक्षकों की सूची मंगाई थी। कहा गया था कि जिनके प्रान आवंटन हो चुके हैं उनकी कटौती शुरू होगी एवं जिन्हें आवंटन नहीं हुआ है उन्हें फार्म भराकर आवंटन कराया जाएगा। इसके बावजूद शिक्षकों के वेतन से अब तक कटौती नहीं हो सकी है।


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Wednesday, July 15, 2020

कासगंज : एनपीएस के खातों की हुई रीमैपिंग, एनएसडीएल करेगी सुधार, एक्टिव किए गए सभी खाते


एनपीएस के खातों की हुई रीमैपिंग, एनएसडीएल करेगी सुधार, एक्टिव किए गए सभी खाते  


कासगंज। बेसिक शिक्षा विभाग के न्यू पेंशन खाताधारकों को अब राहत मिलती दिखाई दे रही है। शिक्षकों के खातों से हुई करोड़ों रुपये की अनियमितता में सुधार किया गया है। शिक्षा विभाग और कोषागार की संयुक्त पहल से एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) के खातों की रीमैपिंग हो गई है। अब रिपोर्ट मुंबई एनएसडीएल (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) को भेज दी गई है।


शिक्षा विभाग में वर्ष 2004-05 से पेंशन स्कीम खत्म कर दी गई है। शिक्षकों ने इसके लिए संघर्ष किया। वर्ष 2017 में न्यू पेंशन स्कीम लागू कर शिक्षकों के खाते खुलवाए गए। इसके तहत शिक्षकों ने खाते खोलकर पत्रावली जमा की, लेकिन तत्कालीन लेखा विभाग के अधिकारियों की अनदेखी मुसीबत बन गई।
बेसिक शिक्षा के लेखा विभाग की बजाय कोषागार की आईडी से एनपीएस खाते लिंक हो गए और शिक्षकों के खातों में धनराशि नहीं पहुुंची। 


पिछले दिनों ही बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई तो शिक्षा विभाग और कोषागार में खलबली मच गई। दोनों विभागों की संयुक्त पहल से स्थिति काफी हद तक सुधर गई है। एनपीएस के खातों की रीमैपिंग कर दी गई है। अब सभी खाते एनएसडीएल मुंबई की वेबसाइट पर भेजे गए हैं। क्योंकि दो विभागों की आईडी की गड़बड़ी का सुधार एनएसडीएल करेगी।


एक्टिव किए गए सभी खाते
एनपीएस के निष्क्रिय खाते सक्रिय कर दिए गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा दी गई आईडी से खातों को लिंक करते हुए कोषागार ने खाते एक्टिव किए हैं। सभी खाते एक्टिव होने की सूचना भी वेबसाइट पर प्रदर्शित होने लगी है। हालांकि धनराशि अभी शून्य ही है।


- एनपीएस के सभी खातों में सुधार कराया गया है। खाते एक्टिवेट कर दिए गए हैं। जल्द ही शिक्षकों के खातों में धनराशि पहुंच जाएगी। - सुरेश कुमार, लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा।
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 एनपीएस के खातों की रीमैपिंग कराई गई है। एनएसडीएल को अनुरोध भेज दिया गया है। संभावना है कि जल्द ही सुधार हो जाएगा। - संदीप कुमार, कोषाधिकारी।

Thursday, March 12, 2020

माध्यमिक शिक्षा : अफसरों की ढिलाई से शिक्षकों के डूबेंगे करोड़ों, शिक्षकों ने NPS खातों में अंशदान देने का लिया था निर्णय, 31 मार्च 2020 को 520 करोड़ रुपए में से बड़ा हिस्सा हो जाएगा लैप्स

माध्यमिक शिक्षा : अफसरों की ढिलाई से शिक्षकों के डूबेंगे करोड़ों, शिक्षकों ने NPS खातों में अंशदान देने का लिया था निर्णय, 31 मार्च 2020 को 520 करोड़ रुपए में से बड़ा हिस्सा हो जाएगा लैप्स।






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