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Thursday, August 6, 2020

फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों को मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं से संतृप्त करने हेतु "ऑपरेशन कायाकल्प" के अंतर्गत खेल का मैदान के विकास, किचेन वाटिका की फेन्सिंग आदि का निर्माण कराए जाने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों को मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं से संतृप्त करने हेतु "ऑपरेशन कायाकल्प" के अंतर्गत खेल का मैदान के विकास, किचेन वाटिका की फेन्सिंग आदि का निर्माण कराए जाने के सम्बन्ध में।


फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प करेगी पालिका।


फतेहपुर : ग्राम पंचायतों की तर्ज पर नगर पालिका परिषद नगरीय क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प करेगी। 14वें वित्त से विद्यालय की बाउंड्रीवाल, शौचालय समेत भवनों को कायाकल्प ऑपरेशन के तहत सुसज्जित कराया जाएगा। नगर पालिका ने आपरेशन कायाकल्प की तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही इन विद्यालयों का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

परिषदीय विद्यालयों के कायाकल्प योजना के तहत सुंदरीकरण के साथ बाउड्रीवॉल व अतिरिक्त कक्षाओ का निर्माण भी कराया जाएगा। छात्र छात्राओ के लिए उनकी संख्या के अनुसार अलग शौचालय एवं रनिंग वाटर की व्यवस्था भी की जाएगी। स्वच्छ रनिंग वाटर की सुविधा के साथ साथ जलनिकासी का कार्य भी कराया जाएगा। विद्यालय की फर्श दीवारों की छत तथा दीवारों की खिड़की आदि का मरम्मतीकरण कार्य कराए जाने के निर्देश दिए गए है। कक्ष एवं शौचालय में टाइल्स का कार्य, विद्युतीकरण व किचन सेट का जीर्णोद्धार के साथ सुसज्जीकरण फर्नीचर का कार्य भी कराया जाएगा। जिस किसी विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है, वहां चहारदीवारी एवं गेट का निर्माण भी कराया जाएगा। शासन द्वारा निर्देशित किया गया है कि नगरीय परिसंपत्तियो के रूप में नगर क्षेत्र के विद्यालयों में कराए जाने वाले कार्यो की तकनीकी एवं अन्य जानकारी व ऑपरेशन कायाकल्प के सहयोग में बेसिक शिक्षा विभाग आवश्यकता के हिसाब से रखरखाव भी कराएगी।


शासन द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है। चौदहवें वित्त से ऑपरेशन कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयो का सुंदरीकरण कराए जाने के निर्देश तो दिए गए है पर धन का अभाव है। अभी इस सम्बन्ध में विचार विमर्श किया जा रहा है।

निरूपमा प्रताप, नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी






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Thursday, July 30, 2020

आक्रोश : हेडमास्टरों की जांच के लिए अधीनस्थ संविदाकर्मियों को दी गयी जिम्मेदारी

आक्रोश : हेडमास्टरों की जांच के लिए अधीनस्थ संविदाकर्मियों को दी गयी जिम्मेदारी


बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत होने वाले विकास कार्यों की जांच संविदा पर काम करने वाले शिक्षकों को सौंपी गई है। विभाग के पोर्टल पर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट अपलोड करने के लिए इन शिक्षकों की ट्रेनिंग भी पूरी कराई जा चुकी है।


जानकारी के अनुसार बेसिक शिक्षा निदेशालय से आने वाली विकास कार्यों की राशि से वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में जिले के विभिन्न स्कूलों में विकास कार्य कराए गए हैं। इसके साथ ही कार्य करती योजना के तहत ग्राम पंचायत से मिलने वाली विकास राशि से भी विकास काम हो रहे हैं। इसमें स्कूलों में चार दिवारी, शौचालय, पीने के पानी के लिए हैंडपंप, फर्नीचर, स्पोर्ट्स किट ऑन लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। अब निदेशालय ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पिछले 3 सालों में किए गए इन सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। 


लेकिन विभाग की ओर से यह कार्य विशेष शिक्षकों और विभाग में काम करने वाले फिजियोथैरेपिस्ट को सौंपा गया है। यह विशेष शिक्षक व फिजियोथैरेपिस्ट विभाग में संविदा शिक्षक के रूप में कार्य करते हैं। इसके साथ ही इन सभी की ड्यूटी स्कूलों में हेड मास्टर के अंडर में रहती है। ऐसे में अब जब इन सभी शिक्षकों को विद्यालय में जाकर किए गए विकास कार्यों को देख कर बहुत ही सत्यापन करने के लिए कहा गया है तो या इस काम से कतरा रहे हैं।


 इसका कारण यह है कि संविदा पर काम करने वाले सभी शिक्षक किसी न किसी हेड मास्टर के अंडर में ही अपनी ड्यूटी करते हैं। विद्यालय से जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर इन सभी शिक्षकों की संविदा को आगे बढ़ाया जाता है। इसके साथ ही विभाग में इस बात का भी विरोध हो रहा है कि संविदा पर काम करने वाले यह शिक्षक किस तरह से स्कूलों का भौतिक सत्यापन करेंगे।

विकास कार्यो की रिपोर्ट नकारात्मक गई तो संबंधित पर होगी कार्यवाही

परिषदीय स्कूलों में होने वाले सभी कामकाज हेड मास्टर की देखरेख में और एसएमसी सदस्यों की स्वीकृति के बाद ही कराए जाते हैं। विद्यालय के सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराना हेडमास्टर की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में अगर भौतिक सत्यापन के दौरान किसी स्कूल में गड़बड़ी पाई गई और वहां के काम मांगों के अनुकूल ना मिले तो उस हेड मास्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। जिसके कारण हेड मास्टर की मांग लिया है कि अगर यह जांच कराई जा रही है तो इसके लिए उच्च अधिकारियों को नियुक्त किया जाए।


निदेशालय ने स्कूलों में किए गए विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन के लिए विशेष शिक्षकों और फिजियोथैरेपिस्ट की नियुक्ति किए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी विभाग की ओर से इस काम को रोक दिया गया है और जल्दी ही इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। विभाग के अगले आदेश आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। -डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी

Tuesday, July 28, 2020

बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य

बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य।

बांदा ::  नए शिक्षा सत्र में जिले के 1868 विद्यालयों के बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से जूझना पड़ेगा। कहीं पीने का नहीं तो कहीं शौचालय नदारद हैं। तमाम स्कूलों में रसोईघर और बिजली कनेक्शन का अभाव है। विभागीय जिला समन्वयक द्वारा उप निदेशक (बेसिक) को भेजी गई रिपोर्ट में ये खामियां उजागर हुई हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 124 स्कूल सभी सुविधाओं से संतृप्त और लैस हैं। शासन ने मार्च 2019 में परिषदीय स्कूलों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी 'ऑपरेशन कायाकल्प के तहत ग्राम पंचायतों को दी थीं, लेकिन ग्राम पंचायतों ने सभी स्कूलों के बुनियादी सुविधाओं से लैस नहीं किया। स्कूलों की ताजा हालत सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक (निर्माण) द्वारा दो दिन पूर्व बेसिक शिक्षा उप निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट से उजागर हुई है।


समन्वयक की रिपोर्ट में बताया गया है कि जिले के 1992 परिषदीय स्कूलों में मात्र 124 स्कूलों में ही 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत कार्य कराए गए हैं। 1868 स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1992 परिषदीय विद्यालयों में 620 में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। 844 स्कूलों में बालक व बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। 692 स्कूलों में रसोईघर, 1925 स्कूलों में हैंडवाशिंग यूनिट, 1217 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और बाउंड्रीवाल नहीं है। 1947 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय व रैप नहीं बने हैं। 120 विद्यालयों में श्यामपट्ट (ब्लैक बोर्ड) नहीं हैं। 1198 स्कूलों की कक्षाओं में फर्श या टायल्स नहीं हैं।





पहले शौचालय और पंचायत भवन बनेंगे : जिला समन्वयक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि जिला पंचायत राज विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवनों के निर्माण को शासन के निर्देशानुसार पहले कराया जा रहा है।

शासन ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों में 14 बिंदुओं पर संतृप्त करने का कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपा है। उन्हें ही सभी स्कूलों में यह कार्य कराना है। अधूरे कार्यों के बारे में शासन को पत्राचार किया गया है। -हरिश्चंद्र नाथ, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा।

शासन ने 125 दिनों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय और पंचायत घर बनाए जाने के आदेश दिए हैं। इसलिए पहले ये दोनों कार्य कराए जा रहे हैं। इसी के बाद ऑपरेशन कायाकल्प' से स्कूलों में काम होंगे। -संजय यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी बांदा।


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Monday, July 13, 2020

लखनऊ : ऑपरेशन कायाकल्प से संवरेंगे परिषदीय स्कूल, क्लिक करके देखें कौन- कौन से होंगे काम

लखनऊ : ऑपरेशन कायाकल्प से संवरेंगे परिषदीय स्कूल, क्लिक करके देखें कौन- कौन से होंगे काम

● नगर निकाय क्षेत्रों के विद्यालयों में भी लागू होगा 'ऑपरेशन कायाकल्प
● नगर विकास विभाग ने सभी निकायों को जारी किया आदेश


लखनऊ : नगर विकास विभाग शहरी क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सजाने व संवारने जा रहा है। प्रमुख सचिव नगर विकास दीपक कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। प्रमुख सचिव ने सभी निकायों को निर्देश भेज दिए हैं। उन्होंने शहरी निकायों से वह सूची भी साझा की है जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए कराए जाने वाले कामों का ब्योरा दिया गया है।


 ग्रामीण इलाकों में पंचायतीराज विभाग के माध्यम से परिषदीय स्कूलों की स्थित सुधारने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया गया। इसमें परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों से कहा गया कि वे ग्राम प्रधानों और सचिवों से मिलकर स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं विकसित कराएं। हालांकि शिक्षकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह का काम करा पाने में काफी असमर्थता जताई है और व्यवस्था पर सवाल भी उठाए हैं। वजह, पंचायती राज निदेशक का वह आदेश है जिसमें कहा गया है कि पंचायतीराजविभाग से तय काम होने के बाद रकम बचने पर स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प का काम कराया जाए।



प्रमुख सचिव नगर विकास ने कहा है कि शहरी निकायों द्वारा परिषदीय स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प से काम शुरू कराए जाएं। इसके लिए केंद्रीय वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, स्मार्ट सिटी फंड, निकाय निधि, निगम निधि व अवस्थापना विकास निधि का इस्तेमाल किया जा सकता है।

● ऑपरेशन कायाकल्प में कराए जाएंगे ये काम छात्र और छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट्स। स्वच्छ पेयजल, मल्टिपल हैंडवॉशिंग और जल निकासी की व्यवस्था। विद्यालय की फर्श, छत, दररवाजे और खिड़कियों का मरम्मत।

● टाइल्स लगवाना, विद्युतीकरण, किचन शेड को बेहतर कराना। फर्नीचर, चहारदीवारी व गेट, इंटरलॉकिंग, अतिरिक्त क्लास रूम्स।


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Thursday, June 25, 2020

करे कोई भरे कोई : ऑपरेशन कायाकल्प के कामों में गड़बड़ी पर हेडमास्टर निलंबित

करे कोई भरे कोई : ऑपरेशन कायाकल्प के कामों में गड़बड़ी पर हेडमास्टर निलंबित। 



बरेली  :   ऑपरेशन कायाकल्प में गड़बड़ी और लापरवाही की हिंदुस्तान की खबरों पर बुधवार को मुहर लग गई। डीएम और एसडीएम के निरीक्षण में लापरवाही पकड़ में आई। डीएम के आदेश पर एक हेड मास्टर को निलंबित कर दिया गया है। बीईओ भुता के साथ चार शिक्षकों को कठोर चेतावनी दी गई है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में घटिया टाइल्स लगाने, दोयम दर्जे की ईट का इस्तेमाल करने, कम ऊंचाई की बाउंड्री वॉल बनाने जैसी शिकायतें आती रही हैं। बुधवार से इनका सत्यापन शुरू हो गया। खुद डीएम और सीडीओ ने भी भुता ब्लॉक में कई स्कूलों का निरीक्षण किया। 


प्राथमिक विद्यालय गुलाब नगर में ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत रंगाई पुताई भी ठीक से नहीं कराई गई थी। फर्श भी टूटा हुआ मिला। डीएम के निर्देश पर प्राथमिक विद्यालय गुलाब नगर के प्रधानाध्यापक फरियाद अली को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। डीएम ने बीईओ भुता को आरोप पत्र और ग्राम सचिव शेखर गुप्ता को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। सफाई कर्मी से भी स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए।



रंगाई-पुताई का काम भी निम्न स्तर का
प्राथमिक स्कूल मझोआ हेतराम के प्रधानाध्यापक सतीश शर्मा, प्राथमिक स्कूल फैज नगर द्वितीय की प्रधानाध्यापिका साधना पांडे, प्राइमरी स्कूल कल्याणपुर नवीन के हेड मास्टर ठाकुरदास और जूनियर हाई स्कूल कल्याणपुर नवीन के इंचार्ज अध्यापक सुरेंद्र सिंह को नोटिस देते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। इन स्कूलों में भी ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत कार्य नहीं कराए गए। स्कूलों की रंगाई पुताई, वॉल पेंटिंग आदि का काम भी निम्न स्तर का पाया गया। भुता ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर गंगवार को भी कठोर चेतावनी जारी की गई है। डीएम ने ब्लॉक भुता के एपीओ को अच्छा कार्य करने पर प्रशंसा पत्र निर्गत करने के आदेश जारी किए।



धौलपुर के प्राइमरी स्कूल में न तो टाइल लगी और न ही शौचालय बना
 प्राइमरी स्कूल लालपुर में बीएसए को संतुष्टि पूर्ण कार्य नजर नहीं आया। स्कूल में अभी तक शौचालय नहीं बना था। वॉल पेंटिंग का काम भी नहीं हुआ था। स्कूल से स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्राइमरी स्कूल लक्षा में भी बाउंड्री वाल, हैंड वास यूनिट, दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। अनुपस्थित स्टाफ से जवाब तलब किया गया। जूनियर हाई स्कूल अखियां में फर्श में टाइल ही नहीं लगी है। बाउंड्री वाल भी नहीं बनी है। जूनियर हाई स्कूल भरतपुर में जानवर घूम रहे थे। प्राइमरी स्कूल भरतपुर बंद मिला। प्राइमरी व जूनियर हाई स्कूल सिंचाई भी बंद मिला। स्टाफ को नोटिस जारी किया गया है।

फतेहपुर : अब कायाकल्प नहीं पहला "विकल्प", पंचायत चुनावों की संभावना देखते हुए ग्राम प्रधानों की प्राथमिकताओं में आया बदलाव

फतेहपुर : अब कायाकल्प नहीं पहला "विकल्प", पंचायत चुनावों की संभावना देखते हुए ग्राम प्रधानों की प्राथमिकताओं में आया बदलाव।


फतेहपुर : शासन की आपरेशन कायाकल्प के जरिए परिषदीय स्कूलों के तेवर व कलेवर सुधारने की मंशा फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही है। कागजों में प्रस्ताव तैयार होने के बाद जमीन पर काम होते नहीं दिख रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अब ऑपरेशन कायाकल्प ग्राम प्रधानों के लिए पहला विकल्प नहीं है। पंचायत चुनावों की संभावना देखते हुए ग्राम प्रधानों की प्राथमिकताओं में बदलाव आ गया है। शासन ने आपरेशन कायाकल्प को प्राथमिकताओं में शामिल किया है। शासन के अलावा स्कूली शिक्षा महानिदेशक ने भी जून में ऑपरेशन कायाकल्प समेत अन्य कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं लेकिन ग्राउन्ड जीरों में हालात अलहदा हैं। अब भी तमाम ऐसे स्कूल हैं जहां दिए गए प्रस्तावों के अनुसार काम शुरू नहीं हो सके हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों ने बताया कि उनके स्कूलों में प्रस्तावित कार्य शुरू नहीं कराए जा सके हैं। ग्राम प्रधान संपर्क करने परकभी बजट न होने का रोना रोते हैं तो कभी दूसरे विकास कार्यों में उलझे रहने का हवाला देते हैं।




प्राथमिकता के दिए थे निर्देश डीएम ने जनवरी माह में ही ऑपरेशन कायाकल्प को प्राथमिकता प्रदान करने के कड़े निर्देश दिए थे। उन्होंने पंचायतीराज विभाग एवं विकास विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया था कि पहले सभी परिषदीय स्कूलों को अवस्थापना सम्बन्धी सुविधाओं से संतृप्त कर दिया जाए। इसके बाद ही 14वें वित्त एवं राज्य वित्त की निधि से अन्य कार्य किए जाएंगे।


चुनावों पर है नजर सूत्र बताते हैं कि ग्राम प्रधानों का पूरा ध्यान अब पंचायत चुनावों पर है। ग्राम प्रधान अब उन्हीं कार्यों को कराने में दिलचस्पी ले रहे हैं जो उनके वोटर्स पर सकारात्मक प्रभाव डाले व गांव में उनकी पैठ को मजबूत करे। प्रधानों का अब पूरा ध्यान स्कूलों की बजाए गांवों की तरफ है।


फर्श में बैठकर पढ़ते हैं बच्चे अधिकांश परिषदीय स्कूलों में अब भी स्कूली बच्चे फर्श पर टाट पट्टी बिछाकर पढ़ाई करते हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत सबसे अधिक डिमांड फर्नीचर की ही है। हेडमास्टर चाहते हैं कि उनके प्रत्येक कक्षा कक्ष में मेज एवं बेंच स्थापित कराई जाएं जिससे बच्चों को गर्मी एवं सर्दी में जमीन पर बैठकर पढ़ाई न करनी पड़े।

निर्धारित किए गए हैं यह सात घटक :

ब्लैक बोर्ड

स्वच्छ पेयजल, मल्टीपल हैंडवाश एवं जल निकासी का कार्य

बालक बालिका पृथक शौचालय

विद्यालय भवन मरम्मत, छत, दरवाजे, खिड़कियां एवं फ्लोर टाइलिंग

विद्युतीकरण

किचन शेड जीर्णोद्धार एवं सुसज्जतीकरण

फर्नीचर



बोले जिम्मेदार : ऑपरेशन
कायाकल्प में चुनौतियां तो सामने आ रही हैं लेकिन इसकी लगातार मानीटरिंग की जा रही है। करीब 300 स्कूलों में कार्य प्रगति पर है। ग्राम प्रधानों से प्रतिदिन बात की जा रही है। 30 सितंबर तय की गई डेड लाइन से पहले सारे विद्यालयों का कायाकल्प का काम पूरा कराया जाएगा। शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए फतेहपुर


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