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Wednesday, September 16, 2020

सरकारी नौकरी में संविदा मामले में भाजपा एमएलसी ने लिखा मुख्यमंत्री योगी को पत्र

समूह ख व समूह ग की प्रस्तावित नई सेवा नियमावली को निरस्त करने हेतु माo विधान परिषद सदस्य ने माoमुख्यमंत्री को लिखा पत्र।

सरकारी नौकरी में संविदा मामले में भाजपा एमएलसी ने लिखा मुख्यमंत्री योगी को पत्र

 
लखनऊ : समूह ‘ख’ और ‘ग’ की सरकारी नौकरियों में भर्ती के बाद पांच साल तक संविदा पर नियुक्ति के शासन के प्रस्ताव का विपक्षी दलों के बाद अब सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी मुखर विरोध करना शुरू कर दिया है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को रद करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेवा नियमावली के लागू होने पर नवनियुक्त कर्मचारी पांच साल तक अधिकारियों के बंधुआ मजदूर हो जाएंगे।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की समूह ‘ख’ और ‘ग’ की नौकरियों में चयनित होने के बाद कर्मचारी शुरुआती पांच वर्षों तक संविदा पर नियुक्त रहेंगे। इन पांच वर्षो के दौरान प्रत्येक छमाही में उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन ‘मेजरेबल की परफार्मेंस इंडीकेटर्स’ के आधार पर किया जाएगा। नियमित होने के लिए कर्मचारी को मूल्यांकन में प्रत्येक वर्ष 60 फीसद अंक पाने होंगे। किन्हीं दो छमाही में 60 प्रतिशत से कम अंक पाने पर उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। 


इसे लेकर भाजपा एमएलसी ने पत्र में कहा कि प्रस्तावित सेवा नियमावली के लागू होने पर सरकारी सेवाओं में चयनित होने वाले नौजवानों का शोषण और कदाचार बढ़ेगा। एमएलसी ने कहा कि अधिकारी वर्ग नई सेवा नियमावली को तरह-तरह से कर्मचारियों का शोषण करने का औजार बना सकता है। इससे भ्रष्टाचार के साथ अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच आपसी मतभेद और दूरियां भी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अत्यंत दोषपूर्ण, अन्याय और शोषण को बढ़ावा देने वाली है। इसके लागू होने से पार्टी और सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है।



Monday, September 7, 2020

गोरखपुर : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश


गोरखपुर। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 12 वर्षों से अध्यापन करने वाली जिले की 23 शिक्षिकाओं का मानदेय जल्द ही आधा हो जाएगा। शासन की नई नियमावली के तहत अब इन विद्यालयों में कंप्यूटर, आर्ट एंड क्रॉफ्ट और शारीरिक शिक्षा की शिक्षिकाओं से पूर्णकालिक के बजाय अंशकालिक शिक्षक के रूप में काम लिया जाएगा। शासन के निर्देश पर शिक्षिकाओं को अंशकालिक शिक्षक के रूप में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगले सप्ताह तक प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा, वहीं शिक्षिकाओं ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देश दीपक दूबे ने कहा कि पूर्णकालिक शिक्षकों के रूप में अध्यापन करने वाली शिक्षिकाओं को अब तक त्र 22 हजार का मानदेय मिल रहा था। मगर अब उन्हें अंशकालिक करने पर मानदेय त्र 9800 हो जाएगा। सरकार नियमों में अचानक बदलाव कर शिक्षिकाओं की परेशानी बढ़ा रही है। पहले ही नौ शिक्षकों और छह उर्दू की शिक्षिकाओं को नए नियमावली के तहत बाहर किया जा रहा है। दूसरी तरफ जो बच गए हैं, उनके मानदेय में कटौती की जा रही है। जो न्याय संगत नहीं हैं। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

शासन के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई शुरू की गई है। एक सप्ताह के अंदर पूरी रिपोर्ट शासन को मुहैया कराने की समय सीमा दी गई है। नियम के मुताबिक पूर्णकालिक शिक्षकों को अंशकालिक शिक्षक के रूप में तब्दील किया जा रहा है। -बीएन सिंह, बीएसए

Tuesday, September 1, 2020

गोरखपुर : नौकरी हथियाने के लिए एससी-एसटी बने गुप्ता जी, बर्खास्त

नौकरी हथियाने के लिए एससी-एसटी बने गुप्ता जी, बर्खास्त

बीएसए गोरखपुर ने सोमवार को जिले के तीन शिक्षकों को फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने पर बर्खास्त कर दिया। इन शिक्षकों में से दो ने नौकरी हथियाने के लिए अपनी जाति ही बदल ली। दद्दन यादव नाम का व्यक्ति सिंह बन गया और संतोष गुप्ता संतोष कुमार बन गया। बर्खास्त किए गए सभी तीनों शिक्षकों से अब वेतन की रिकवरी होगी।

1996 में शिवबचन सिंह पुत्र भृगुनाथ सिंह की कैम्पियरगंज के प्राइमरी स्कूल में हेड शिक्षक के रूप में ज्वाइनिंग 15 जुलाई 1996 को हुई। ज्वाइनिंग लेटर में शिवबचन का पता व निवास प्रमाण पत्र रतसड़ बलिया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा के पास मई 2020 में शिक्षक के वेतन की जानकारी आई जिसमें 192 मामले ऐसे थे जिनमे एक ही पैन कार्ड पर अलग-अलग एंट्री कई जिले की फाइलों में मिली। इसके आधार पर शिवबचन को निलंबित कर दिया गया। बलिया के असली टीचर ने इसकी शिकायत की।

शिकायतकर्ता के अनुसार कैम्पियरगंज में 1996 से नौकरी करने वाले शिक्षक का असली नाम ददन यादव बताया गया। शिकायतकर्ता के आधार पर जांच हुई जिसमे सारी बातें सही मिलीं। मामला सही मिलने पर शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया।

गोरखपुर के ब्रह्मपुर स्थित प्राइमरी स्कूल में 6 फरवरी 2010 में संतोष कुमार पुत्र छठ्ठू प्रसाद ने बतौर शिक्षक ज्वाइन किया था। 2019 में इनके प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई। जांच में पता चला कि संतोष की जाति गुप्ता है जबकि इनकी तैनाती अनुसूचित जाति के कोटे से हुई है। इसके बाद संतोष को निलंबित कर जांच शुरू कर दी गई। मामला सही पाए जाने पर संतोष को बर्खास्त कर दिया गया।

एसटीएफ की जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

वंदना पाण्डेय पुत्री नरेन्द्र पाण्डेय और पत्नी रमेश मिश्रा की तैनाती 2011 में सिद्धार्थनगर प्राइमरी स्कूल में हुई थी। अंतरजनपदीय तबादले में 2016 को जगंल कौड़िया के प्राइमरी स्कूल में वंदना की तैनाती हुई। एसटीएफ फील्ड यूनिट गोरखपुर के दिशा-निर्देश पर वंदना की प्रमाणपत्र की जांच शुरू हुई। जांच में पाया गया कि वंदना ने दूसरे के नाम की मार्कशीट बना पता छिपाते हुए नौकरी हासिल की है। मामले की पुष्टि होने पर वंदना को भी बर्खास्त कर दिया गया है।

अब तक की कार्रवाई

बर्खास्त हो चुके शिक्षक 61

निलंबित शिक्षक 34

बोले बीएसए

तीनों शिक्षक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर तीनों को बर्खास्त किया गया है। अब इनके खिलाफ एफआईआर कराकर वेतन की रिकवरी कराई जाएगी।

गोरखपुर : दीक्षा एप से मानव संपदा पोर्टल को करना है लिंक शासन के आदेश के बाद शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

दीक्षा एप से मानव संपदा पोर्टल को करना है लिंक शासन के आदेश के बाद शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

 गोरखपुर परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने का शासन का फरमान उनके गले की फांस बन गया है जनपद में लगभग 30 फीसद शिक्षकों की उम्र
पचास से पचपन के आसपास है। यह शिक्षक न तो तकनीकी रूप से दक्ष है और न ही मोबाइल पर प्रशिक्षण में सक्षमा खासकर अधिकतर महिला शिक्षक ऐसी हैं जिनके लिए प्रशिक्षण में शामिल होना चुनौती है। चार दिन पूर्व शासन ने शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने के लिए दीक्षा एप को मानव संपदा पोर्टल से लिंक का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षकों को अब प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।

ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दीक्षा एप से मानव संपदा से लिक करना अनिवार्य। इसके लिए एआरपी एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को बता रहे हैं। यदि किसी को समस्या आ रही है तो उसका निदान किया जा रहा है। -बीएन सिंह, बीएसए

Tuesday, August 11, 2020

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर में कार्यरत एक शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त कर दी गयी है। शिक्षिका ने कूटरचित दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे डायट देवरिया में विशिष्ट बीटीसी-2008 प्रशिक्षण में दाखिला लिया था। जांच के बाद डायट प्राचार्य ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में शिक्षिका पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।   

गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुरी, शहबाजपुर निवासी चित्रलेखा कुमारी ने जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान रामपुर कारखाना में वर्ष 2009 में दिव्यांग कोटे के तहत विशिष्ट बीटीसी में प्रवेश लिया था। इसी आधार पर परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी हासिल कर गोरखपुर जिले में कार्यरत थी। इसी बीच शासन के निर्देश पर दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रशिक्षण पाए सभी शिक्षकों को लखनऊ में सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड के सामने बुलाया गया। इसके तहत डायट रामपुर कारखाना से प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों के प्रमाण-पत्र भी खंगाले गए। 

इसमें डायट रामपुर कारखाना में भी विकलांग प्रमाण-पत्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षकों को बुलाकर उन्हें लखनऊ जाने के लिए सूचित किया जाने लगा। इसी दौरान डायट की जांच में शिक्षिका चित्रलेखा के विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथियां अंकित मिलीं। एक तिथि आवेदन करने की अंतिम तिथि के पूर्व की अंकित थी। 


वहीं दूसरी तिथि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद की अंकित थी। मामला संदिग्ध लगा तो डायट प्राचार्य ने शिक्षिका को चार जून को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने को कहा। शिक्षिका उपस्थित नहीं हुईं तो दूसरी बार 15 जून को नोटिस दिया गया। इस बार भी शिक्षिका डायट नहीं पहुंची। तीसरी बार तीन जुलाई को फिर डायट से नोटिस भेजा गया। इस बार नोटिस रीसिव नहीं हुआ और पत्र वापस आ गया। 

इसके बाद डायट प्राचार्य ने विकलांग प्रमाण-पत्र को गोरखपुर सीएमओ कार्यालय को भेजकर सत्यापित कराया। इसमें प्रमाण-पत्र सही मिला, पर आवेदन की अंतिम तिथि के बाद 09.03.2009 को प्रमाण-पत्र जारी किया गया था। विज्ञापन की शर्त के अनुसार सभी प्रमाण-पत्र अंतिम तिथि के पूर्व जारी होने चाहिए थे। डायट प्राचार्य ने इस आधार पर शिक्षिका का विशिष्ट बीटीसी-2008 के प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया है।


चित्रलेखा ने विशिष्ट बीटीसी के आवेदन में लगाया गए विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथि अंकित है। इसका सत्यापन सीएमओ गोरखपुर से कराया गया है। सीएमओ ने प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि 09.03.2009 बताई है। इससे स्पष्ट है कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद विकलांग प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। गड़बड़ी पाए जाने पर चित्रलेखा का प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया गया है।
राजेंद्र प्रसाद यादव, प्राचार्य, डायट

Tuesday, August 4, 2020

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

 
गोरखपुर: परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जनपद में भी शिक्षकों को तीन माड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल के अनुसार शिक्षकों को बच्चों को तैयार करना है।


सरकार की मंशा वर्ष-2021 तक प्रेरक प्रदेश बनाना है। जनपद के बीआरसी पर नियमित 25-25 टीचर्स की ऑनलाइन प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को अपने स्कूल के हर बच्चे को उसके अनुसार तैयार करना होगा। यदि कक्षा एक का बच्चा है तो उसे 1 से 99 तक संख्या की पहचान हो, उसकी तुलना और संख्या को सही क्रम में लगाने आना चाहिए। शासन थर्ड पार्टी से स्कूल के बच्चों की परीक्षा लेगा। जब बच्चे मॉडयूल्स के हिसाब से तैयार हो जाएंगे तब ही स्कूल को प्रेरक का दर्जा मिलेगा।


शिक्षक को भरना होगा ब्योरा : शिक्षक को प्रेरक स्कूल बनाने के लिए बच्चों को पढ़ाने के साथ ही नियमित प्रेरणा तालिका भरनी होगी। इसमें प्रेरक हो चुके और इससे वंचित बच्चों की संख्या देनी होगी। कब तक बच्चे प्रेरक बन जाएंगे ये भी शिक्षक को चार्ट में भरना होगा। जब सभी बच्चे प्रेरक हो जाएंगे तो इसकी जानकारी शिक्षक अपने अधिकारी को देंगे, जिसके आधार पर शासन द्वारा थर्ड पार्टी भेजकर स्कूल की जांच कराई जाएगी।


क्या है किस माड्यूल की खासियत

आधारशिला मॉडयूल: पहला मॉडयूल आधारशिला प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए होगा। इसमें कक्षा एक से पांच तक बच्चों की बेसिक जानकारी और आधार को मजबूत करना होगा।

ध्यानकर्षण मॉडयूल: दूसरे मॉडयूल ध्यानाकर्षण में क्लास 6-8 तक के बच्चों पर काम करना होगा। यह वो बच्चे होंगे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनको खोजकर चिह्नित कर दोबारा स्कूल वापस लाया जाएगा। इन बच्चों की छूटी पढ़ाई व पाठ्यक्रम को पूरा कराना होगा।

शिक्षण संग्रह मॉडयूल: तीसरा मॉडयूल शिक्षण संग्रह शिक्षकों के लिए बनाया गया है। इसमें शिक्षक कैसे लेसन प्लान तैयार करता है। साथ ही शिक्षकों को पढ़ाई के रोचक तरीकों पर काम होगा।

परिषदीय स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर प्रेरक प्रदेश बनाने की कवायद चल रही है। बीआरसी पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिसके बाद शिक्षक विद्यालय में बच्चों को कक्षावार तैयार करेंगे। - भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए