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Monday, August 3, 2020

आश्रम पद्धति विद्यालयों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल, जांच के आदेश

आश्रम पद्धति विद्यालयों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल, जांच के आदेश

 
लखनऊ । प्रदेश के आश्रम पद्धति विद्यालयों में कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। बलरामपुर में गुणवत्ता खराब मिलने पर निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। साथ ही जांच के आदेश दिए गए हैं। बलरामपुर के आश्रम पद्धति विद्यालय में दो करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से रसोई, डॉरमेट्रो और डाइनिंग हॉल का निर्माण कराया जा रहा है। कुछ दिनों पहले समाज कल्याण राज्यमंत्री जीएस धर्मेश ने वहां मौका मुआयना किया तो पाया कि काम की गुणवत्ता मानक के अनुसार नहीं है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए।



 इस आश्रम पद्धति विद्यालय का संचालन जनजातीय =e निदेशालय करता है। इस बारे में संपर्क किए जाने पर अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह ने बताया कि गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर काम रुकवा दिया गया है। मामले की जांच भी कराई जा रही है। जहां भी गुणवत्ता खराब मिलेगी, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

Saturday, August 1, 2020

उच्च शिक्षा : निदेशालय ने तलब किया संदिग्ध शिक्षकों का ब्योरा

उच्च शिक्षा : निदेशालय ने तलब किया संदिग्ध शिक्षकों का ब्योरा।

प्रयागराज :  उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश में स्थित राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों की जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है, लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। संदिग्ध शिक्षकों की अलग से जांच कराए जाने के लिए शासन को संस्तुति भेजने के साथ ही निदेशालय ने संबंधित शिक्षकों का ब्योरा भी तलब कर लिया हैं।

अभिलेखों की जांच-पड़ताल के बाद शिक्षकों का भी पक्ष लिया जाएगा और फिर कोई कार्रवाई की जाएगी। साथ ही निदेशालय ने सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध शिक्षकों की नियुक्ति अगर फर्जी है तो स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट करें। उच्च शिक्षा निदेशालय ने राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 11412 शिक्षकों की जांच कराई है और इनमें से 27 मामले संदिग्ध पाए गए हैं। यह जांच क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से कराई गई थी।




क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में कुछ जनपदों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर संदेहास्पद, फर्जी पाए गए, अनियमित या अन्य कारण अंकित किए गए हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं की गई है। निदेशालय ने पत्र जारी कर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने क्षेत्र के तहत जनपदवार संदेहास्पद, अनियमित, फर्जी पाए गए या अन्य कारण का विस्तृत विवरण संकलति कर निदेशालय के ई मेल पर चार अगस्त को दोपहर एक बजे तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि शासन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके।

अभिलेखों की जांच-पड़ताल पूरी होने के बाद शिक्षकों का लिया जाएगा पक्ष।

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उच्च शिक्षा के 27 शिक्षक जांच  में मिले संदिग्ध, निदेशालय ने शासन को भेजी रिपोर्ट, संदिग्ध की विस्तृत जांच की मांगी इजाजत।

प्रयागराज : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों तथा राजकीय और सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के अभिलेखों की जांच पूरी कर ली गई है। प्रदेश के 11412 शिक्षकों की जांच के दौरान 27 शिक्षकों के अभिलेख संदिग्ध मिले हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय ने शासन की जांच रिपोर्ट भेजने के साथ ही संदिग्ध मिले 27 शिक्षकों के बारे में जानकारी देते हुए इनकी विस्तृत जांच कराने की इजाजत मांगी है।






शासन के निर्देश पर हुई इस जांच के लिए टीमें गठित की गई थीं। टीमों ने राज्य विश्वविद्यालयों तथा राज्य और सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में कार्यरत 11412 शिक्षकों के अभिलेखों की जांच की। संदिग्ध मिले कुछ शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों में गड़बड़ी मिली है तो कुछ के जाति आदि प्रमाण पत्र तो कुछ के नियुक्ति पत्र में गड़बड़ी मिली है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ.वंदना शर्मा ने बताया कि दो तरह से जांच हो रही है। एक तो अभिलेखों की जांच हुई है और दूसरा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करवाया जा रहा है।


 बकौल निदेशक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड विवरण में गड़बड़ी एनआईसी से पकड़ी जाएगी, जिसमें अभी समय है। अभिलेखों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है, जिसमें 27 संदिग्ध मामले मिले हैं। शासन से इजाजत मिलने के बाद जांच कमेटी गठित कर विस्तृत जांच कराई जाएगी। इस जांच में संबंधित शिक्षक के अभिलेख जहां-जहां से जारी हुए हैं, वहां अभिलेखों को भेजकर विस्तृत जांच कराई जाएगी। संबंधित शिक्षक का भी बयान लिया जाएगा। इसमें जो निष्कर्ष निकलेगा उसके मुताबिक आगे कार्यवाही की जाएगी।


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Thursday, July 30, 2020

आगरा : आगरा विवि के फर्जी घोषित करने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र वाले 171 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ

आगरा : आगरा विवि के फर्जी घोषित करने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र वाले 171 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ 


आगरा। जिले के परिषदीय प्राथमिक और उप प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत और एसआईटी की सूची में शामिल 171 और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से अपना पक्ष रखने वाले 12 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किए जाने से बेसिक शिक्षा विभाग का काम आसान हो गया है। अब सूची प्राप्त होने का इंतजार है। बेसिक शिक्षा विभाग ने विवि के बीएड सत्र 2004-05 को एसआईटी की ओर से तैयार फर्जी एवं टेम्पर्ड प्रमाण पत्रों की सूची से जिले में 249 शिक्षकों को चिह्नित किया था।


इसमें से 195 का नाम फर्जी प्रमाणपत्र और फर्जी घोषित किए सूची में शामिल गए 812 अभ्यर्थियों की सूची में नाम प्रशासन ने सात होने की उम्मीद 54 का नाम टेपर्ड प्रमाणपत्रों की फरवरी 2020 को एसआईटी की सूची में शामिल 2823 अभ्यर्थियों को फलों घोषित कर दिया इन अभ्यर्थियों में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ललित 195 में से 24 शिक्षकों के नाम थे। इनको बर्खास्त कर दिया गया है। का 171 अभ्यर्थियों का वेतन रोका गया है। इनके खिलाफ खस्तगी की कार्रवाई के लिए विवि में अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों पर निर्णय लिए जाने का इंतजार किया जा रहा था। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव ने सूची के लिए विवि के अधिकारियों से संपर्क भी किया था। इनका कहना है कि सूची मिलने के साथ बाकी चिन्हित शिक्षकों के नाम से मिलान करने के बाद बास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।

अलीगढ़ : संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से बीएड करने वाले 22 शिक्षकों की होगी जांच


अलीगढ़ : संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से बीएड करने वाले 22 शिक्षकों की होगी जांच


बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में काम करने वाले 22 शिक्षकों के खिलाफ जांच की तलवार लटक गई है। संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी से बीएड करने वाले इन शिक्षकों के नाम एसआईटी ने अपने संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची में शामिल किए हैं, जिसके बाद इन सभी के शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन करवाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।


जानकारी के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में फर्जी शिक्षकों का प्रकरण उजागर होने के बाद विभाग लगातार शिक्षकों की जांच करवा रहा है। इस दौरान एसआईटी ने विभाग को 16 ऐसे शिक्षकों की सूची भेजी है जिनकी डिग्री संदेहास्पद है और इसकी जांच कराई जानी चाहिए। इन सभी शिक्षकों ने है वाराणसी स्टेशन वाराणसी के संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री हासिल की है।


 एसआईटी से 16 शिक्षकों की सूची हासिल होने के बाद विभाग ने मानव सम्पदा पोर्टल पर अपलोड जानकारी से मिलान करके 6 शिक्षकों के नाम और शामिल किए हैं जिन्होंने संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से ही बीएड किया है। इन सभी के मामले भी एक जैसे हैं और संदेह के घेरे में है। अब विभाग ने इन सभी 22 शिक्षकों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इन विद्यालयों में कार्यरत है यह शिक्षक

जिले के जिन शिक्षकों की बीएड डिग्री की जांच विभाग ने शुरु करी है वह सभी अलग-अलग विद्यालयों में कार्यरत हैं। इन शिक्षकों की ड्यूटी प्रावि दीनापुर बिजौली, प्रावि नगला बाटुल, प्रावि पाली मुकीमपुर, प्रावि सांकरा, प्रावि खैमपुर, प्रावि नगला मढ़ैया, प्रावि भवानीपुर, प्रावि अजाहरी, प्रावि सरकोरिया, प्रावि नगला पटवारी, प्रावि सीयपुर, प्रावि आजादनगर, प्रावि केसीनगला, प्रावि नगला भोपा, प्रावि महारावल, प्रावि उटवारा नम्बर 1, प्रावि उटवारा नम्बर 2, प्रावि जट्टारी नम्बर 2, प्रावि शाहनगर सौरोला, प्रावि सिकंदरपुर, प्रावि संग्रामपुर, प्रावि टीकरी कनोवी में कार्यरत है। इन सभी के बीएड डिग्री का सत्यापन किया जाएगा।

शिक्षकों की बीएड डिग्री में संदेह की स्थिति होने के कारण इनके सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है। अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आई तो इनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। -डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी।

आक्रोश : हेडमास्टरों की जांच के लिए अधीनस्थ संविदाकर्मियों को दी गयी जिम्मेदारी

आक्रोश : हेडमास्टरों की जांच के लिए अधीनस्थ संविदाकर्मियों को दी गयी जिम्मेदारी


बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत होने वाले विकास कार्यों की जांच संविदा पर काम करने वाले शिक्षकों को सौंपी गई है। विभाग के पोर्टल पर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट अपलोड करने के लिए इन शिक्षकों की ट्रेनिंग भी पूरी कराई जा चुकी है।


जानकारी के अनुसार बेसिक शिक्षा निदेशालय से आने वाली विकास कार्यों की राशि से वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में जिले के विभिन्न स्कूलों में विकास कार्य कराए गए हैं। इसके साथ ही कार्य करती योजना के तहत ग्राम पंचायत से मिलने वाली विकास राशि से भी विकास काम हो रहे हैं। इसमें स्कूलों में चार दिवारी, शौचालय, पीने के पानी के लिए हैंडपंप, फर्नीचर, स्पोर्ट्स किट ऑन लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। अब निदेशालय ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पिछले 3 सालों में किए गए इन सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। 


लेकिन विभाग की ओर से यह कार्य विशेष शिक्षकों और विभाग में काम करने वाले फिजियोथैरेपिस्ट को सौंपा गया है। यह विशेष शिक्षक व फिजियोथैरेपिस्ट विभाग में संविदा शिक्षक के रूप में कार्य करते हैं। इसके साथ ही इन सभी की ड्यूटी स्कूलों में हेड मास्टर के अंडर में रहती है। ऐसे में अब जब इन सभी शिक्षकों को विद्यालय में जाकर किए गए विकास कार्यों को देख कर बहुत ही सत्यापन करने के लिए कहा गया है तो या इस काम से कतरा रहे हैं।


 इसका कारण यह है कि संविदा पर काम करने वाले सभी शिक्षक किसी न किसी हेड मास्टर के अंडर में ही अपनी ड्यूटी करते हैं। विद्यालय से जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर इन सभी शिक्षकों की संविदा को आगे बढ़ाया जाता है। इसके साथ ही विभाग में इस बात का भी विरोध हो रहा है कि संविदा पर काम करने वाले यह शिक्षक किस तरह से स्कूलों का भौतिक सत्यापन करेंगे।

विकास कार्यो की रिपोर्ट नकारात्मक गई तो संबंधित पर होगी कार्यवाही

परिषदीय स्कूलों में होने वाले सभी कामकाज हेड मास्टर की देखरेख में और एसएमसी सदस्यों की स्वीकृति के बाद ही कराए जाते हैं। विद्यालय के सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराना हेडमास्टर की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में अगर भौतिक सत्यापन के दौरान किसी स्कूल में गड़बड़ी पाई गई और वहां के काम मांगों के अनुकूल ना मिले तो उस हेड मास्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। जिसके कारण हेड मास्टर की मांग लिया है कि अगर यह जांच कराई जा रही है तो इसके लिए उच्च अधिकारियों को नियुक्त किया जाए।


निदेशालय ने स्कूलों में किए गए विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन के लिए विशेष शिक्षकों और फिजियोथैरेपिस्ट की नियुक्ति किए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी विभाग की ओर से इस काम को रोक दिया गया है और जल्दी ही इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। विभाग के अगले आदेश आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। -डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी

Tuesday, July 28, 2020

69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने धीमी जांच पर उठाए सवाल

69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने धीमी जांच पर उठाए सवाल


प्रयागराज : सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा में मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव समेत अन्य फरार अभियुक्तों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग अब आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने की है। उन्होंने स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) की धीमी जांच और कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए सवाल उठाए हैं। साथ ही आइजी एसटीएफ को पत्र लिखकर अपेक्षित कार्रवाई न होने की शिकायत की है। 


प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा को लेकर सोरांव थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस फर्जीवाड़े में धूमनगंज निवासी चंद्रमा यादव, भदोही का मायापति दुबे, प्रतापगढ़ का दुर्गेश पटेल और सरगना डॉ. केएल पटेल के दो साले समेत कुल आठ अभियुक्त अभी तक फरार चल रहे हैं। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि उन्होंने 15 जून 2020 को प्रयागराज एसटीएफ के एसपी को डॉक्यूमेंट, ऑडियो व वीडियो रिकाíडंग के साथ कई जानकारी वाट्सएप के माध्यम से भेजी थी। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव सहित कई अभियुक्त फरार हैं। उन्होंने विवेचना में देरी और लापरवाही होने पर परिणाम गलत होने की आशंका जताई है।


 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा 2019 की परीक्षा के दौरान लीक हुए पर्चे और पकड़े गए साल्वर गिरोह के खिलाफ दर्ज मुकदमों में भी आधी-अधूरी कार्रवाई का आरोप भी अमिताभ ठाकुर ने लगाया है। कहा है कि प्रयागराज समेत अन्य शहरों में कुल 18 मुकदमे दर्ज किए गए थे। उनकी विवेचना धीमी है।