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Sunday, January 3, 2021

विधायक की शिकायत पर बीएसए रामपुर के खिलाफ जांच के आदेश, बनी संयुक्त जांच कमेटी को 15 दिन में करनी होगी जांच

विधायक की शिकायत पर बीएसए रामपुर के खिलाफ जांच के आदेश, बनी संयुक्त जांच कमेटी को 15 दिन में करनी होगी जांच

● संयुक्त शिक्षा निदेशक व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक बरेली की बनी संयुक्त जांच कमेटी

● मिलक विधायक ने की थी शिकायत शासन ने दिए जांच के आदेश

शासन ने विधायक की इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले में शासन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है जिसमें जेडी और एडी बरेली को शामिल किया गया 


रामपुर। विधायक राजबाला की शिकायत पर बीएसए ऐश्वर्य लक्ष्मी के खिलाफ जांच बैठा दी गई है। इसके लिए बरेली के (जेडी) संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं बरेली के ही (एडी) मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। इसमें शासन ने कमेटी को पंद्रह दिनों के भीतर जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं। मिलक विधायक राजबाला ने भी पिछले दिनों इसे लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इसमें उन्होंने तमाम गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों के निलंबन एवं बहाली में खेल किया जा रहा है।


शिक्षकों को बिना समुचित कारण के निलंबित कर दिया जाता है और फिर उन्हें बहाल कर सुविधाजनक विद्यालय में पद स्थापित कर दिया जाता है। शिक्षकों के संबद्धीकरण में भी गड़बड़ी की जा रही है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। महिला शिक्षिकाओं के सीसीएल के आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी की जाती है। उन्होंने मृतक आश्रितों की नियुक्ति समेत एडेड विद्यालयों में नियुक्ति को लेकर भी तमाम गंभीर आरोप लगाए हैं।


कमेटी को पंद्रह दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी। जेडी ने इस मामले में बीएसए को पत्र भेजकर जवाब तलब किया है। साथ ही शिकायत के विभिन्न विंदुओं पर बिंदुवार रिपोर्ट तलब की है।


Tuesday, December 29, 2020

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को स्वेटर तो बांट दिए गए हैं, लेकिन विभाग ने उनकी लैब टेस्टिंग कराने की जहमत नहीं उठाई। अभी तक किसी भी ब्लॉक से एक भी स्वेटर का सैंपल लैब टेस्टिंग के लिए नहीं भेजा गया है।


जिले में परिषद विद्यालयों के प्राइमरी और जूनियर में करीब 1.96 लाख छात्र पंजीकृत हैं। करीब 98 प्रतिशत छात्रों को स्वेटर बांट दिए गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्वेटर की लैब टेस्टिंग नहीं कराई है। उल्टा सत्यापन कराया जा रहा है, जबकि लैब टेस्टिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा लैब टेस्ट से स्वेटर की गुणवत्ता का पता चलता है स्वेटर में कितने प्रतिशत ऊन है, इसकी जानकारी लैब टेस्टिंग से ही होती है। अक्सर देखा गया है स्वेटर पहनने के कुछ दिनों बाद उनकी सिलाई खुलने लगती है। कई जगहों से वे फटने लगते हैं लैब टेस्टिंग में इसकी गड़बड़ी पकड़ में आ जाती है।


जिन्होंने बंटवाए स्वेटर, वही कर रहे सत्यापन

स्वेटरों का विभागीय अधिकारियों की ओर से सत्यापन कराए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। जिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्वेटर वितरित कराए उन्हीं से उनका सत्यापन भी कराया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि जिन्होंने गड़बड़ी को अंजाम दिया उनको ही जांच अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे ! होगी। कोई भी अधिकारी अपने क्षेत्र के 10 अच्छे की ओर से सत्यापन करवाना खानापूर्ति करना है।

हर अधिकारी 10-10 स्वेटर का करेगा सत्यापन

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि अभी लैब टेस्टिंग के लिए कोई स्वेटर नहीं भेजा गया है। फिलहाल गुणवत्ता को लेकर गड़बड़ी की शिकायत भी नहीं आई है। केवल स्वेटर की साइज को लेकर शिकायत है इसलिए रैंडम सत्यापन कराया जा रहा है। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 10-10 स्वेटरों का सत्यापन करके रिपोर्ट देगे। वहीं 117 न्याय पंचायतों में भी सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद पता चल जाएगा कि छात्रों को सही साइज के स्वेटर मिले हैं या नहीं।

Saturday, December 19, 2020

लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को वितरित स्वेटर की गुणवत्ता और इनके अंडरसाइज होने की जांच शुरू हो गई है । इसकी दोहरी जांच कराई जा रही है। जिला स्तर पर टास्क फोर्स जांच कर रही है, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के स्तर पर भी इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद के आदेश के बाद शुक्रवार को बीएसए दिनेश कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी जांच के काम में लगा दिया है।


प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को घटिया स्वेटर वितरित करने का मामला संज्ञान में आया था। शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। इस मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं। महानिदेशक ने जिलेवार टास्क फोर्स बनाई थी। जो जांच कर रही है । अब उन्होंने 17 दिसंबर को आदेश जारी कर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी इसकी जांच कराने का निर्देश दिया है। स्वेटर की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला समन्वयक स्वयं करेंगे। इन अधिकारियों को प्रत्येक ब्लाक के 10 विद्यालयों में जाकर जांच करनी होगी। एक विद्यालय के न्यूनतम 5 छात्र तथा 5 छात्राओं के अभिभावकों से संपर्क करना होगा। रिपोर्ट में उन्हें विकासखंड का नाम, विद्यालय का नाम, नामांकित छात्र का नाम व कक्षा, अभिभावक का नाम व मोबाइल नंबर तथा अभिभावक का फीडबैक देना ह होगा। अभिभावक से पूछना होगा कि बच्चों को स्वेटर मिला है अथवा नहीं। स्वेटर की साइज ठीक है या नहीं। गुणवत्ता संतोषजनक है अथवा नहीं। यह सारी रिपोर्ट 24 दिसंबर 2020 तक हर हाल में महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजनी होगी।


बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने स्कूलों में स्वेटर की जांच के लिए रूट चार्ट जारी कर दिया है। सभी ब्लॉकों के साथ नगर क्षेत्र के 10- 10 स्कूलों की जांच के लिए रूट चार्ट बनाया गया है। किन-किन स्कूलों में जांच करनी है। इसकी सूची भी उन्होंने जारी कर दी है।

Sunday, December 13, 2020

मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में मनमानी में फंसेंगे कई जिम्मेदार, कई बड़े अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई

यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई, यह है पूरा मामला

मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में मनमानी में फंसेंगे कई जिम्मेदार

भ्रष्टाचार की शिकायत पर विजिलेंस कर रही है नियुक्तियों की जांच, जिम्मेदारों से की जा रही पूछताछ

पहले मरने वाले आश्रितों को बाद में दी नौकरी, जो कि उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी


आगरा : बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों की नियुक्ति में अधिकारी और कर्मचारियों पर शिकंजा कस सकता है। नियुक्तियों में मनमानी की शिकायत शासन में की गई थी। मामले की जांच विजिलेंस कर रही है। दो साल से चल रही जांच ने अब तेजी पकड़ ली है। विजिलेंस द्वारा जिम्मेदार लोगों से पूछताछ की जा रही है।

शिक्षा विभाग में छह साल के दौरान दो दर्जन से ज्यादा नियुक्तियां हुई थीं। नियमानुसार ड्यूटी के दौरान विभाग के जिन कर्मचारियों या शिक्षकों की मृत्यु पहले हुई थी, उनके आश्रितों को पहले नौकरी मिलनी चाहिए थी। विभाग के जिम्मेदार लोगों ने ये नियुक्तियां वरीयता क्रम के अनुसार न देकर अपने हिसाब से दीं। जिन लोगों की मृत्यु बाद में हुई थी। उन्हें पहले नियुक्ति दे दी गई। वहीं जिन लोगों की पहले मृत्यु हुई थी। उनके आश्रितों को बाद में नियुक्ति दी, जो कि उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी। मृतक आश्रितों ने विभाग की इस मनमानी और अनियमितता की शिकायत शासन से की थी। शासन ने दो साल पहले विजिलेंस को मामले की जांच सौंपी ।

विजिलेंस ने जांच शुरू करते हुए नियुक्ति से संबंधित रिकार्ड तलब किया। उसे कई महीने तक यह रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। विजिलेंस से कहा गया कि फाइल नहीं मिल रही है। इसके बाद विजिलेंस ने शिक्षा विभाग के जिन कर्मचारियों के पास यह रिकार्ड था, उसे भी अपनी जांच में शामिल कर लिया। बताया जाता है कि विभाग के लोगों से पूछताछ के लिए विजिलेंस ने सवालों की पूरी सूची तैयार की है। इसी के आधार पर पूछताछ होगी।


बेसिक शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों पर कार्रवाई अब हो सकती है, जल्द ही इसमें शासन की ओर आदेश निर्देश जारी हो सकते हैं। दरअसल पूरा मामला मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति को लेकर है। इस मामले में दो साल पहले शासन को शिकायत मिली थी, जिसके बाद बिजलेंस जांच चल रही थी। ​बताया जा रहा है मृतक आश्रित के तहत नौकरी दिए जाने पर बड़े स्तर पर खेल हुआ, इसकी लिखित शिकायत शासन में की गयी थी। अब शासन ने नियुक्ति से जुड़ी सभी फाइलों को तलब किया है।


नियुक्ति में शमिल लोगों की भूमिका की जांच
​मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई नियुक्तियों की भूमिका भी जांच की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों से पूछता भी चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। विभाग के उच्च अधिकारियाों की माने तो कार्रवाई का दायरा बड़ा हो सकता है।


अभी तक करीब 28 नियुक्तियां की गयी, जिसमें इस तरह हुआ खेल
​बताया जा रहा है ​कि पिछले समय से लेकर अभी तक विभाग ने 28 सीटों पर मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति की गयी है। इसमें नियम था कि जो आॅन ड्यूटी के दौरान कर्मचारी या शिक्षक मरा है तो उसके आश्रित को पहले नौकरी दी जानी चाहिए। लेकिन ऐसा न करके अधिकारियों ने खेल कर दिया और पहले आओ पहले पाओ के आधार पर नियुक्ति दे दी है। इस संबंध में आश्रितों के ​परिजनों ने लिखित शिकायत शासन में की थी। जिसके बाद अब सरकार एक्शन मे हैं।


शैक्षिक योग्यता का भी नहीं रखा ध्यान
मृतक आश्रित कोटे के तहत ​दी गयी नियुक्तियों में अधिकारियों ने ​शैक्षिक योग्यता का भी ध्यान नहीं रखा। शिकायत के बाद शासन ने दो साल पहले ही बिजलेंस को जांच सौपी थी अब एक फिर कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो चुका है।

Monday, December 7, 2020

पुलिस मुख्यालय ने पूछा, कितने फर्जी शिक्षक पकड़े? शासन की मंशा पर होगी सख्ती

पुलिस मुख्यालय ने पूछा, कितने फर्जी शिक्षक पकड़े? शासन की मंशा पर होगी सख्ती


गोरखपुर।
बर्खास्त किए जा चुके फर्जी शिक्षकों की मुसीबतें अब और बढ़ने जा रही हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी करेगी। फरार चल रहे आरोपितों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी करेगी। पुलिस मुख्यालय लखनऊ ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है और एसएसपी से पूछा है कि कितने फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कितने गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कितनों की सम्पत्तियां कुर्क की गई हैं। पुलिस मुख्यालय ने अपनी सख्त मंशा भी जाहिर की है। पुलिस अधिकारियों से कहा है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लें।


बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग के साथ ही समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्कूल-कॉलेजों में बड़ी संख्या में फर्जी नियुक्तियां की गई हैं। शासन की सख्ती के बाद की गई जांच में फर्जी शिक्षकों की काली करतूतों का खुलासा हुआ है। शासन की मंशा के अनुरूप पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शासन की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई है। एसटीएफ ने अपनी जांच-पड़ताल में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षकों को पकड़ा है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया है। सूत्रों का कहना है कि अकेले गोरखपुर जिले में 78 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। इनके खिलाफ जांच-पड़ताल चल रही है।


अपर पुलिस महानिदेशक अपराध डॉ. केएस प्रताप कुमार की एक चिट्ठी ने गोरखपुर पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी है। इस चिट्ठी ने शासन की मंशा भी जाहिर कर दी है कि फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने और करोड़ों रुपये डकार जाने वाले इन फर्जी शिक्षकों को सरकार बख्शने वाली नहीं है। पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस प्रमुखों को स्पट तौर पर निर्देश दिया है कि इस मामले को प्राथमिकता पर लें और यह रिपोर्ट तैयार कर भेजें कि कितने फर्जी शिक्षकों को चिह्नित किया गया है। कितने की सेवा समाप्त की गई है। जिनकी सेवा समाप्त की गई उनमें से कितनों से वसूली की जा चुकी है। कितनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। कितने फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस मुख्यालय ने यह भी पूछा है कि कितने की सम्पत्तियां कुर्क की गई हैं। कितनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।


थानेदारों ने तेज की विवेचनाएं
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय से चिट्ठी आने के बाद एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने भी सख्ती दिखाई है। एसएसपी की सख्ती के बाद फर्जी शिक्षकों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की थानेदारों और चौकी प्रभारियों ने विवेचनाएं तेज कर दी हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिन फर्जी शिक्षकों के खिलाफ अभियोग दर्ज है और जो फरार चल रहे हैं उन पर दबाव बनाने के लिए पुलिस उनके खिलाफ न्यायालय से कुर्की का आदेश लेगी।

Tuesday, November 17, 2020

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू


लखनऊ: शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बीच माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट को अमान्य करार दिया है। परिषद की सचिव ने स्पष्ट कहा है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन की परीक्षाएं न तो पूर्व में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के समकक्ष थीं और न वर्तमान में हैं।


दरअसल, राजधानी समेत प्रदेशभर में हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंक पत्रों के आधार पर तमाम शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। शासन के निर्देश पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू हुआ तो ऐसे मामले सामने आए। बीते दिनों शासन के आदेश पर प्रदेशभर के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई थी।


 इसमें राजधानी में लखनऊ मांटेसरी इंटर कालेज, रामाधीन सिंह इंटर कालेज, मुमताज इंटर कालेज समेत कई अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों में हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट पर कई शिक्षक नौकरी करते मिले। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मुकेश कुमार ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।