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Friday, October 30, 2020

फतेहपुर : शैक्षिक सत्र 2020-21 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत निःशुल्क यूनीफार्म हेतु अवमुक्त की गई 75% धनराशि का व्यय सम्बंधित उपभोग प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : शैक्षिक सत्र 2020-21 में समग्र शिक्षा के अंतर्गत निःशुल्क यूनीफार्म हेतु अवमुक्त की गई 75% धनराशि का व्यय सम्बंधित उपभोग प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।

Saturday, October 3, 2020

फतेहपुर : कमीशन के खेल में उलझ गई बच्चों की यूनिफॉर्म, एसएमसी व ठेकेदारों की मिलीभगत से हो रहा खेल, 74 फीसदी ही वितरित हो पाईं यूनिफार्म

फतेहपुर : कमीशन के खेल में उलझ गई बच्चों की यूनिफॉर्म, एसएमसी व ठेकेदारों की मिलीभगत से हो रहा खेल, 74 फीसदी ही वितरित हो पाईं यूनिफार्म।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को निःशुल्क दी जाने वाली यूनिफार्म का वितरण अभी तक 74 फीसदी ही हो पाया है। जबकि वितरण की अंतिम तिथि 30 सितम्बर निर्धारित थी। वहीं यूनिफार्म तैयार करने में भी मानकों की जमकर धज्जियां उड़ती दिख रही हैं। अधिकांश ड्रेस बिना नाप के होने के कारण बच्चों के लिए बेमकसद साबित हो रही हैं।


जिले में बच्चों के निःशुल्क यूनिफार्म वितरण की मंशा पर विद्यालय की एसएमसी और ठेकेदारों ने पानी फेर दिया। नाप लेकर स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं से सिलाई कराकर यूनिफार्म मुहैया न कराकर सीधे यूनिफार्म वितरण की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदारों को सौंप दी। यूनिफार्म वितरण में मोटा कमीशन ले कर कपड़े कीगुणवत्ता को तार तार कर दिया गया। ऐसा नहीं है कि इसमें केवल शिक्षक की दोषी हों बल्कि विभागीय अधिकारियों को भी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। जिले के परिषदीय स्कूलों में करीब 2.33 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। कमीशन के खेल में शामिल जिम्मेदारों को कोई गुरेज नहीं है। आलम यह है कि यूनिफार्म वितरण की समय सीमा बीत जाने के बाद भी। अभी तक 26 प्रतिशत बच्चों के हाथ यूनिफार्म नहीं पहुंच सका है।  मानकों के साथ खिलवाड़ परिषदीय स्कूलों के प्रति बच्चे कोदो सेट यूनिफार्म दिया जाना है। प्रति यूनिफार्म की दर से तीन सौ रुपए निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही कपड़े की गुणवत्ता के लिए भी मानक तय किए गए । साथ ही कहा गया है कि शिक्षक बच्चों की नाप लेकर स्थानीय स्तर पर कपड़ा सिलाने की व्यवस्था करें, ताकि बच्चों को मजबूत और गुणवत्ता युक्त यूनिफार्म मिल सके।


लापरवाही : कमीशन के खेल में मिलीभगत से उलझ गई बच्चों की यूनिफार्म , एसएमसी व ठेकेदारों की मिलीभगत से हो रहा खेल।

कोरोना संक्रमण को लेकर यूनिफार्म वितरण में थोड़ा देर हो रही है। 74 प्रतिशत वितरण हो चुका है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार होने वाली करीब 56 हजार यूनिफार्म में 60 फीसद कार्य पूरा हो गया है। यदि एसएमसी एवं विभागीय कर्मचारियों द्वारा मानकों के साथ खिलवाड़ किया गया।-अखिलेश कुमार, जिला समन्वयक

Sunday, September 13, 2020

फतेहपुर : यूनीफार्म का 40 फीसदी ही हो पाया वितरण, परिषदीय स्कूलों में बच्चों को समय से स्वेटर दिए जाने का फरमान

फतेहपुर : यूनीफार्म का 40 फीसदी ही हो पाया वितरण, परिषदीय स्कूलों में बच्चों को समय से स्वेटर दिए जाने का फरमान।

फतेहपुट : संकट काल में भले ही परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए विद्यालय बंद चल रहे हों लेकिन इनको निशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली अभी जिले में 40 प्रतिशत ही शुरू हो गई है। इस बार भी प्रशासन सामग्री समय से देने के लिए शासन प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेजी पर हैं।

यूनिफार्म का वितरण हो पाया है कि अब स्वेटर वितरण की कवायद भी स्तर से जेम पोर्टल के माध्यम से स्वेटर की खरीद की जाएगी।

बच्चों को इस साल समय से निदेशालय और समग्र शिक्षा अभियान शैक्षिक सत्र में सभी बच्चों को 31 अक्टूबर तक स्वेटर बांटने का निर्देश दिया है। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को हर साल निःशुल्क एक स्वेटर देने का प्रावधान है। पिछले सत्रों में स्कूलों में स्वेटर देने के लिए बीएसए को स्वेटर की खरीद, आपूर्ति और वितरण की कार्यवाही रिपोर्ट रोजाना बेसिक शिक्षा के राज्य परियोजना कार्यालय को भेजने के निर्देश है। शासन ने चालू विद्यार्थियों को दिसंबर के अंत तक मुश्किल स्वेटर मिल पाए थे। इस पर विभाग की खूब किरकिरी हुई थी। इस प्रशासन ने समय से बच्चों को स्वेटर मुहैया कराने को नियत समय में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।




ई-टेंडरिंग के साथ जैम पोर्टल से होगी खरीद :  इस साल भी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के दो लाख से अधिक बच्चों को स्वेटर दिए जाने हैं। जिसकी खरीद और आपूर्ति जिला स्तर पर जेम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। स्वेटर की खरीद, आपूर्ति और वितरण के लिए शासन ने समय सारणी भी तय की है। बेसिक शिक्षा निदेशालय से जारी निर्देशो में सभी बीएसए को स्वेटर खरीद के सिलसिले में जिला स्तरीय समिति की बैठक की तिथि, जेम पोर्टल पर स्वेटर खरीदने के लिए ई टेंडर के प्रकाशन और बिड अपलोड करने और खोलने की तारीख की जानकारी देनी होगी।




समूह की महिलाओं ने दिखाई तेजी : परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत करीब 2 लाख 32 हजार 909 छात्र-छात्राओं को यूनीफार्म दिया जाना है। जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार देने के लिए इस बार करीब 65 हजार यूनीफार्म सिलने का काम सौंपा गया है।  जिन्होंने अब तक करीब 25 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। जिसका भुगतान एसएमसी द्वारा यूनीफार्म वितरण के बाद किया जाता है। हो रही लेट लतीफी को लेकर विभागीय हस्ताक्षेप के बाद समूह की महिलाओं ने यूनीफार्म तैयार करने में अब तेजी दिखाई है, जिसके चलते समय से ड्रेस वितरण कार्य पूरा हो सके।

बोले जिम्मेदार : परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं को यूनीफार्म वितरण कार्य तेजी | पर है। करीब 40 फीसदी बच्चों को वितरण किया जा चुका है। प्रशासनिक कमेटी |द्वारा जेम पोर्टल से स्वेटर खरीद की जाएगी। इसके पूर्व ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया कराई जा रही है।

-शिवेंद्र प्रताप सिंह




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Monday, September 7, 2020

हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से ज्यादा सिलनी हैं ड्रेस पर सिलीं 50 हजार, तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब?

हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से अधिक ड्रेस सिलकर करनी है तैयार।

हरदोई : जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के करीब चार हजार स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को मुफ्त ड्रेस वितरण में कोरोना, बजट आवंटन में देरी के बाद अब जिम्मेदारों की लापरवाही बाधक बन गई है। यही वजह है कि जिले में 15 सितंबर तक शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस मिल जाने का लक्ष्य पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अभिभावकों ने सांसदों, विधायकों से इस मामले में दखल देने की मांग की है ताकि गुणवत्तायुक्त ड्रेस समय से विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

जिले में करीब पौने पांच लाख बच्चों को ड्रेस वितरित की जानी है। एक बच्चे को दो सेट ड्रेस मिलेगी, जिसकी कीमत शासन से 600 रुपये निर्धारित की गई है।




मांग के सापेक्ष 75 फीसदी बजट शासन ने जारी करदिया है। शेष धनराशि सत्यापन के बाद भेजी जाएगी। जो धनराशि आई है उसे पीएफएमएस के जरिए स्कूल प्रबंधन समिति के खातों में भेज दिया गया है।

जिन स्कूलों में 167 या इससे ज्यादा बच्चे अध्ययनरत हैं वहां पर टेंडर प्रक्रिया के जरिए ड्रेस बंटवाई जानी हैं। वहीं जिन स्कूलों में 166 या इससे कम बच्चे हैं वहां पर स्वयं सहायता समूहों से सिलवाकर ड्रेस बांटनी हैं। इसके लिए प्रबंध समिति कपड़ा खरीदकर समूहों को उपलब्ध कराएगी। विभागीय जानकारों के मुताबिक पहले 31 अगस्त तक की समयसीमा ड्रेस वितरण के लिए निर्धारित की गई थी।

शासन-प्रशासन ने दावा किया था कि समय से ड्रेस बंट जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इसलिए 15 सितंबर तक की समय सीमा और बढ़ा दी गई है।

इसके बावजूद शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस वितरण मिलने की उम्मीदें टूटने लगी हैं क्योंकि ड्रेस वितरण की प्रगति बेहद धीमी है।

मानीटरिंग में भी केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। अब तक कितनी ड्रेस बंट चुकी हैं इसकी जानकारी तक जिम्मेदार नहीं दे पा रहे हैं।

चार से ज्यादा ड्रेस सिलनी हैं पर सिलीं 50 हजार : स्वयं सहायता समूहों को 4 लाख से ज्यादा ड्रेस सिलकर तैयार करनी हैं, लेकिन अब तक 70 हजार ड्रेस तैयार करने का ही आर्डर मिला है। वहीं 50 हजार ड्रेस ही अब तक सिल सकी हैं। इसका भुगतान अभी शून्य है। समितियों को ड्रेस सिलने की जिम्मेदारी मिले दो महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है। अब शेष एक सप्ताह में साढ़े तीन लाख से ज्यादा ड्रेस तैयार कराने की राह भी काफी मुश्किल है।

तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब :  ड्रेस वितरण में राजनीतिक दलों के नेताओं से जुड़े ठेकेदार भी सक्रिय हो गए हैं। चर्चा है कि सियासी पहुंच के कारण वे मनमानी पर उतारू हैं। वहीं ब्लाकों के अधिकारी भी खुश हुए बगैर उन्हें हरी झंडी देने में आनाकानी कर रहे हैं। कमीशनखोरी के इस खेल में सेटिंग के चक्कर में भी विलंब होने की बातें जानकार बता रहे हैं। बीते दिनों बीएसए को भी निरीक्षण के दौरान स्कूल में कपड़ा विभागीय नियमानुसार नहीं मिला था।

95 फीसदी से ज्यादा स्कूल प्रबंधन समितियों के खाते में बजट भेज दिया गया है। कुछ जगहों पर तकनीकी फाल्ट सामने आई है। इसे भी जल्द दूर कर खाते में धनराशि पहुंचा दी जाएगी। हेडटीचरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द धनराशि का आहरण कर बच्चों को ड्रेस वितरित करा दें।
-अमित वर्मा, जिला समन्वयक

कपड़ा खोलने में कोई दिक्कत नहीं है। तेजी से ड्रेस सिलने में समूह की महिलाएं जुटी हुई हैं। ड्रेस सिलाई का रेट भी निर्धारित हो गया है। 140 रुपये एक पैंट-शर्ट सिलने पर मिलेंगे। आपूर्ति होने के बाद भुगतान कराया मिलेगा। समय से समस्त ड्रेस सिलकर तैयार हो जाएंगी। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हैं। कोरोना के चक्कर में थोड़ा विलम्ब जरुर हुआ लेकिन अब कोई समस्या नहीं है। समय के साथ ड्रेस तैयार है।
-विपिन चौधरी, डीसी एनआरएलएम


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Saturday, September 5, 2020

फतेहपुर : ड्रेस वितरण में फंसा सिलाई व कपड़े का पेंच

फतेहपुर : ड्रेस वितरण में फंसा सिलाई व कपड़े का पेंच


धाता : परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस वितरण में स्वयं सहायता समूह को विद्यालय नामित कर दें।


धाता: परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस वितरण में स्वयं सहायता समूह को विद्यालय नामित कर देने के बाद वितरण के नियम स्पष्ट न होने से शिक्षक और विभागीय अधिकारी असमंजस में हैं। वितरण का मानक प्रत्येक जिले में अलग-अलग है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं विद्यालय के अध्यापकों से सिलाई की रकम को लेकर पूछताछ कर वापस लौट रही हैं। ड्रेस के एक सेट की कीमत 300 रुपये तय की गई है।




समूह की महिलाएं तय कीमत में 140 रुपये सिलाई बताती हैं। जबकि हाथरस के बीएसए ने अपने जनपद में जारी एक आदेश में स्पष्ट किया है कि 80 रूपये प्रति सेट सिलाई का निकालने के बाद 220 रुपये का कपड़ा खरीदा जाएगा। बताते चलें कि इससे पहले शिक्षकों द्वारा ड्रेस का वितरण किया जाता था। इसमे प्रबंध समिति की बैठक बुलाकर तीन दुकानों से कपड़े का कोटेशन लिया जाता था। उचित मूल्य व उचित गुणवत्ता के कपड़े को स्थानीय टेलर से सिलाई करा कर ड्रेस का वितरण होता था। इस वर्ष ब्लाक क्षेत्र के 110 परिषदीय विद्यालयों में महिला समूह द्वारा अनिवार्य रूप से ड्रेस वितरण का आदेश दिया गया है। समूह से जुड़ी महिलाएं स्कूल पहुंचकर बच्चों की संख्या का एक प्रपत्र भरवाती हैं। जिसमें लिखा हुआ है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सिर्फ कपड़े सिलने का कार्य दिया गया है। जबकि महिलाएं साथ में एक कपड़ा लगा हुआ ऐरायां ब्लॉक के नाम की रसीद प्रस्तुत करती हैं। उक्त रसीद में 160 रुपये कपड़े की कीमत दी गई है, 140 रुपये एक सेट की सिलाई निकाली गई है। 22 जून से पहले महिला समूहों को ड्रेस सिलाई आर्डर की रकम को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी है। अध्यापकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस संबंध में बीईओ, धाता सुनील कुमार सिंह का कहना था सभी विद्यालयों में महिला समूह द्वारा ही ड्रेस का वितरण किया जाएगा। एक सेट ड्रेस की सिलाई कितनी निर्धारित की गई है, इसके बारे में जानकारी नहीं है।



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Friday, August 28, 2020

कपड़ा दिखाया न नाप ली, तैयार कर दी ड्रेस, कागजों पर चल रहीं स्वयं सेवी संस्थाएं


लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दी जाने वाली निशुल्क यूनिफार्म वितरण में स्वयं सेवी संस्थाओं ने फिर खेल शुरू कर दिया है। मोहनलालगंज, माल व अन्य ग्रामीण ब्लाकों में स्वयं सेवी संस्थाओं ने विद्यालय में बच्चों की न नाप ली और नहीं विद्यालय प्रबंध समिति को कपड़े प्रबंध समिति का गठन की गुणवत्ता दिखाई पर यूनिफार्म तैयार करवा दी। खंड विकास अधिकारी की ओर से पत्र जारी करा कर स्वयं सेवी संस्था विद्यालय पर आपूर्ति का दबाव बना रही है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को निशुल्क यूनिफार्म का वितरण किया जाता है। इसके लिए विद्यालय स्तर पर प्रबंध समिति का गठन किया जाता है। इसमें शिक्षकों के साथ अभिभावक भी रहते हैं। जो कपड़े की गुणवत्ताजांच के बादयूनिफार्म सिलाई का आर्डरस्थानीय दर्जी, स्वयं सेवी संस्था या फिर ग्रामीण इलाकों के महिला समूह को दे सकते हैं। हालांकि हर ब्लाक में कुछ काम स्वयं सेवी संस्थाओं के जरिए कराने के निर्देश हैं। इसमें मोहनलालगंज में करीब 15 हजार यूनिफॉर्म सिलने की जिम्मेदारी स्वयं सेवी संस्थाओं को दी गई है।
शासनादेश के मुताबिक संस्थाओं से सिर्फ यूनिफॉर्म सिलाई का काम लिया जाएगा लेकिन संस्थाएं विद्यालय प्रबंध समिति को बिना कपड़े की जांच कराए और बच्चों की नाप लिए बिना ही यूनिफॉर्म तैयार कर रहे हैं। 



कागजों पर चल रहीं स्वयं सेवी संस्थाएं : यूनिफार्म तैयार करने वाली बहुत सी संस्थाएं सिर्फ कागजों पर ही चल रही हैं। जानकारों के अनुसार ये संस्थाएं खुद ड्रेस सिलने के बजाए उन्नाव मौरावां रोड स्थित एक दुकान से सस्ती ड्रेस खरीदकर विद्यालय में सप्लाई का दबाव प्रबंध समिति पर बना रहीं हैं। बीएसए दिनेश कुमार के मुताबिक उनको भी कई स्वयं सेवी संस्थाओं के बारे में पता किया गया कि मौके पर जाकर वहां जांच की जाए लेकिन उनके पते की जानकारी नहीं हो पा रही है।

शासन के उच्च शिक्षा अधिकारियों ने अपने आदेश में कहा है कि विद्यालय प्रबंध समिति प्रत्येक बच्चे का नाप करवाकर निःशुल्क यूनिफार्म स्वयं सहायता समूह/महिला समूह/स्थानीय दर्जी से सिलाई के लिए सेवा ले सकती है,परंतु 
ब्लाकों में ये समूह बिना नाप लिए यूनिफार्म स्कूलों में देने के लिए दबाव बना रहे,जो उचित नहीं है।
 - विनय कुमार सिंह, प्रान्तीय अध्यक्ष, 
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन

सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कपड़े की गुणवत्ता की जांच और बच्चों की नाप कराए बिना यूनिफार्म न लें। 
- दिनेश कुमार, बीएसए