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Friday, August 7, 2020

CBSE ने लिया बड़ा फैसला, 10वीं में स्टैंडर्ड मैथ्स नहीं होने पर भी 11वीं में ले सकते हैं विषय

CBSE ने लिया बड़ा फैसला, 10वीं में स्टैंडर्ड मैथ्स नहीं होने पर भी 11वीं में ले सकते हैं विषय।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं के पास 10वीं में स्टैंटर्ड मैथ्स नहीं थीवे भी 11वीं में गणित विषय ले सकते हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं के पास 10वीं में स्टैंटर्ड मैथ्स नहीं थी , वे भी अब 11वीं में गणित विषय का विकल्प चुन सकते हैं। सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल इस साल के लिए जा रही है। वहीं इस संबंध में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूल प्रमुखों को यह निर्देश दिए गए हैं कि, वह इस बात की जांच करें कि 11वीं में मैथ्स सब्जेक्ट का विकल्प चुनने वाले छात्र-छात्राओं के भीतर उसे आगे बढ़ाने की योग्यता हो और क्षमता हो। इस बात को कॉलेजों को सुनिश्चित करना होगा। बता दें कि यह फैसला कोविड-19 संक्रमण के दौरान पड़ रहे प्रभाव की वजह से लिया गया है।




सीबीएसई बोर्ड के नियमानुसार जिन छात्र-छात्राओं को 11वीं और 12वीं में मैथ्स विषय लेना होता है, उन्हें 10वीं में स्टैंटर्ड गणित को पढ़ना होता है। वहीं जो परीक्षार्थी हॉयर स्टडीज में गणित नहीं पढ़ना चाहते हैं, वे बेसिक मैथ्स पढ़ते हैं। यह नियम साल 2019 में जारी किया गया था, जिससे जो छात्र-छात्राएं गणित का विषय नहीं पढ़ना चाहते हैं, उन पर ज्यादा बोझ न पड़े।


वहीं सीबीएसई के नियम के अुनसार 10वीं के बाद अगर उसका मूड बदलता है और वह 11वीं में मैथ्स विषय को चुनना चाहता है तो वह 10वीं में कंपार्टमेंट परीक्षा देकर 11वीं में गणित का विषय चुन सकता था। लेकिन इस बार कोविड-19 संक्रमण की वजह से पहले ही परीक्षाओं पर संकट गहराया हुआ है। एक तरफ जहां सीबीएसई बोर्ड ने अधूरी परीक्षाएं कराए बिना ही आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट की घोषणा कर दी थी। वहीं अभी तक कंपार्टमेंट परीक्षा का शेड्यूल भी जारी नहीं हुआ है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को नए सत्र में पढ़ाई में संकट न हो इसके लिए यह आदेश दिए हैं। हालांकि कुछ वक्त पहले ही यह साफ किया है सीबीएसई बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षाएं कराएगा, क्योंकि ऐसा नहीं कराने पर हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाएगा। लेकिन यह परीक्षाएं कब हो पाएंगी यह साफ नहीं हुआ है। इसलिए शायद बोर्ड ने स्टूडेंट्स को सहूलियत दी है।


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Sunday, August 2, 2020

संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम

संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम


बरेली : यूपी बोर्ड और सीबीएसई की तर्ज पर अब माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड के छात्र-छात्रओं को भी कम सिलेबस से पढ़ाई करनी होगी।


बोर्ड ने कोविड-19 की वजह से प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक सिलेबस में 30 फीसद कटौती कर दी है। इसके लिए बीते दिनों परिषद की बैठक हुई थी, जिसमें समिति के सदस्यों से सुझाव मांगे गए थे। अब बोर्ड ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।

Wednesday, July 22, 2020

यूपी बोर्ड 2020-21: हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट का नया पाठ्यक्रम जारी, यहां क्लिक करके कक्षा- 9,10,11 एवं 12 के विषयों के पाठ्यक्रम करें डाउनलोड

यूपी बोर्ड सिलेबस 2020-21: हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट  का नया सिलेबस जारी, यहाँ खबर के नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके सभी विषयों के पाठ्यक्रम डाउनलोड।










नई दिल्ली :  UP Board Reduced Syllabus 2020-21: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) यानि यूपी बोर्ड से नये शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए हाई स्कूल और इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम को 30 फीसदी तक संक्षिप्त किये जाने की घोषणा राज्य के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने 17 जुलाई 2020 को की थी।



इसके बाद से ही यूपी बोर्ड रिड्यूस्ड सिलेबस 2020-21 को लेकर छात्रों, शिक्षकों एवं विद्यालयों के बीच उहापोह की स्थिति बनी हुई थी। इस पर विराम लगाते हुए यूपी बोर्ड ने शैक्षिक सत्र 2020-21 (परीक्षा वर्ष 2021) के लिए हाई स्कूल यानि कक्षा 9-10 और इंटरमीडिएट यानि कक्षा 11-12 के लिए संक्षिप्त पाठ्यक्रम को जारी कर दिया है। यूपी बोर्ड न्यू सिलेबस 2021 को सोमवार, 20 जुलाई 2020 को परिषद की ऑफिशियल वेबसाइट, upmsp.edu.in पर जारी किया गया, जहां छात्र अपनी सम्बन्धित कक्षा के लिए पाठ्यक्रम डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही, छात्र यूपी बोर्ड हाई स्कूल सिलेबस 2021 या यूपी बोर्ड या इंटरमीडिएट सिलेबस 2021 को नीचे दिये गये डायरेक्ट लिंक से भी डाउनलोड कर सकते हैं।


🔹 कक्षा- 9 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड

🔹 कक्षा- 10 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड


🔹 कक्षा- 11 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड

🔹 कक्षा- 12 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड



यूपी बोर्ड : धारा 370 हटाने का फैसला भी पढ़ेंगे बच्चे, 2020-21 के संशोधित पाठ्यक्रम में इसे किया गया है शामिल।

प्रयागराज :: यूपी बोर्ड के छात्र जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का फैसला पढ़ेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 2020-21 सत्र से अपने कोर्स में इसे शामिल किया है। यूपी बोर्ड की कक्षा 12 के लिए राजनीति विज्ञान की किताब स्वतंत्र भारत में राजनीति के क्षेत्रीय आकांक्षाएं पाठ के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की राजनीति से जुड़ा पैराग्राफ हटाकर उसके स्थान पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का चैप्टर जोड़ा है।


किताब में लिखा है-'2014 में जम्मू-कश्मीर में हुए चुनाव में पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक मतदान होना रिकॉर्ड किया गया। बीजेपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में बीजेपी के साथ एक मिली-जुली सरकार सत्ता में आई। मुफ्ती मो. सईद के निधन के बाद,बेटी महबूबा मुफ्ती अप्रैल, 2016 में राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। महबूबा मुफ्ती के कार्यकाल में बाहरी और भीतरी तनाव बढ़ाने वाली बड़ी आतंकवादी घटनाएं हुईं। जून, 2018 में बीजेपी ने मुफ्ती सरकार को दिया गया समर्थन वापस लेने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।

पूरी होंगी राजनीतिक व विकास की आकांक्षाएं :  5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 द्वारा अनुच्छेद 370 समाप्त कर दिया गया और राज्य को पुनर्गठित कर दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख बना दिए गए। जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख भारत में बहुलवादी समाज के जीते-जागते उदाहरण हैं। वहां न केवल धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषाई, जातीय और जनजातीय विविधताएं हैं बल्कि विविध प्रकार की राजनीतिक और विकास की आकांक्षाएं हैं, जिन्हें नवीनतम अधिनियम द्वारा प्राप्त करने की इच्छा की गई है।


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एनसीईआरटी कोर्स में प्रदेश के नए नक्शे के साथ धारा 370 हटाने का घटनाक्रम गया जोड़ा

एनसीईआरटी कोर्स में प्रदेश के नए नक्शे के साथ धारा 370 हटाने का घटनाक्रम गया जोड़ा

 

एनसीईआरटी ने 12वीं कक्षा में राजनीति विज्ञान की पाठ्य पुस्तक के एक अध्याय में बदलाव किया है। पिछले साल जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ब्योरा इस केंद्र शासित प्रदेश के नए नक्शे के साथ दिया है। साथ ही इसी अध्याय में अलगाववाद संबंधी एक पैराग्राफ हटा दिया गया है।


राष्ट्रीय शैक्षिक और अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) के अधिकारियों ने बताया कि कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में केवल जम्मू और कश्मीर के पुराने नक्शे की जगह नए नक्शे को जगह दी गई है। वर्ष 2020-21 शैक्षणिक सत्र के लिए जारी इस अध्याय का शीर्षक ‘स्वतंत्रता से अब तक भारत में राजनीति’ है। क्षेत्रीय प्रेरणा विषय से ‘अलगाववाद और उससे आगे’ शीर्षक वाले पैराग्राफ को भी हटा दिया गया है।


 इस किताब के इस अध्याय में भाजपा के महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लेने पर सरकार गिरने के बाद जम्मू और कश्मीर में जून 2018 में राष्ट्रपति शासन लगाने का उल्लेख है। और अंत में संविधान में संशोधन करके जम्मू और कश्मीर को स्वायत्तता देने वाले अनुच्छेद 370 हटाने का पूरा विवरण दिया गया है।

Tuesday, July 21, 2020

कोराना प्रभाव : यूपी बोर्ड में 12वीं के छात्र परसाई के व्यंग और मर्चेंट ऑफ वेनिस नहीं पढ़ेंगे, 30% तक कोर्स गया घटाया

 कोराना प्रभाव : यूपी बोर्ड में 12वीं के छात्र परसाई के व्यंग और मर्चेंट ऑफ वेनिस नहीं पढ़ेंगे, 30% तक कोर्स गया घटाया


कोरोना के कारण स्कूलों में समय से पढ़ाई-लिखाई शुरू नहीं हो पाने की स्थिति में यूपी बोर्ड ने कक्षा 9 से 12 तक का कोर्स इस साल के लिए 30 प्रतिशत तक कम कर दिया है। बोर्ड ने संशोधित पाठ्यक्रम को अपनी वेबसाइट पर सोमवार रात अपलोड कर दिया। बदले पाठ्यक्रम के मुताबिक इस साल कक्षा 12 कला वर्ग के छात्र-छात्राओं के हिन्दी विषय से गद्य में हरिशंकर परसाई की निंदा रस और अंग्रेजी से मर्चेंट ऑफ वेनिस प्ले को बाहर कर दिया गया है।


हिन्दी के प्रमुख लेखकों सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, मैथिलीशरण गुप्त और रामधारी सिंह दिनकर आदि की कुछ रचनाओं को बाहर किया है लेकिन कुछ रचनाएं शामिल है। केपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. योगेन्द्र सिंह ने बताया कि कक्षा 10 हिंदी गद्य में कुल 7 पाठ में से 3 पाठ ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से-रामधारी सिंह दिनकर, क्या लिखूं-पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और पानी में चंदा और चांद पर आदमी-जयप्रकाश भारती पाठ्यक्रम से बाहर किए गए हैं। 


पद्य के 13 पाठ में से सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा व माखनलाल चतुर्वेदी की कुछ की रचनाओं का कुछ हिस्सा हटा दिया गया है जबकि मैथिलीशरण गुप्त की भारतमाता का मंदिर है यह, केदारनाथ सिंह की नदी और अशोक बाजपेयी की युवा जंगल पूरा पाठ हटाया गया है। सीबीएसई से सीख लेते हुए यूपी बोर्ड ने पाठ्यक्रम किसी ऐसे हिस्से को बाहर नहीं किया जिससे किसी प्रकार की विवाद की स्थिति पैदा हो। साथ ही यह गुंजाइश भी रखी है कि यदि कोई तर्कपूर्ण आपत्ति करता है तो उसपर विषय विशेषज्ञों से सलाह करके आवश्यक संशोधन किया जा सके।


10वीं-12वीं के कई विषयों में महत्वपूर्ण बदलाव
10वीं के अंग्रेजी प्रोस से टॉर्च बियरर व ऑवर इंडियन म्यूजिक, पोएट्री से द नेशन बिल्डर्स, सप्लीमेंटरी रीडर से माई ग्रेटेस्ट ओलम्पिक प्राइज को बाहर किया गया है। विज्ञान से धतु एवं अधतु, तत्वों का आवर्त वर्गीकरण, प्राकृतिक संसाधन, विद्युत का प्रभाव्र विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव को इस साल के लिए बाहर रखा गया है। गणित से त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएं, प्रायिकता व श्रेणी आदि, सामाजिक विज्ञान से औद्योगीकरण का युग, राजनीतिक दल, मुद्रा तथा साख को बाहर किया गया है। 12वीं के इतिहास से उपनिवेशवाद, विभाजन को समझना जबकि नागरिक शास्त्र से समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व, समकालीन विश्व में सुरक्षा, स्वतंत्र भारत में राजनीति आदि, समाजशास्त्र में भूमंडीकरण और सामाजिक परिवर्तन समेत कुछ पाठ हटाए गए हैं। 

Saturday, July 18, 2020

यूपी बोर्ड में पाठ्यक्रम घटने के अनुमोदन का इंतजार, 30% कौन पाठ शामिल कौन नहीं, स्पष्ट नहीं

यूपी बोर्ड में पाठ्यक्रम घटने के अनुमोदन का इंतजार, 30% कौन पाठ शामिल कौन नहीं, स्पष्ट नहीं


प्रयागराज : सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड ने भी संबद्ध कालेजों का पाठ्यक्रम घटाने का ऐलान किया है। अब तक यह तय नहीं है कि छात्र छात्रओं को किस विषय का कौन पाठ नहीं पढ़ना है। सभी उसका इंतजार कर रहे हैं। पाठ्यक्रम घटने का असर प्रदेश भर के 27,373 कालेजों की पढ़ाई पर पड़ेगा। बोर्ड ने जून माह में पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा था, उस पर शासन में मंथन चला उपमुख्यमंत्री ने गुरुवार को 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम घटाने का ऐलान कर दिया है। अब माध्यमिक शिक्षा निदेशक के अनुमोदन के बाद विषयवार पाठ्यक्रम बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करने की तैयारी है।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण अब तक स्कूल-कालेज नहीं खुल सके हैं जिससे पढ़ाई बाधित है, शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल से ही शुरू हो चुका है। शासन, बोर्ड प्रशासन ने छात्र-छात्रओं की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन माध्यम को अपनाया है। लेकिन, फिर भी उस गति से पढ़ाई नहीं हो सकी है। इसीलिए पाठ्यक्रम को 30 प्रतिशत कम किया गया है। यूपी बोर्ड में कई विषयों में एनसीईआरटी का ही पाठ्यक्रम लागू हो चुका है। बोर्ड ने शासन के निर्देश पर जून में ही शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय की देखरेख में पाठ्यक्रम घटाने के लिए बैठकें की थीं। पाठ्यचर्या समिति (पाठ्यक्रम बनाने वाले) के सदस्यों व विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा। इसमें हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अहम विषयों में पाठ्यक्रम कम करने पर सहमति बनी थी।


 इसके अलावा कक्षा नौ व ग्यारह का सिलेबस घटाने का प्रस्ताव है। यह पत्रवली अनुमोदन के लिए शिक्षा निदेशक माध्यमिक के यहां लंबित है। आदेश निर्गत होने के बाद बोर्ड प्रशासन विषयवार घटाए गए पाठ्यक्रम को वेबसाइट पर अपलोड करेगा, ताकि छात्र-छात्रएं, शिक्षक व अभिभावक उससे अवगत हो सकें। उधर, यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि पाठ्यक्रम घटाने का का निर्णय हो गया है, उसका अनुपालन कराया जाएगा। पाठ्यक्रम में कमी सिर्फ इसी सत्र के लिए है, अगले शैक्षिक सत्र से घोषित पूरा पाठ्यक्रम ही पढ़कर परीक्षा की तैयारी करनी होगी।