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Saturday, May 8, 2021

हरियाणा में बड़ा फैसला : निजी स्कूलों में चलेंगी NCERT की किताबें।

हरियाणा :  NCERT से बाहर की किताबें नहीं पढ़ा सकेंगे निजी स्कूल, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

हरियाणा के निजी स्कूलों में चलेंगी एनसीईआरटी की किताबें। 


हरियाणा में सभी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें लगाने का निर्देश दिया गया है। राज्य के निजी स्कूल अब कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे।


चंडीगढ़। हरियाणा में निजी स्कूल संचालक अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से बाहर की पुस्तकें नहीं पढ़ा सकेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों में अनिवार्य रूप से पहली से बारहवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगाने के आदेश दिए हैं।


स्कूल निदेशक ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं। इससे निजी स्कूल मनमर्जी से निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे। अभी तक अधिकतर निजी स्कूलों में कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाई जा रहीं थी।


वर्ष 2016 से यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन चल रहा है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि शिक्षा नियमावली 2003 में शिक्षा निदेशक को अधिकार नहीं था कि वह पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करें। प्रदेश सरकार ने विगत एक मार्च को नियमावली में संशोधन कर अब यह अधिकार शिक्षा निदेशक को दे दिया है।


हरियाणा में किसी भी बोर्ड से संबंद्धता रखने वाले सभी निजी स्कूलों में अब एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू करनी होंगी। एनसीईआरटी की कक्षा पहली से बारहवीं तक की किताबें अमूमन 500 से 800 रुपये तक मिल जाती हैं, जबकि निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाकर बच्चों से छह हजार से आठ हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। कई निजी प्रकाशकों द्वारा निजी स्कूल संचालकों को किताबों पर 70 फीसद तक कमीशन दिया जाता है, जिसकी मार अभिभावकों की जेब पर पड़ती है।

Sunday, April 11, 2021

यूपी बोर्ड : एनसीईआरटी की किताबों का संकट, नई किताबों के लिए प्रकाशकों को टेंडर नहीं

यूपी बोर्ड : एनसीईआरटी की किताबों का संकट, नई किताबों के लिए प्रकाशकों को टेंडर नहीं 


’>> ऑनलाइन भी नहीं कर सकेंगे अंग्रेजी की पढ़ाई

’>> कॉमर्स में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम, किताबों का संकट


प्रयागराज : कोरोना संक्रमण की वजह से भले ही अभी कालेज बंद हैं, लेकिन 9वीं व 11वीं से हाईस्कूल व इंटर में पहुंचे छात्र-छात्रएं अंग्रेजी की पढ़ाई फिलहाल ऑनलाइन भी नहीं कर पाएंगे। यही हाल कॉमर्स विषय का भी है, क्योंकि इस वर्ष नई किताबों के लिए प्रकाशकों को टेंडर नहीं दिया गया है और इन विषयों का पाठ्यक्रम बदल चुका है। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि वह एनसीईआरटी से संपर्क करके किताबों का प्रबंध करने में जुटा है।



यूपी बोर्ड से संबद्ध 27 हजार से अधिक माध्यमिक कालेजों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में अंग्रेजी का पाठ्यक्रम बदल गया है। 9वीं व 11वीं की अंग्रेजी की किताबें बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन 10वीं व 12वीं की बदले पाठ्यक्रम की किताबें इस वर्ष प्रकाशित होनी थीं, लेकिन रायल्टी आदि के विवाद में प्रकाशन नहीं हो सका है। इसी तरह कॉमर्स (वाणिज्य) विषय में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम 11वीं कक्षा से लागू हुआ है। इस विषय की भी किताबों का टेंडर नहीं किया जा सका है। ऐसे में अभी ऑनलाइन पढ़ाई भी इन विषयों की नहीं हो पाएगी। बोर्ड प्रशासन का कहना है कि अंग्रेजी व कॉमर्स की किताबों का टेंडर नहीं हो सका है। किताबों का इंतजाम करने के लिए पत्रचार किया गया है।

Monday, April 5, 2021

कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


नई दिल्ली । शिक्षा व्यवस्था किसी भी देश का भविष्य निर्धारित करती है। लेकिन जब शिक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम में चलाई जाने वाले किताबों पर निजी स्कूल एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने की मनमानी करते हैं तो अभिभावकों का परेशान होना लाजिमी है। देशभर में सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) से संबंधित हर स्कूल के अलग कोर्स और किताबें हैं।


इन स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगवाने के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवाई जाती है। एनसीईआरटी की किताबों का अधिकतम मूल्य अगर 50 से 150 रूपए हैं तो वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 300 से 600 रूपये तक की होती हैं।


वहीं, सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


एनसीईआरटी की किताबें उबाऊ और सामग्री की कमी

मयूर विहार फेज-1 स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक एनसीईआरटी की किताबें पुराने ढर्रे पर चली आ रही है, किताबें काफी उबाऊ भी हैं और उनमें सामग्री की भी कमी है। किताब में केवल संक्षिप्त सवाल होते है, जो छात्र को प्रैक्टिस करने के लिए कम पड़ते हैं। आप यह आलेख प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।वहीं, द्वारका स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक उनके स्कूल में वो फिलहाल कुछ किताबें विदेशी प्रकाशकों की इस्तेमाल कर रही हैं। उनके मुताबिक निजी प्रकाशकों की किताबें 21वीं सदी के छात्रों के हिसाब से हैं।


राजेंद्र नगर स्थित सलवान पब्लिक स्कूल के एक शिक्षक के मुताबिक एनसीईआरटी की कुछ किताबें कई बार बाजार में ही उपलब्ध नहीं होती या देरी से मिलती है। वहीं, निजी प्रकाशकों की किताबें आसानी से उपलब्ध हो जाती है इसलिए स्कूल निजी प्रकाशकों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। राजधानी के ज्यादातर निजी स्कूलों की निजी प्रकाशकों की किताबें इस्तेमाल करने को लेकर लगभग यही तर्क है।

प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षा के लिए एनसीईआरटी बेहतर

इन सभी निजी स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं के छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती है। इस पर निजी स्कूलों की तर्क है कि बोर्ड की परीक्षाओं में ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी की किताबों से ही आते हैं।

करोल बाग स्थित दिल्ली सरकार के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य हंस राज मोदी बताते हैं कि उनके स्कूल में सभी छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती हैं। अगर किसी विषय में एनसीईआरटी की किताब नहीं है तो स्कूल छात्रों को सपोर्ट मटेरियल उपलब्ध कराता है। उनके मुताबिक स्कूल के सभी छात्र बोर्ड के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एनसीईआरटी का ही इस्तेमाल करते हैं क्योंकि जितना अच्छा कान्सेप्ट (संकल्पना) एनसीईआरटी की किताबें से समझ आता है उतना शायद ही किसी निजी प्रकाशक की किताबों से आए।

स्कूलों का बंधा होता है कमीशन

दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम के मुताबिक शासन प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद ज्यादातर निजी स्कूल एनसीईआरटी की किताबों को अपनी सूची में शामिल करने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल से ही दुकान का पता बताया जाता है कि कहां से निजी प्रकाशक की किताब खरीदनी है और किताब में लिखे दाम पर ही किताब खरीदनी पड़ती है। क्योंकि स्कूलों की कमीशन बंधा होता है। उनके मुताबिक किताब वितरण के जो ठेके दुकानों को दे रखे थे उसमें भी मनमर्जी चलाई जाती है, स्कूलों को जहां से कमीशन कम हुआ वहां से हटाकर दूसरी जगह आवंटित कर दिया जाता है। 

वहीं, फेसबुक, ट्वीटर पर एनसीईआरटी बनाम निजी प्रकाशकों की किताबों को लेकर मुद्दा उठा रहे शिक्षाविद और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निरंजन कुमार के मुताबिक आज सबसे ज्यादा परेशान निम्न मध्यम वर्गीय परिवार है। वो जैसे तैसे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाता हैं उस पर भी स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों को खरीदने का जो दबाव बनाया है वो अभिभावकों के लिए सही नहीं है। उनके मुताबिक स्कूलों का काम सिर्फ शिक्षा देना होना चाहिए न कि शिक्षा के नाम पर व्यापार करना।

एनसीईआरटी सचिव मेजर हर्ष कुमार ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और प्रोफेसर काफी शोध के बाद छात्रों के लिए किताबें तैयार करते हैं। इन्हें तैयार करने में भी लंबा समय लगता है। एनसीईआरटी की किताबें देशभर के 22 से ज्यादा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में चलती हैं और ये देशभर के छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। आज सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र इन्हीं किताबों से पढ़कर उत्तीर्ण होते हैं। इसका दाम बी निजी प्रकाशकों के मुकाबले बहुत कम होता है। निजी स्कूलों को इन किताबों को आठवीं तक की कक्षा में जरूर शामिल करना चाहिए।

Friday, March 26, 2021

कक्षा 3 से 12 के लिए लॉन्च हुईं कॉमिक बुक्स, दीक्षा पर पढ़ सकेंगे छात्र

NCERT Curriculum Based Comic Books launched 2021:  कक्षा 3 से 12 के लिए लॉन्च हुईं कॉमिक बुक्स, दीक्षा पर पढ़ सकेंगे छात्र


केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने
कॉमिक बुक्स सरकार के ऑनलाइन पोर्टल ‘DIKSHA’ पर उपलब्ध है। ऑफिशियल वेबसाइट diksha.gov.in पर या ‘DIKSHA’ मोबाइल एप्लीकेशन पर इसे प्राप्त कर सकते हैं। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के एक हजार से अधिक शिक्षकों व छात्रों ने कॉमिक बुक्स बनाने में सहयोग किया है।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों के अध्यायों से जुड़ी 100 से अधिक पाठ्यक्रम-आधारित कॉमिक बुक्स लॉन्च किया है। इस संबंध में प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो इंडिया (PIB India) ने अपने ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट करके जानकारी दी है। कॉमिक बुक्स सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के टीचर्स और स्टूडेंट्स द्वारा तैयार की गई हैं और एनसीईआरटी द्वारा इसके पाठ्यक्रम के आधार पर डिजाइन किया गया है। इस पहल का लक्ष्य शिक्षण के माध्यम से बच्चों में सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है।


कॉमिक बुक्स को क्लास 3 से 12. के लिए 16 विषयों के लिए तैयार किया गया है। हर कॉमिक बुक में शॉर्ट लेसन हैं, जिसके बाद वर्कशीट उपलब्ध कराई गई है। सीबीएसई के मुताबिक, कॉमिक बुक्स में पर्सनल एजुकेशन के लिए शिक्षा के परिवर्तन की शुरुआत हुई है, क्योंकि 21वीं सदी की स्कूली शिक्षा को ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण, मूल्यों और परिवर्तनकारी दक्षताओं पर केंद्रित किया गया है।


कॉमिक बुक्स सरकार के ऑनलाइन पोर्टल ‘DIKSHA’ पर उपलब्ध है। छात्र ऑफिशियल वेबसाइट, diksha.gov.in पर या ‘DIKSHA’ मोबाइल एप्लीकेशन पर इसे प्राप्त कर सकते हैं। बता दें कि सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के एक हजार से अधिक शिक्षकों व छात्रों ने कॉमिक बुक्स बनाने में सहयोग किया है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। सीबीएसई के अनुसार, यह कदम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उठाया गया है, ताकि स्टूडेंट्स में वैचारिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए एक परिवर्तन लाया जा सके।

Wednesday, March 24, 2021

इस बार भी नहीं बढ़ेंगे कक्षा 9 से 12 तक की किताबों के दाम

इस बार भी नहीं बढ़ेंगे कक्षा  9 से 12 तक की किताबों के दाम

■ सबसे सस्ती 7₹ तो सबसे महंगी 66 रुपये की किताब


यूपी बोर्ड के कक्षा 9 से 12वीं तक के | सवा करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। एक अप्रैल से शुरू हो रहे नये सत्र 2021-22 में उनकी किताबों के दाम नहीं बढ़ेंगे। बोर्ड | ने पिछले साल प्रकाशकों से दो साल के | लिए अनुबंध किया था। इसलिए | किताबों की जो कीमत पिछले साल थी | वही इस साल भी रहेगी। इस सत्र से | 12वीं कॉमर्स और 10वीं 12वीं में | अंग्रेजी की किताबें राष्ट्रीय शैक्षिक | अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद | (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम पर आधारित लागू होनी है।


यूपी बोर्ड की किताबें एनसीईआरटी से भी 80 फीसदी तक सस्ती हैं। कक्षा 11 अंग्रेजी की किताब स्नैपशॉट बाजार में सिर्फ 7 रुपये में उपलब्ध है जबकि एनसीईआरटी की यही किताब 40 रुपये में उपलब्ध है। यूपी बोर्ड नौवीं की अर्थशास्त्र की किताब 9 रुपये में और 11वीं की 10 रुपये में है। 9वीं की अंग्रेजी, 12वीं की इतिहास एवं समाजशास्त्र की किताबें 11-11 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। सबसे महंगी किताब कक्षा 11 गणित विषय की है जो 66 रुपये की है।

Sunday, March 21, 2021

पंचाट के जरिये सुलझेगा यूपी बोर्ड का पुस्तक विवाद, नए सत्र में नहीं हुआ माध्यमिक शिक्षा की पुस्तकों का टेंडर

पंचाट के जरिये सुलझेगा यूपी बोर्ड का पुस्तक विवाद, नए सत्र में नहीं हुआ माध्यमिक शिक्षा की पुस्तकों का टेंडर


प्रयागराज : नया शैक्षिक सत्र शुरू होने को है। यूपी बोर्ड से संबद्ध 27 हजार से अधिक माध्यमिक कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्रओं को किताबें मुहैया कराने की जगह पुस्तकों की बिक्री के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। नए सत्र में किताबों के लिए टेंडर नहीं हो सका है। बोर्ड प्रशासन ने प्रकरण निस्तारण के लिए पंचाट तैनात करने का अनुरोध भी ठुकरा दिया था, जिस पर प्रकाशकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले में आर्बीट्रेशन की तैनाती की है। अब उम्मीद जगी है कि विवाद खत्म होगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2020-21 में एनसीईआरटी की किताबों के मुद्रण व वितरण के लिए टेंडर जारी किया था। प्रकाशकों से रायल्टी व जीएसटी भुगतान के लिए पत्रचार हुआ तो कोरोना संक्रमण का हवाला दिया गया।


कहा गया कि संक्रमण के दौरान बोर्ड के निर्देश पर ऑनलाइन पढ़ाई हुई, जिससे किताबों की बिक्री प्रभावित रही, अधिकांश किताबें बिकी ही नहीं। साथ ही किताबों का मुद्रण भी पूरा नहीं हो सका है। बोर्ड प्रशासन ने इन तर्को को नहीं माना और वास्तविक संख्या के आधार पर रायल्टी व जीएसटी भुगतान के साथ ही पंचाट की नियुक्ति को ठुकरा दिया।

बोर्ड के दावों में ही विरोधाभास

यूपी बोर्ड एक ओर प्रकाशकों से भुगतान कराने पर अड़ा है, वहीं नए सत्र में किताबें मुहैया कराने पर कहा जा रहा है कि पिछले सत्र में कोरोना के कारण किताबें बिकीं नहीं, बाजार में उपलब्ध हैं। सवाल यह है कि यदि किताबें बिकीं नहीं तो भुगतान किस बात का मांगा जा रहा? सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने कहा कि जिन विषयों का पाठ्यक्रम बदला है, उनकी किताबें एनसीईआरटी से मुहैया कराने की तैयारी है।

प्रकाशकों को कोर्ट से राहत

रायल्टी व जीएसटी भुगतान को लेकर प्रकाशक हाई कोर्ट पहुंचे। उनका कहना था कि कोविड के कारण करार के तहत किताबें नहीं छापी गयी। मांग भी नहीं थी, विशेष स्थिति में छूट देने से बोर्ड ने इन्कार किया है। करार में पंचाट (आर्बीट्रेशन) का क्लाज है। इसलिए पंचाट नियुक्त हो। हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस आरएल मेहरोत्र को आर्बीट्रेटर नियुक्त किया है, जो विवाद सुलझाएंगे, उन्होंने सहमति भी दे दी है।

Friday, March 19, 2021

यूपी बोर्ड : किताबों की आपूर्ति पर कोरोना का ग्रहण, ऑनलाइन पढ़ाई होने से किताबों की बिक्री ठप

यूपी बोर्ड : किताबों की आपूर्ति पर कोरोना का ग्रहण, ऑनलाइन पढ़ाई होने से किताबों की बिक्री ठप

संबद्ध माध्यमिक कॉलेजों में पढ़ने वालों के लिए जनवरी में होता था प्रबंध


प्रयागराज : यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक कॉलेजों में कोरोना संक्रमण की वजह से सिर्फ पढ़ाई ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि किताबों की आपूíत पर भी ग्रहण लगा है। इस वर्ष किताबों के लिए होना वाला नियमित टेंडर तय समय पर नहीं हो सका। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि बाजार में किताबों की भरपूर उपलब्धता है इसलिए नए सत्र में पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा। यह जरूर है कि जिन विषयों का पाठ्यक्रम बदला है उनकी किताबों का इंतजार रहेगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड का वैसे तो संबद्ध 27 हजार से अधिक कॉलेजों की पढ़ाई पर सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है, वह सिर्फ पाठ्यक्रम तैयार कराता है और किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करता रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान जब लंबे समय तक कॉलेज नहीं खुले तो टेलीविजन व ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई। 


पहली बार यूपी बोर्ड ने सीधे इसकी कमान संभाली। अगस्त में शैक्षिक पंचांग जारी करने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई की देखरेख बोर्ड ने ही की। छात्रओं की सहूलियत के लिए 30 प्रशित पाठ्यक्रम कम करके वेबसाइट पर अपलोड किया गया। बोर्ड ने पिछले साल ही किताबों के लिए नया टेंडर जारी कराने को प्रस्ताव शासन को भेजा था, टेंडर नहीं किया गया। 


नए शैक्षिक सत्र से शुरू होने वाली पढ़ाई में किताबों की कमी नहीं रहेगी, लेकिन, अंग्रेजी व कॉमर्स की पढ़ाई शुरू होने पर संशय जरूर है, क्योंकि इन दोनों विषयों का पाठ्यक्रम बदल रहा है। बोर्ड ने अंग्रेजी विषय में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम कक्षा 9 व 11 में लागू कर दिया था लेकिन, नए सत्र से 10वीं व 12वीं में बदले पाठ्यक्रम आधारित किताबों की जरूरत होगी। कॉमर्स में कक्षा 11 में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू होना है। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि इसका इंतजाम सत्र शुरू होने तक पूरा कर लिया जाएगा।

Saturday, January 30, 2021

बेसिक शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके बताएंगी ‘आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका’

बेसिक शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके बताएंगी ‘आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका’



सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदलने की तैयारी है। इस बार एनसीईआरटी ने बच्चों के लिए आधुनिक तकनीक पर आधारित किताबें भेजी हैं। साथ ही उन किताबों को कैसे पढ़ाना है। इसके लिए शिक्षकों को भी छह-छह किताबों का एक सेट भी दिया है। यह किताबें शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके बताएंगी।


एनसीईआरटी ने इस बार कक्षा एक से तीन तक के लिए सहज नाम से पुस्तकें भेजी हैं। कक्षा एक के लिए सहज-1, कक्षा दो के लिए सहज-2 और कक्षा तीन के लिए सहज-3 किताबें आई हैं। सहज में कक्षा के हिसाब से भाषा और गणित विषय की सामग्री दी गई है, जिसका मकसद बच्चों में भाषा और गणित का विकास करना है। इसके अलावा पहली बार उक्त कक्षाओं को पढ़ाने वाले हर शिक्षक के लिए छह-छह किताबों का सेट भेजा गया है। इन किताबों का नाम आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका रखा गया है। 

हर कक्षा के लिए एक किताब, भाषा और एक गणित विषय पर आधारित है। इस प्रकार कक्षा एक से तीन तक के लिए कुल छह किताबों का एक-एक सेट हर शिक्षक के लिए आया है। बच्चों के लिए आई सहज पुस्तिका को कैसे पढ़ाना है? यह सब आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका में दिया गया है। यानी सहज पुस्तिका को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका पुस्तिकाओं का गहन अध्ययन करना होगा।


शिक्षकों को भेजे गए सेट
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका किताबों के सेट भेज दिए हैं। इसके अलावा प्रत्येक बीआरसी, डीपीओ, एसआरजी, एआरपी को भी आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका का एक-एक सेट तथा डायट को दो सेट भेजे गए हैं।


मॉडल टीचिंग प्लान
आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका के सेट में मॉडल टीचिंग प्लान दिए गए हैं। राज्य परियोजना निदेशक विजयकिरण आनंद ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मॉडल टीचिंग प्लान को समझने के लिए प्रत्येक शिक्षक सेट का अध्ययन अच्छे से करे।


कक्षा एक से तीन तक के बच्चों में भाषा और गणित के विकास के लिए एनसीईआरटी से सहज नाम से किताबें आई हैं। इसके अलावा पहली बार एनसीईआरटी ने उक्त कक्षाओं को सहज पुस्तिका पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका नाम से किताबों का सेट भेजा है, जिसमें मॉडल टीचिंग प्लान दिए गए हैं। यानी सहज किताबों को कैसे पढ़ाना है। इसकी पूरी जानकारी आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका में दी गई है। - रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए

Saturday, August 8, 2020

फतेहपुर : शिक्षक स्कूल ले गए किताबें, मद में आई धनराशि विभाग में डंप, शिक्षकों ने की भाड़े की मांग

फतेहपुर : शिक्षक किताबें ले गए स्कूल, बीईओ को मिलेगा भाड़ा।

फतेहपुर में ब्लाक संसाधन केंद्रों से परिषदीय स्कूलों तक किताबें पहुंचाने के लिए भाड़े के नाम पर अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग ने एक धेला भुगतान नहीं किया है। जबकि इस मद में आई आठ लाख का बजट अभी तक डंप है। ब्लाक संसाधन केंद्रों से स्कूलवार शिक्षकों को किताबें आवंटित कर भेजी गई हैं। अब तक 81 प्रतिशत किताबें शिक्षक स्कूल में पहुंचा चुका है।






जिले में संचालित 2,650 परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से लेकर आठ तक पंजीकृत दो लाख 38 हजार बच्चों को मुफ्त में देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने 17 लाख 58 हजार 613 किताबें खरीदी हैं। जुलाई महीने में आईं 81 फीसदी किताबें शिक्षकों के माध्यम से स्कूल भेजी जा चुकी हैं। इस महीने के पहले सप्ताह में सात प्रतिशत किताबें और आई हैं। इनका शुक्रवार को सत्यापन कराया गया है। यह 10 अगस्त को ब्लाक संसाधन केंद्र भेज दी जाएंगी।




चालू सत्र में पहली बार सर्व शिक्षा अभियान के तहत ब्लाक संसाधन केंद्रों से स्कूल तक किताबें भेजने के लिए बीईओ (ब्लॉक एजूकेशन ऑफिसर) को जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए सभी 13 बीईओ के खाते में स्कूल तक किताबें पहुंचाने का भाड़ा आठ लाख की धनराशि भेजी गई है। शिक्षकों के मोबाइल में मैसेज भेजकर उन्हें ब्लाक संसाधन केंद्र भेजकर किताबें आवंटित की गई हैं। शिक्षक बाइकों से बोरियों में भरकर किताबें स्कूल ले गए हैं। ऐसे में वह भाड़े की मांग कर रहे हैं।


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Monday, July 27, 2020

लखनऊ : सरकारी स्कूल में वाहनों से किताबें भेजी जाएंगी, सभी बीईओ को अपने क्षेत्र के स्कूलों का रूट चार्ट बनाने के निर्देश


लखनऊ | राजधानी के सरकारी प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों तक अब वाहन के जरिए किताबें पहुंचाई जाएंगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर गाड़ियों की व्यवस्था की गई है।
आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान में खबर छपने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय हरकत में आया है। 
बच्चों को किताबें नहीं मिल पाने के मुद्दे को हिंदुस्तान ने रविवार के अंक में प्रमुखता से उठाया। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय हरकत में आया है।

बीएसएफ दिनेश कुमार ने रविवार को वाहन से किताबें पहुंचाने के लिए आदेश जारी कर दिया। बीएसए की ओर से पूरे लखनऊ को 12 विकासखण्ड में बांटकर गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं। सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को अपने क्षेत्र के स्कूलों का रूट चार्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह चार्ट संबंधित ड्राइवर को उपलब्ध कराना होगा।

Thursday, July 9, 2020

यूपी बोर्ड की किताबें NCERT से भी 80 फीसदी तक सस्ती

यूपी बोर्ड की किताबें NCERT से भी 80 फीसदी तक सस्ती



यूपी बोर्ड की किताबें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से भी 80 फीसदी तक सस्ती हैं। कक्षा 11 अंग्रेजी की किताब स्नैपशॉट बाजार में सिर्फ 7 रुपये में मिल रही है जबकि एनसीईआरटी की यही किताब 35 रुपये में मिल रही है। 

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई



ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई


यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं।...
जेएनएन, मेरठ। यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई, लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है, लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं। हालात तो ये हैं कि बहुत से प्रकाशक किताबों से रायल्टी तक नहीं निकाल पा रहे।

प्रदेश में यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी पैटर्न की किताबों के प्रकाशन के लिए चार प्रकाशक अधिकृत किए गए हैं। इनमें रवि आफसेट प्रिटर्स एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा, राजीव प्रकाशन प्रयागराज, आलोक प्रिटर्स आगरा और काका संस नोएडा हैं। मेरठ के बहुत से प्रकाशक यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें व एनसीईआरटी से इतर किताबें प्रकाशित करते हैं। प्रकाशकों पर कोविड का व्यापक असर पड़ा है। मार्च में प्रकाशकों ने किताबें छाप दीं, लेकिन इस समय तक मुश्किल से 20 फीसद ही विक्रेताओं के पास पहुंच पाई। ये कहते हैं प्रकाशक


मार्च में किताबें सप्लाई कर दी थीं। बच्चे किताब नहीं खरीद रहे हैं, जिस वजह से दुकानदार किताब लेने को तैयार नहीं है। पिछले साल के मुकाबले मांग शून्य है। दुकान और प्रकाशक दोनों जगह स्टाक भरे हैं। पूरे प्रदेश की यही स्थिति है। इस साल रायल्टी भी नहीं निकाल पा रहे हैं। यह रायल्टी बोर्ड के माध्यम से एनसीईआरटी को जाती है। अतुल जैन, डायरेक्टर, रवि आफसेट प्रिटर एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा 


करीब 25 फीसद किताबें ही मार्केट में सप्लाई हुई थीं। 75 फीसद स्टॉक गोदाम में है। स्कूल कब खुलेंगे पता नहीं। यूपी बोर्ड में छात्रों के पास किताबें नहीं होंगी तो वे क्या पढ़ेंगे। बच्चों को प्रोत्साहित करें। किताबें खरीदें, स्वयं अध्ययन करें। अजय रस्तोगी, डायरेक्टर, चित्रा प्रकाशन, मेरठ 


यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें प्रकाशित करते हैं। इस बार मांग शून्य है। बच्चे किताब नहीं खरीद पा रहे हैं। जब तक स्कूल नहीं खुलेंगे, किताबों की मांग नहीं आएगी। सौरभ जैन, डायरेक्टर, विद्या प्रकाशन मेरठ 


किताबों की बिक्री के लिए विकल्प देना होगा। स्कूल के अंदर स्टाल लगा दिए जाएं, सेक्शन वाइज कक्षा में किताबें रख दी जाएं। अभिभावक को बुलाकर किताबें दी जा सकती हैं। मोहित जैन, नगीन प्रकाशन, मेरठ 


80 फीसद पुस्तक विक्रेताओं के पास जा चुकी हैं। लेकिन ये बच्चों तक नहीं पहुंची हैं। अगर अप्रैल में किताबें उपलब्ध करा दी जाती तो बहुत अच्छा रहता। यूपी बोर्ड में ऑनलाइन पढ़ाई तभी होगी जब हाथ में किताब हो। कोरोना की वजह से किताबों की बिक्री की सरकार ने अनुमति नहीं दी। अजय रस्तोगी, रीडर्स च्वाइस, मेरठ


सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बांटी जाएंगी किताबें, अभिभावकों को स्कूल बुलाकर दी जाएंगी पुस्तकें

परिषदीय स्कूलों में मुफ्त मिलती हैं किताबें, 

अभिभावकों को स्कूल बुलाकर दी जाएंगी पुस्तकें

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बांटी जाएंगी किताबें


परिषदीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की किताबें खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों तक पहुंच चुकी हैं। एक दो दिन में स्कूलों से किताबों का वितरण शुरू हो जाएगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार बच्चों के बजाए उनके अभिभावकों को स्कूल बुलाकर किताबें वितरित की जाएंगी। शिक्षकों को पुस्तक वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखना होगा। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकार की ओर से


निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाता है। लखनऊ में 1850 से अधिक स्कूलों में करीब एक लाख साठ हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि बच्चों की पुस्तकें छप कर आ चुकी हैं। इन्हें सभी ब्लाकों के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों तक पहुंचा दिया है। यहां से शिक्षक पुस्तकें ले जाकर वितरित करेंगे। 


उन्होंने बताया कि इस बार अभिभावकों को स्कूल बुलाकर पुस्तकें वितरित की जाएंगी। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक बार में दस से बारह अभिभावकों को ही पुस्तकें प्राप्त करने के लिए स्कूल बुलाएं। एक समय में अभिभावकों की भीड़ स्कूल में न लगने दें। पुस्तक वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जाए। हालांकि नगर क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पुस्तकें अभी नहीं पहुंची हैं। अधिकारियों का कहना है कि नगर क्षेत्र के छात्रों की पुस्तकें भी जल्द वितरित की जाएंगी।



अभिनव मॉडल स्कूल में पुस्तक वितरण शुरू

जिले के अभिनव मॉडल स्कूलों में बच्चों की पुस्तकों का वितरण शुरू हो गया है। एडी बेसिक पीएन सिंह और बीएसए दिनेश कुमार ने बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर पुस्तक वितरण की शुरूआत की। उन्होंने बताया कि इस बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि सब कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहें। अब यहां पर शिक्षक पुस्तकें वितरित करेंगे।

Wednesday, June 17, 2020

स्कूलों में पहुंचीं किताबें, बांटने की तैयारी शुरू, पाठ्य पुस्तक अधिकारी का दावा, 7.9 लाख किताबें छप कर तैयार

लखनऊ: जिले के बेसिक स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए 67 फीसदी किताबें पहुंचा दी गई हैं। दस दिनों के अंदर अभिभावकों को स्कूल परिसर में बुलाकर किताबें बांटी जाएंगी।
पाठ्य पुस्तक अधिकारी डॉ. पवन सचान ने बताया कि लॉकडाउन में भी किताबें छापने का काम जारी रहा, ताकि समय रहते किताबें बच्चों तक पहुंच जाएं। हमारी कोशिश है कि जून में ही बच्चों को किताबें पहुंचा दी जाएं, जिससे उनकी ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान असुविधा न हो। उन्होंने बताया कि इस साल लखनऊ में 11.9 लाख किताबें छापी जानी थीं, जिसमें 7.9 लाख किताबें फिलहाल छप चुकी हैं। बाकी बची हुईं किताबों की छपाई और बच्चों को उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है।

एक समय पर तीन अभिभावकों को एंट्री

वहीं, कोरोना के कारण इस साल किताबें बांटने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल रखा जाएगा। एक वक्त पर तीन अभिभावकों की एंट्री मिलेगी। भीड़-भाड़ को रोकने के साथ सैनिटाइजेशन का भी इंतजाम रहेगा।


Wednesday, April 15, 2020

अब ऑनलाइन मिलेंगी NCERT की किताबें, कक्षा-1 से 12 तक की किताबें अपलोड

अब ऑनलाइन मिलेंगी NCERT की किताबें, कक्षा-1 से 12 तक की किताबें अपलोड

Friday, January 10, 2020

यूपी बोर्ड : मार्च में ही बाजार में होंगी किताबें, बोर्ड ने प्रकाशकों से मांगी निविदा, टेंडर किया जारी, तीन फरवरी तक लिए जाएंगे ऑनलाइन आवेदन

यूपी बोर्ड : मार्च में ही बाजार में होंगी किताबें, बोर्ड ने प्रकाशकों से मांगी निविदा, टेंडर किया जारी, तीन फरवरी तक लिए जाएंगे ऑनलाइन आवेदन।






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Sunday, October 6, 2019

सहायता प्राप्त विद्यालय : बाजार ने सरकारी पुस्तकों की उपलब्धता न होने से लिया अहम निर्णय, अपने पब्लिकेशन की किताबें भी पढ़ाएगा विद्या भारती

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Wednesday, August 21, 2019

आईसीएसई के स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी एनसीईआरटी की किताबें, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश पर कार्रवाई शुरू

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Tuesday, August 13, 2019

कुशीनगर : 15 अगस्त 2019 तक अनिवार्य रूप से निःशुल्क यूनिफॉर्म, पाठ्य-पुस्तकों/कार्यपुस्तिकाओं, जूता-मोजा, स्कूल बैग वितरित किये जाने संबंधी आदेश सभी बीईओ को जारी, देखें

कुशीनगर : 15 अगस्त 2019 तक अनिवार्य रूप से निःशुल्क यूनिफॉर्म, पाठ्य-पुस्तकों/कार्यपुस्तिकाओं, जूता-मोजा, स्कूल बैग वितरित किये जाने संबंधी आदेश सभी बीईओ को जारी, देखें।

Sunday, August 4, 2019

शतप्रतिशत यूनिफार्म व किताबें वितरण न होने पर करें कार्रवाई, समीक्षा बैठक में एडी बेसिक, प्रयागराज ने दिए निर्देश



शतप्रतिशत यूनिफार्म व किताबें वितरण न होने पर करें कार्रवाई, समीक्षा बैठक में एडी बेसिक, प्रयागराज ने दिए निर्देश